6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पुणे जहरीली शराब कांड: मास्टरमाइंड दत्ता लोंढे समेत पूरे गिरोह पर मकोका लागू, 21 मौतों के बाद CID की बड़ी कार्रवाई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पुणे जहरीली शराब कांड: मास्टरमाइंड दत्ता लोंढे समेत पूरे गिरोह पर मकोका लागू, 21 मौतों के बाद CID की बड़ी कार्रवाई

सारांश

पुणे में 21 जानें लेने वाले जहरीली शराब कांड में CID ने मास्टरमाइंड दत्ता लोंढे और उसके 8 साथियों पर मकोका लगा दिया है। यह कार्रवाई उस संगठित गिरोह के खिलाफ है जो अवैध हाथभट्टी शराब बनाकर, परिवहन कर और बेचकर मुनाफा कमा रहा था — और जिसकी वजह से पुणे में दहशत का माहौल था।

मुख्य बातें

27 से 30 मई 2026 के बीच पुणे के हडपसर और दापोडी-फुगेवाड़ी में मिथेनॉल मिश्रित जहरीली शराब पीने से 21 लोगों की मौत हुई थी।
CID ने मुख्य आरोपी दत्ता उर्फ भाऊ भिवराव लोंढे समेत 9 सदस्यीय गिरोह पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लागू किया।
गिरोह पर अवैध देसी हाथभट्टी शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री का आरोप है।
मकोका लागू करने की मंजूरी विशेष पुलिस महानिरीक्षक सुधीर हिरेमठ ने दी।
मकोका के तहत ज़मानत मिलना कठिन होगा; मामले की सुनवाई अब विशेष न्यायालय में होगी।

महाराष्ट्र राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने पुणे जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी दत्ता उर्फ भाऊ भिवराव लोंढे और उसके पूरे संगठित गिरोह के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 (मकोका) लागू कर दिया है। 27 से 30 मई 2026 के बीच मिथेनॉल मिश्रित देसी हाथभट्टी शराब पीने से पुणे के हडपसर और दापोडी-फुगेवाड़ी इलाकों में कुल 21 लोगों की मौत हो गई थी, जिसने कई परिवारों को तबाह कर दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच में सामने आया कि उरुली कांचन (तालुका हवेली, जिला पुणे) निवासी दत्ता लोंढे ने अपने नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया था। इस गिरोह में आकाश दीपक जाधव, योगेश राजेंद्र व्हनकड़े, राधेश्याम हरिराम प्रजापति, कल्पेश अशोक अग्रवाल, आर्यन संजीव धोत्रे, अभिषेक अरुण चौबे, अरुण जगदंबा चौबे और अंकित अरुण चौबे शामिल थे। इस गिरोह ने अवैध रूप से देसी हाथभट्टी शराब का निर्माण, परिवहन और बिक्री कर आर्थिक लाभ कमाया।

मकोका क्यों लगाया गया

CID के अनुसार, इस गिरोह की आपराधिक गतिविधियों के कारण पुणे जिले में आम नागरिकों के बीच भय, असुरक्षा और दहशत का माहौल बन गया था। गौरतलब है कि गिरोह के सरगना और उसके सदस्यों के खिलाफ पहले भी कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे, और प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के बावजूद उनकी आपराधिक गतिविधियाँ जारी रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज़ किए जाने की माँग उठ रही थी।

जाँच की प्रक्रिया

पुलिस उपाधीक्षक शामराव काले ने सभी साक्ष्यों और अपराध रिकॉर्ड की समीक्षा कर पुलिस अधीक्षक शफकत आमना के माध्यम से विशेष पुलिस महानिरीक्षक (अपराध पश्चिम) सुधीर हिरेमठ को रिपोर्ट सौंपी। मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद हिरेमठ ने आरोपियों के खिलाफ मकोका लागू करने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की।

आम जनता और पीड़ित परिवारों पर असर

यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (CID) सुनील रामानंद, विशेष पुलिस महानिरीक्षक सुधीर हिरेमठ और पुलिस अधीक्षक शफकत आमना के मार्गदर्शन में पूरी की गई। 21 लोगों की असमय मौत से टूटे परिवारों के लिए मकोका के तहत यह कार्रवाई न्याय की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मकोका के प्रावधानों के तहत ज़मानत मिलना अत्यंत कठिन होता है, जिससे आरोपियों के लंबे समय तक जेल में रहने की संभावना है।

क्या होगा आगे

मकोका लागू होने के बाद अब इस मामले की सुनवाई एक विशेष न्यायालय में होगी। CID की जाँच जारी है और अन्वेषण अधिकारियों के अनुसार गिरोह की आपूर्ति श्रृंखला और वित्तीय लेन-देन की भी जाँच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को भी उजागर करता है — आखिर 21 मौतों तक यह गिरोह बेरोकटोक कैसे चलता रहा, जबकि सदस्यों के खिलाफ पहले से आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज थे। अवैध शराब के नेटवर्क अक्सर स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस तंत्र की मिलीभगत के बिना इतने लंबे समय तक नहीं चलते — इस पहलू की जाँच उतनी ही ज़रूरी है जितनी गिरोह पर मकोका। मकोका एक कड़ा कानूनी हथियार है, पर न्याय की असली कसौटी यह होगी कि पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा मिले और आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ा जाए।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे जहरीली शराब कांड में मकोका क्या है और यह क्यों लगाया गया?
मकोका यानी महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 एक कड़ा कानून है जो संगठित आपराधिक गिरोहों पर लागू होता है। CID ने यह कानून इसलिए लगाया क्योंकि दत्ता लोंढे के नेतृत्व वाला गिरोह पहले से आपराधिक रिकॉर्ड होने के बावजूद अवैध शराब का कारोबार जारी रखे हुए था और पुणे में दहशत का माहौल बना रहा था।
पुणे जहरीली शराब कांड में कितने लोगों की मौत हुई और कब?
27 से 30 मई 2026 के बीच पुणे के हडपसर इलाके में 4 और दापोडी-फुगेवाड़ी में 17 लोगों सहित कुल 21 लोगों की मौत हुई। मौत का कारण मिथेनॉल मिश्रित देसी हाथभट्टी शराब का सेवन था।
मकोका में कौन-कौन से आरोपी शामिल हैं?
मुख्य आरोपी दत्ता उर्फ भाऊ भिवराव लोंढे के साथ आकाश दीपक जाधव, योगेश राजेंद्र व्हनकड़े, राधेश्याम हरिराम प्रजापति, कल्पेश अशोक अग्रवाल, आर्यन संजीव धोत्रे, अभिषेक अरुण चौबे, अरुण जगदंबा चौबे और अंकित अरुण चौबे — कुल 9 लोगों पर मकोका लागू किया गया है।
मकोका लगने के बाद आरोपियों के लिए क्या बदलेगा?
मकोका के प्रावधानों के तहत ज़मानत मिलना बेहद कठिन हो जाता है और मामले की सुनवाई एक विशेष न्यायालय में होती है। इससे आरोपियों के लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहने की संभावना बढ़ जाती है।
इस कार्रवाई की मंजूरी किसने दी?
पुलिस उपाधीक्षक शामराव काले की रिपोर्ट के आधार पर विशेष पुलिस महानिरीक्षक (अपराध पश्चिम) सुधीर हिरेमठ ने मकोका लागू करने की मंजूरी दी। पूरी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (CID) सुनील रामानंद के मार्गदर्शन में की गई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले