16 जुलाई 2026
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पुणे जहरीली शराब कांड: एफडीए ने मेथनॉल मिलावट को 18 मौतों का कारण बताया, 5,929 किलो जब्त

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पुणे जहरीली शराब कांड: एफडीए ने मेथनॉल मिलावट को 18 मौतों का कारण बताया, 5,929 किलो जब्त

सारांश

पुणे में ₹30 की एक बोतल जहरीली शराब ने 18 जिंदगियाँ लील लीं। एफडीए की जांच ने उस आपूर्ति श्रृंखला का पर्दाफाश किया जो भिवंडी के एक गोदाम से शुरू होकर पुणे की गलियों तक पहुँची — और 5,929 किलो मेथनॉल जब्त कर एक और त्रासदी रोकी।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र एफडीए ने पुष्टि की कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में 18 मौतों का कारण शराब में मेथनॉल की मिलावट थी।
जहरीली शराब मात्र ₹30 प्रति बोतल की दर से बेची जा रही थी।
श्री रेक्स इंटरनेशनल के भिवंडी स्थित गोदाम से 5,929 किलोग्राम मेथनॉल जब्त किया गया।
मालिक अरुण कुमार चौबे और अभिषेक अरुण कुमार चौबे को राज्य आबकारी विभाग ने हिरासत में लिया; नारपोली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज।
गोदाम में ज़हर अधिनियम के तहत अनिवार्य कोई रिकॉर्ड या स्टॉक रजिस्टर नहीं मिला।
एफडीए ने कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की; जांच अभी जारी है।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में हुई जहरीली शराब त्रासदी की जांच में पुष्टि की है कि 18 लोगों की मौत का मुख्य कारण शराब में मिलाया गया औद्योगिक रसायन मेथनॉल था। जांच में यह भी सामने आया कि यह जानलेवा शराब मात्र ₹30 प्रति बोतल की दर से बेची जा रही थी।

मुख्य घटनाक्रम

त्रासदी तब सामने आई जब पुणे के फुगेवाड़ी, दापोड़ी और हडपसर इलाकों में एक के बाद एक कई लोगों की मौत की खबरें आने लगीं। जांच में पता चला कि पीड़ितों ने कथित तौर पर फुगेवाड़ी स्थित करनल सिंह विरका के घर पर यह अवैध शराब पी थी। आपूर्ति श्रृंखला की पड़ताल में सामने आया कि योगेश वानखेड़े ने कथित तौर पर उराली कांचन के राजू प्रजापति से यह शराब खरीदकर आगे वितरित की थी।

छापेमारी और जब्ती

पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस से मिली सूचना के आधार पर, एफडीए ने श्री रेक्स इंटरनेशनल नामक कंपनी के ठिकानों पर कार्रवाई की। कंपनी का कार्यालय वाशी, नवी मुंबई में और गोदाम भिवंडी के म्हात्रे कंपाउंड, अंजुर रोड, वालगांव में स्थित है। एफडीए के ठाणे डिवीजन के अधिकारियों ने ड्रग इंस्पेक्टर योगेंद्र के नेतृत्व में और स्थानीय पुलिस की सहायता से गोदाम पर छापा मारा, जहाँ 5,929 किलोग्राम मेथनॉल जब्त किया गया। गौरतलब है कि तलाशी के दौरान इस रसायन की खरीद, बिक्री या भंडारण से संबंधित कोई भी अनिवार्य रिकॉर्ड या स्टॉक रजिस्टर मौजूद नहीं था, जो ज़हर अधिनियम के तहत गंभीर उल्लंघन है।

आरोपी और कानूनी कार्रवाई

कंपनी के मालिक अरुण कुमार चौबे और अधिकृत प्रतिनिधि अभिषेक अरुण कुमार चौबे छापेमारी के समय मौके पर नहीं थे। बाद में पता चला कि दोनों को राज्य आबकारी विभाग पहले ही हिरासत में ले चुका था। भिवंडी के नारपोली पुलिस स्टेशन में दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एफडीए ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कंपनी का ऑपरेटिंग लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

एफडीए कमिश्नर की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने मेथनॉल के अवैध भंडारण और वितरण में संलिप्त लोगों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के प्रति कोई नरमी नहीं बरतेगा। मुंडे ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 सहित सभी संबंधित कानूनों को सख्ती से लागू करने का आश्वासन दिया और कहा कि सुरक्षित भोजन और दवाइयाँ पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।

आगे की जांच

अधिकारियों का मानना है कि इस त्वरित कार्रवाई से एक और बड़े पैमाने की त्रासदी टलने की संभावना है। जांचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि महाराष्ट्र में अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के अवैध शराब निर्माण और वितरण नेटवर्क सक्रिय हैं या नहीं। इस प्रकरण ने अवैध शराब आपूर्तिकर्ताओं और मेथनॉल के भंडारण-वितरण में लिप्त संस्थाओं के बीच कथित सांठगांठ को भी उजागर किया है। जांच जारी है और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े सभी संदिग्धों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार जांच के बाद वही ढाँचा सामने आता है: सस्ती अवैध शराब, मिलावटी रसायन, और आपूर्ति श्रृंखला में कई बिचौलिए। असली सवाल यह है कि 5,929 किलो मेथनॉल एक गोदाम में बिना किसी रिकॉर्ड के कैसे जमा होता रहा — और नियामक तंत्र तब तक क्यों नहीं जागा जब तक 18 जानें नहीं गईं। एफडीए की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह प्रतिक्रियात्मक है, निवारक नहीं। जब तक मेथनॉल की आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक निगरानी नहीं होती, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे जहरीली शराब कांड में 18 लोगों की मौत कैसे हुई?
जांच के अनुसार, पीड़ितों ने मेथनॉल मिली अवैध शराब पी थी जो मात्र ₹30 प्रति बोतल की दर से बेची जा रही थी। मेथनॉल एक अत्यंत विषाक्त औद्योगिक रसायन है जिसे पीने पर अंगों को गंभीर क्षति होती है और मृत्यु हो सकती है।
एफडीए ने मेथनॉल कहाँ से जब्त किया और कितना?
एफडीए ने भिवंडी के म्हात्रे कंपाउंड स्थित श्री रेक्स इंटरनेशनल के गोदाम पर छापा मारकर 5,929 किलोग्राम मेथनॉल जब्त किया। कंपनी का कार्यालय वाशी, नवी मुंबई में है।
इस कांड में किन लोगों पर मामला दर्ज हुआ है?
श्री रेक्स इंटरनेशनल के मालिक अरुण कुमार चौबे और अधिकृत प्रतिनिधि अभिषेक अरुण कुमार चौबे के खिलाफ भिवंडी के नारपोली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज है। दोनों को राज्य आबकारी विभाग पहले ही हिरासत में ले चुका था। आपूर्ति श्रृंखला में योगेश वानखेड़े और राजू प्रजापति का नाम भी जांच में सामने आया है।
महाराष्ट्र एफडीए ने कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
एफडीए ने कंपनी के कार्यालय और गोदाम को सील कर मेथनॉल का पूरा स्टॉक जब्त कर लिया है। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और ज़हर अधिनियम के प्रावधानों के तहत कंपनी का ऑपरेटिंग लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
क्या महाराष्ट्र में अन्य स्थानों पर भी ऐसे नेटवर्क की जांच हो रही है?
हाँ, जांचकर्ता अब यह पता लगा रहे हैं कि महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के अवैध शराब निर्माण और वितरण नेटवर्क सक्रिय हैं या नहीं। एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली किसी भी संस्था के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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