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पुणे में अवैध हाथभट्टी शराब विक्रेता पर MPDA कार्रवाई, अजित मासाळ एक वर्ष के लिए नजरबंद

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पुणे में अवैध हाथभट्टी शराब विक्रेता पर MPDA कार्रवाई, अजित मासाळ एक वर्ष के लिए नजरबंद

सारांश

पुणे के लिंगमाळ क्षेत्र में छह आपराधिक मामलों के बावजूद शराब बेचता रहा अजित मासाळ अब एक साल के लिए अमरावती जेल में है — MPDA की धारा 3(1) के तहत। यह कार्रवाई अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन के बढ़ते सख्त रुख की बानगी है।

मुख्य बातें

अजित महादेव मासाळ (37) , निवासी दापोडी, लिंगमाळ, दौंड, पुणे को MPDA की धारा 3(1) के तहत एक वर्ष के लिए नजरबंद किया गया।
आरोपी के खिलाफ यवत पुलिस थाने में पहले से 6 आपराधिक मामले दर्ज थे।
आरोपी को अमरावती स्थित केंद्रीय कारागार भेजा गया है।
कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल्ल के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी, पुणे के आदेश पर हुई।
दिल्ली के करावल नगर में भी समानांतर कार्रवाई में 3 आरोपी गिरफ्तार , 22 किलो गांजा और ₹2.51 लाख नकद बरामद।

पुणे जिले के दौंड तहसील अंतर्गत दापोडी गांव के लिंगमाळ क्षेत्र में अवैध देसी हाथभट्टी शराब बेचने के आरोपी अजित महादेव मासाळ (37 वर्ष) को प्रशासन ने 20 जून को महाराष्ट्र प्रतिबंधक कानून (MPDA) के तहत एक वर्ष के लिए नजरबंद कर दिया है। जिलाधिकारी, पुणे के आदेश पर की गई इस कार्रवाई के बाद आरोपी को अमरावती केंद्रीय कारागार भेज दिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

यवत पुलिस थाने में आरोपी अजित मासाळ के खिलाफ पहले से कुल छह आपराधिक मामले दर्ज थे। बार-बार मामले दर्ज होने के बावजूद वह लिंगमाळ क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री जारी रखे हुए था। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से अधिकारियों ने इस कड़ी कार्रवाई को आवश्यक माना।

कानूनी आधार

आरोपी को महाराष्ट्र झोपड़पट्टी गुंड, हाथभट्टीवाले, औषधीय अपराधी व अन्य खतरनाक व्यक्तियों पर नियंत्रण हेतु अधिनियम 1981 (संशोधन 2025) की धारा 3(1) के अंतर्गत 'हाथभट्टी शराब विक्रेता' श्रेणी में रखते हुए नजरबंद किया गया है। यह प्रावधान उन व्यक्तियों पर लागू होता है जो बार-बार अपराध के बावजूद समाज के लिए खतरा बने रहते हैं।

कार्रवाई में शामिल अधिकारी

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल्ल, अपर पुलिस अधीक्षक गणेश बिरादार तथा उपविभागीय पुलिस अधिकारी बापुराव दडस के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। पुलिस निरीक्षक संतोष तासगावकर, उपनिरीक्षक किशोर वागज, सागर माने तथा यवत पुलिस स्टेशन के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आम जनता पर असर

अवैध हाथभट्टी शराब न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ती है। गौरतलब है कि हाथभट्टी शराब में मिलावट की आशंका अधिक होती है, जिससे जहरीली शराब से मौतें होने की घटनाएँ महाराष्ट्र सहित देशभर में सामने आती रही हैं।

व्यापक अभियान का हिस्सा

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अवैध शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ पुलिस अभियान तेज हुए हैं। नई दिल्ली के करावल नगर थाना पुलिस ने भी एक संगठित तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनके पास से 22 किलो से अधिक गांजा, भारी मात्रा में अवैध शराब और ₹2.51 लाख नकद बरामद हुए। इन दोनों कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि प्रशासन अवैध शराब कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि निवारक नजरबंदी न्यायिक समीक्षा को कमज़ोर करती है और इसका दुरुपयोग हो सकता है। असली सवाल यह है कि छह मामलों के बाद भी नियमित अभियोजन क्यों प्रभावी नहीं हुआ — यह पुलिस-प्रशासन समन्वय और अभियोजन तंत्र की कमज़ोरी को उजागर करता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MPDA के तहत अजित मासाळ को क्यों नजरबंद किया गया?
अजित मासाळ पर यवत पुलिस थाने में पहले से 6 आपराधिक मामले दर्ज थे, फिर भी वह दापोडी के लिंगमाळ क्षेत्र में अवैध हाथभट्टी शराब बेचना जारी रखे हुए था। बार-बार अपराध और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी के आदेश पर MPDA की धारा 3(1) के तहत उन्हें एक वर्ष के लिए नजरबंद किया गया।
MPDA (महाराष्ट्र प्रतिबंधक कानून) क्या है?
MPDA यानी महाराष्ट्र झोपड़पट्टी गुंड, हाथभट्टीवाले, औषधीय अपराधी व अन्य खतरनाक व्यक्तियों पर नियंत्रण हेतु अधिनियम 1981 (संशोधन 2025) एक निवारक नजरबंदी कानून है। इसकी धारा 3(1) के तहत जिलाधिकारी उन व्यक्तियों को नजरबंद कर सकते हैं जो बार-बार अपराध कर समाज के लिए खतरा बने रहते हैं।
आरोपी को कहाँ भेजा गया है?
अजित मासाळ को अमरावती स्थित केंद्रीय कारागार में भेजा गया है, जहाँ वह एक वर्ष की नजरबंदी की अवधि पूरी करेगा।
इस कार्रवाई में कौन-से अधिकारी शामिल थे?
कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल्ल, अपर पुलिस अधीक्षक गणेश बिरादार और उपविभागीय पुलिस अधिकारी बापुराव दडस के मार्गदर्शन में हुई। पुलिस निरीक्षक संतोष तासगावकर, उपनिरीक्षक किशोर वागज, सागर माने और यवत पुलिस स्टेशन के अन्य कर्मियों ने भी अहम भूमिका निभाई।
क्या देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी कार्रवाई हुई है?
हाँ, दिल्ली के करावल नगर थाना पुलिस ने भी एक संगठित तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनके पास से 22 किलो से अधिक गांजा, भारी मात्रा में अवैध शराब और ₹2.51 लाख नकद बरामद हुए।
राष्ट्र प्रेस
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