27 जुलाई 2026
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राम प्रसाद बिस्मिल जयंती: योगी, भजन लाल, धामी समेत दर्जनों नेताओं ने काकोरी नायक को किया नमन

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राम प्रसाद बिस्मिल जयंती: योगी, भजन लाल, धामी समेत दर्जनों नेताओं ने काकोरी नायक को किया नमन

सारांश

काकोरी ट्रेन एक्शन के नायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर 11 जून को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली और बिहार के मुख्यमंत्रियों समेत केंद्रीय मंत्रियों ने एक्स पर भावभीने संदेश जारी किए — क्रांतिकारी विरासत को सत्तारूढ़ दल की राजनीतिक स्मृति में केंद्रीय स्थान मिलता दिख रहा है।

मुख्य बातें

11 जून को पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
CM योगी आदित्यनाथ, CM भजन लाल शर्मा, CM पुष्कर सिंह धामी और CM रेखा गुप्ता ने एक्स पर संदेश जारी किए।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और यूपी डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने भी बिस्मिल के बलिदान को नमन किया।
बिस्मिल ने 9 अगस्त 1925 को काकोरी ट्रेन एक्शन का नेतृत्व किया था; 19 दिसंबर 1927 को 30 वर्ष की आयु में उन्हें फाँसी दी गई।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने भी श्रद्धांजलि दी।

काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर 11 जून को देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ केंद्रीय मंत्रियों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर बिस्मिल के बलिदान और राष्ट्रभक्ति को स्मरण किया।

मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, "भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी, प्रखर राष्ट्रभक्त एवं महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर उन्हें सादर नमन। स्वाधीनता संग्राम में उनके अदम्य साहस, राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण एवं काकोरी ट्रेन एक्शन में निभाई गई उनकी ऐतिहासिक भूमिका ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को चुनौती देते हुए देशभर में स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई।"

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिखा, "काकोरी कांड के नायक एवं देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महान क्रांतिकारी पं. राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर कोटिशः नमन। आपके विचार हमें सदैव राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।"

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा, "मां भारती के अमर सपूत, महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। काकोरी क्रांति के महानायक बिस्मिल जी का सर्वोच्च बलिदान और राष्ट्रभक्ति का संदेश हर पीढ़ी को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।"

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, "काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक, स्वाधीनता आंदोलन के अमर क्रांतिकारी, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। मातृभूमि के प्रति आपकी अनन्य आराधना और अद्वितीय बलिदान हम सभी को राष्ट्रसेवा के पथ पर निरंतर अग्रसर रहने की प्रेरणा देता है।"

उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के संदेश

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा, "भारत मां के वीर सपूत, स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने अपने क्रांतिकारी विचारों, ओजस्वी लेखनी और सर्वोच्च बलिदान से देश के युवाओं में स्वतंत्रता व राष्ट्रसेवा की अलख जगाई।"

यूपी सरकार में मंत्री नंद गोपाल नंदी ने बिस्मिल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए लिखा, 'दुनिया से गुलामी का मैं नाम मिटा दूंगा, एक बार जमाने को आजाद बना दूंगा।' उन्होंने काकोरी कांड के नायक को सादर नमन अर्पित किया।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लिखा, "महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा के प्रमुख सेनानी के रूप में उनका कार्य सच्ची देशभक्ति का प्रतीक है।"

बिहार के नेताओं की प्रतिक्रिया

बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि बिस्मिल का त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने लिखा, "उनका त्याग, अदम्य साहस और देशप्रेम की भावना आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की लौ जलाए रखती है।"

राम प्रसाद बिस्मिल: एक परिचय

गौरतलब है कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ने 9 अगस्त 1925 को काकोरी (अब उत्तर प्रदेश) के निकट ब्रिटिश सरकार की ट्रेन से हथियार खरीदने के लिए धन लूटने की ऐतिहासिक घटना — जिसे काकोरी ट्रेन एक्शन कहा जाता है — का नेतृत्व किया था। इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला दिया था। 19 दिसंबर 1927 को मात्र 30 वर्ष की आयु में उन्हें फाँसी दी गई। वे कवि, लेखक और क्रांतिकारी — तीनों रूपों में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की अमर विरासत बने।

यह जयंती ऐसे समय में मनाई गई जब देशभर में स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को पुनर्जीवित करने की राजनीतिक चेतना तेज़ हो रही है, और सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इस अवसर का व्यापक उपयोग किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की विरासत पर दावेदारी का राजनीतिक संकेत भी है। गौरतलब है कि बिस्मिल एक समाजवादी झुकाव वाले क्रांतिकारी थे, जिनकी विचारधारा आज उन्हें श्रद्धांजलि देने वाले दलों से हमेशा मेल नहीं खाती। स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति का यह राजनीतिक उपयोग बढ़ता जा रहा है, लेकिन उनके मूल संदेश — सामाजिक न्याय और ब्रिटिश साम्राज्यवाद-विरोध — की गहराई पर चर्चा प्रायः अनुपस्थित रहती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंडित राम प्रसाद बिस्मिल कौन थे?
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी थे, जिन्होंने 9 अगस्त 1925 को काकोरी ट्रेन एक्शन का नेतृत्व किया। वे कवि और लेखक भी थे; 19 दिसंबर 1927 को मात्र 30 वर्ष की आयु में उन्हें फाँसी दी गई।
काकोरी ट्रेन एक्शन क्या था?
काकोरी ट्रेन एक्शन 9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश के काकोरी के निकट हुई वह ऐतिहासिक घटना है जिसमें बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार की ट्रेन से सरकारी खजाना लूटा था। इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला दिया और भारत में क्रांतिकारी आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
11 जून को किन नेताओं ने बिस्मिल को श्रद्धांजलि दी?
11 जून को यूपी CM योगी आदित्यनाथ, राजस्थान CM भजन लाल शर्मा, उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी, दिल्ली CM रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, यूपी डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य, बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल समेत अनेक नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
नेताओं ने बिस्मिल को श्रद्धांजलि कहाँ दी?
अधिकांश नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। इन संदेशों में बिस्मिल के साहस, काकोरी ट्रेन एक्शन में उनकी भूमिका और राष्ट्रभक्ति को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती क्यों महत्वपूर्ण है?
बिस्मिल ने 30 वर्ष की आयु में देश के लिए फाँसी का फंदा चुना और काकोरी ट्रेन एक्शन जैसी साहसिक घटना से ब्रिटिश शासन को चुनौती दी। उनकी कविताएँ और क्रांतिकारी विचार आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं, इसलिए उनकी जयंती राष्ट्रीय स्मृति और देशभक्ति की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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