पुणे जहरीली शराब कांड: वारिस पठान का सवाल — ₹30 में बिकती मेथेनॉल मिली शराब पर प्रशासन कहाँ था?
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने पुणे में मिलावटी शराब से हुई मौतों को लेकर महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब ₹30 में बिकने वाली सस्ती शराब में खुलेआम मेथेनॉल मिलाया जा रहा था, तब प्रशासन की निगाह कहाँ थी — यही सबसे बड़ा सवाल है।
मौतों का आँकड़ा और प्रशासनिक विफलता
पठान ने कहा कि सरकारी आँकड़ों में 14 लोगों की मौत बताई जा रही है, लेकिन ज़मीनी रिपोर्टों के अनुसार वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। उन्होंने इस पूरे मामले को प्रशासनिक विफलता करार दिया और जिम्मेदार अधिकारियों तथा शराब माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने भी खुलासा किया है कि सस्ती मिलावटी शराब में मेथेनॉल मिलाए जाने के कारण ये मौतें हुईं। पठान ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि कुछ रुपए बचाने के लिए लोग ऐसी जहरीली शराब पीने को मजबूर होते हैं और अपनी जान गँवा बैठते हैं।
जब्ती और कार्रवाई का ब्यौरा
इस मामले में अब तक 6,000 किलोग्राम मेथेनॉल जब्त किया गया है। संबंधित कंपनी को सील कर दिया गया है, उसके मालिक को नोटिस जारी किया गया है और उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है। हालाँकि पठान ने सवाल उठाया कि ऐसी और कितनी कंपनियाँ हैं जो इसी तरह का काम कर रही हैं और अभी तक जाँच के दायरे से बाहर हैं।
भ्रष्ट तंत्र पर सीधा आरोप
पठान ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर शराब माफिया, कुछ प्रभावशाली लोग और भ्रष्ट अधिकारी मिलकर इस अवैध कारोबार को संरक्षण देते हैं। उनके अनुसार, कुछ अधिकारी अवैध कारोबारियों से वसूली करते हैं, जिसके चलते जहरीले उत्पाद खुलेआम बाज़ार तक पहुँच जाते हैं। उन्होंने माँग की कि ऐसी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाए।
यह पहली घटना नहीं
पठान ने रेखांकित किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर जहरीली शराब से मौतों की खबरें आती रहती हैं, लेकिन सरकारें केवल घटना के बाद दुख जताती हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के कई इलाकों में इस तरह की अवैध शराब बिक रही है और सरकार को पहले से निगरानी बढ़ाकर कार्रवाई करनी चाहिए — हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए।
वंदे मातरम और संवैधानिक अधिकार पर टिप्पणी
इसी दौरान पठान ने केरल में 'वंदे मातरम' को लेकर उठे विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन किसी को इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के बिजॉय इमैन्युअल बनाम केरल राज्य मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी को 'वंदे मातरम' गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान 'जन गण मन' को मुसलमान पूरे सम्मान और गर्व के साथ गाते हैं।
पठान ने हलाल सर्टिफिकेशन और बहिष्कार की मांगों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि हर मुद्दे पर बहिष्कार की राजनीति उचित नहीं है और यदि किसी उत्पाद को हलाल प्रमाणन मिला है तो उससे किसी को नुकसान नहीं होता। पुणे कांड की जाँच और उसके दीर्घकालिक परिणाम अब महाराष्ट्र सरकार की जवाबदेही की असली कसौटी बनेंगे।