काकोरी शताब्दी पर CM योगी की चेतावनी: सोशल मीडिया से भारत-विरोधी अफवाहें फैला रही हैं देशद्रोही ताकतें
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 अगस्त 2025 को काकोरी शहीद स्मारक पर आयोजित काकोरी ट्रेन एक्शन के 101वें वर्षगाँठ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि देशविरोधी ताकतें सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर भारत के खिलाफ अफवाहें फैला रही हैं और समाज को गुमराह करने की साजिश रच रही हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र, जाति और भाषा के नाम पर भारत को कमजोर करने की कोशिशें आज भी जारी हैं — ठीक वैसे ही जैसे अतीत में देश को फूट के जरिए गुलाम बनाया गया था।
काकोरी के शहीदों को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने 9 अगस्त 1925 की उस ऐतिहासिक घटना को याद किया जब पं. राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जैसे क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश खजाने पर कब्जा कर आजादी की लड़ाई को नई ऊँचाई दी थी। उन्होंने कहा कि इन वीरों ने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर से लेकर 1942 के 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' आंदोलन तक संघर्ष की एक अटूट श्रृंखला खड़ी की।
योगी ने शचींद्र नाथ बख्शी और मन्मथ नाथ गुप्ता का विशेष उल्लेख किया, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली और जिनकी जागीर अंग्रेजों ने जब्त कर ली। उन्होंने शचींद्र नाथ सान्याल का भी जिक्र किया, जिनका जन्म काशी में हुआ और जिन्होंने अंतिम साँस गोरखपुर में ली।
स्वतंत्रता के बाद क्रांतिकारियों की उपेक्षा पर तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद सत्ता में आए नेताओं ने क्रांतिकारियों को उचित सम्मान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि शचींद्र नाथ बख्शी और मन्मथ नाथ गुप्ता को सजा दिलाने में तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं की भूमिका रही। योगी के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना उदा देवी पासी, अवंती बाई और झलकारी बाई के नाम पर स्मारक न बनाए गए, न ही इन्हें पाठ्यक्रमों में उचित स्थान दिया गया।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 'एक ही परिवार के नाम पर' सभी योजनाओं का नामकरण होता था — जो युवा पीढ़ी को उनके असली नायकों से दूर रखने की सुनियोजित साजिश थी।
PM मोदी के प्रयासों की सराहना
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने इन क्रांतिकारियों को उचित सम्मान दिया। उन्होंने बताया कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर से जुड़े पंच तीर्थ, वीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खाँ के स्मारकों को विस्तार दिया गया। काकोरी की घटना को आधिकारिक रूप से 'काकोरी ट्रेन एक्शन' नाम देकर क्रांतिकारियों के योगदान को पुनर्स्थापित किया गया और उनके नाम पर डाक टिकट जारी हुए तथा संस्थाओं का नामकरण किया गया।
आमजन से अपील
योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने गाँव, क्षेत्र और जनपद में उन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को खोजें जिन्होंने देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों से जुड़ी बिखरी सामग्री को एकत्र किया जाए, उनके स्मारकों की मरम्मत और सौंदर्यीकरण में भागीदारी की जाए। काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े परिवारों की वर्तमान पीढ़ी और देश की रक्षा में बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के परिजनों को भी इस समारोह में सम्मानित किया गया।
यह समारोह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का प्रसार एक राष्ट्रीय चिंता बन चुका है। मुख्यमंत्री की यह चेतावनी आने वाले दिनों में साइबर सतर्कता और डिजिटल जागरूकता अभियानों को नई दिशा दे सकती है।