पुणे जहरीली शराब कांड: मास्टरमाइंड दत्ता लोंढे समेत पूरे गिरोह पर मकोका लागू, 21 मौतों के बाद CID की बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने पुणे जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी दत्ता उर्फ भाऊ भिवराव लोंढे और उसके पूरे संगठित गिरोह के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 (मकोका) लागू कर दिया है। 27 से 30 मई 2026 के बीच मिथेनॉल मिश्रित देसी हाथभट्टी शराब पीने से पुणे के हडपसर और दापोडी-फुगेवाड़ी इलाकों में कुल 21 लोगों की मौत हो गई थी, जिसने कई परिवारों को तबाह कर दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच में सामने आया कि उरुली कांचन (तालुका हवेली, जिला पुणे) निवासी दत्ता लोंढे ने अपने नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया था। इस गिरोह में आकाश दीपक जाधव, योगेश राजेंद्र व्हनकड़े, राधेश्याम हरिराम प्रजापति, कल्पेश अशोक अग्रवाल, आर्यन संजीव धोत्रे, अभिषेक अरुण चौबे, अरुण जगदंबा चौबे और अंकित अरुण चौबे शामिल थे। इस गिरोह ने अवैध रूप से देसी हाथभट्टी शराब का निर्माण, परिवहन और बिक्री कर आर्थिक लाभ कमाया।
मकोका क्यों लगाया गया
CID के अनुसार, इस गिरोह की आपराधिक गतिविधियों के कारण पुणे जिले में आम नागरिकों के बीच भय, असुरक्षा और दहशत का माहौल बन गया था। गौरतलब है कि गिरोह के सरगना और उसके सदस्यों के खिलाफ पहले भी कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे, और प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के बावजूद उनकी आपराधिक गतिविधियाँ जारी रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज़ किए जाने की माँग उठ रही थी।
जाँच की प्रक्रिया
पुलिस उपाधीक्षक शामराव काले ने सभी साक्ष्यों और अपराध रिकॉर्ड की समीक्षा कर पुलिस अधीक्षक शफकत आमना के माध्यम से विशेष पुलिस महानिरीक्षक (अपराध पश्चिम) सुधीर हिरेमठ को रिपोर्ट सौंपी। मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद हिरेमठ ने आरोपियों के खिलाफ मकोका लागू करने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की।
आम जनता और पीड़ित परिवारों पर असर
यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (CID) सुनील रामानंद, विशेष पुलिस महानिरीक्षक सुधीर हिरेमठ और पुलिस अधीक्षक शफकत आमना के मार्गदर्शन में पूरी की गई। 21 लोगों की असमय मौत से टूटे परिवारों के लिए मकोका के तहत यह कार्रवाई न्याय की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मकोका के प्रावधानों के तहत ज़मानत मिलना अत्यंत कठिन होता है, जिससे आरोपियों के लंबे समय तक जेल में रहने की संभावना है।
क्या होगा आगे
मकोका लागू होने के बाद अब इस मामले की सुनवाई एक विशेष न्यायालय में होगी। CID की जाँच जारी है और अन्वेषण अधिकारियों के अनुसार गिरोह की आपूर्ति श्रृंखला और वित्तीय लेन-देन की भी जाँच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।