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रामप्रसाद बिस्मिल जयंती पर ओम बिरला, राजनाथ सिंह, अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि

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रामप्रसाद बिस्मिल जयंती पर ओम बिरला, राजनाथ सिंह, अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर देश के शीर्ष नेताओं ने एक्स पर उन्हें नमन किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक — सभी ने काकोरी कांड के इस महान क्रांतिकारी के साहस और बलिदान को याद किया।

मुख्य बातें

11 जून को अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती देशभर में मनाई गई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला , रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी बिस्मिल को नमन किया।
नेताओं ने काकोरी ट्रेन एक्शन में बिस्मिल की भूमिका और उनकी क्रांतिकारी रचनाओं को याद किया।
बिस्मिल को 19 दिसंबर 1927 को ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दी थी।

11 जून को अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर देशभर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने इस महान क्रांतिकारी को नमन किया। सभी नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी श्रद्धांजलि साझा की।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संदेश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर लिखा, "भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले महान क्रांतिकारी, प्रखर राष्ट्रभक्त और अमर बलिदानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल उन महान विभूतियों में थे जिन्होंने अपने विचारों, लेखनी और साहसिक कार्यों से स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।" बिरला ने आगे जोड़ा कि काकोरी कांड में बिस्मिल की निर्णायक भूमिका ने ब्रिटिश शासन की नींव को चुनौती दी और स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।

रक्षा मंत्री और गृह मंत्री की श्रद्धांजलि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, "भारत की स्वतंत्रता के लिए अदम्य साहस, अटूट राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करने वाले अमर क्रांतिकारी, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और कोटि-कोटि नमन।" उन्होंने कहा कि बिस्मिल का समर्पण और बलिदान आज भी युवाओं को एक सशक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि काकोरी ट्रेन एक्शन के माध्यम से ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला देने वाले बिस्मिल का स्वाधीनता-संकल्प अंग्रेजों की यातनाओं से भी नहीं डिगा। शाह ने कहा, "युवाओं को संगठित कर मां भारती की आजादी के लिए प्रेरित करने वाले बिस्मिल की रचनाओं को पढ़कर आज भी रोम-रोम राष्ट्रप्रेम से भर उठता है।"

शिक्षा मंत्री और भाजपा अध्यक्ष का नमन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि बिस्मिल ने क्रांतिकारी चेतना को जन-जन तक पहुँचाया और युवाओं के मन में स्वाधीनता का संकल्प जगाया। उन्होंने बिस्मिल के जीवन को "राष्ट्र के प्रति समर्पण, आत्मोत्सर्ग और अटूट साहस का अनुपम उदाहरण" बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बिस्मिल का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रेरणादायक अध्याय है, "जिसने असंख्य देशवासियों के भीतर राष्ट्रप्रेम की अलख प्रज्वलित की।"

रामप्रसाद बिस्मिल: एक संक्षिप्त परिचय

गौरतलब है कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रणी क्रांतिकारियों में से थे जिन्होंने अपनी लेखनी और कर्म दोनों से ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी। 9 अगस्त 1925 को हुए काकोरी ट्रेन एक्शन में उनकी केंद्रीय भूमिका रही, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर 19 दिसंबर 1927 को फाँसी दी। बिस्मिल एक कवि भी थे और उनकी रचनाएँ आज भी देशप्रेम की भावना जगाती हैं। यह ऐसे समय में है जब देश अपने स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के प्रयास तेज कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन काकोरी जैसे ऐतिहासिक प्रसंगों को पाठ्यक्रम में कितनी गहराई से शामिल किया गया, इस पर चर्चा कम होती है। बिस्मिल केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक विचारक और कवि भी थे — उनकी साहित्यिक विरासत को महज़ 'बलिदान' तक सीमित करना उनके योगदान को अधूरा प्रस्तुत करता है। असली सवाल यह है कि क्या ये श्रद्धांजलियाँ युवाओं को बिस्मिल की रचनाएँ पढ़ने और स्वतंत्रता संग्राम की जटिलताओं को समझने के लिए प्रेरित करती हैं, या केवल सोशल मीडिया तक सिमट जाती हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंडित रामप्रसाद बिस्मिल कौन थे?
पंडित रामप्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी थे, जिन्होंने 9 अगस्त 1925 को काकोरी ट्रेन एक्शन का नेतृत्व किया। वे एक कवि भी थे और उनकी रचनाएँ आज भी देशप्रेम की प्रेरणा देती हैं। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 19 दिसंबर 1927 को फाँसी दी।
काकोरी कांड क्या था?
काकोरी कांड 9 अगस्त 1925 को हुई वह ऐतिहासिक घटना है जिसमें रामप्रसाद बिस्मिल और उनके साथियों ने ब्रिटिश सरकार की ट्रेन को रोककर सरकारी खजाना लूटा था। इस घटना ने ब्रिटिश साम्राज्य को सीधी चुनौती दी और स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
रामप्रसाद बिस्मिल जयंती पर किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
11 जून को बिस्मिल जयंती पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
रामप्रसाद बिस्मिल की रचनाएँ क्यों महत्वपूर्ण हैं?
बिस्मिल एक सशक्त कवि और लेखक थे जिनकी रचनाओं ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जन में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई। उनकी कविताएँ और विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
बिस्मिल को फाँसी कब और क्यों दी गई?
काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश सरकार ने रामप्रसाद बिस्मिल को गिरफ्तार किया और 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में फाँसी दी। उनकी आयु उस समय केवल 30 वर्ष थी।
राष्ट्र प्रेस
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