पुणे जहरीली शराब कांड: वारिस पठान की माँग — दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने पुणे में जहरीली शराब से 13 लोगों की मौत पर सरकार और प्रशासन को सीधे कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने स्थानीय नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों और शराब माफिया के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की माँग की, यह कहते हुए कि लापरवाही और मिलीभगत से हुई मौतें सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी का मामला है।
मुख्य घटनाक्रम
पुणे में कथित तौर पर अवैध रूप से बेची जा रही जहरीली शराब के सेवन से 13 लोगों की मौत हो गई। पठान ने सवाल उठाया कि यदि लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा था, तो प्रशासन ने उसे रोका क्यों नहीं। उनका आरोप है कि 'पैसा ऊपर तक पहुँचता है' — इसीलिए बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार पर आरोप
पठान ने कहा कि सरकार केवल शोक-संवेदना के बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। उन्होंने माँग की कि बुलडोजर गरीबों के घरों पर नहीं, बल्कि उन अवैध शराब प्रतिष्ठानों पर चलाया जाए जो लोगों की जानें ले रहे हैं। उनका कहना है कि महाराष्ट्र ही नहीं, देशभर में जहाँ-जहाँ अवैध शराब का धंधा चल रहा है, वहाँ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।
व्यापक राजनीतिक मुद्दे
पठान ने आरोप लगाया कि सरकार जनता का ध्यान असली मुद्दों — नीट पेपर लीक, बेरोज़गारी, महँगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों — से हटाने के लिए धार्मिक विवादों को हवा दे रही है। उन्होंने कहा कि एक महीने में कई बार ईंधन की कीमतें बढ़ीं, लेकिन उस पर कोई चर्चा नहीं हो रही।
बकरीद पर उन्होंने कहा कि देशभर में करोड़ों मुसलमानों ने त्योहार शांतिपूर्वक मनाया — नमाज़, कुर्बानी और भाईचारे का संदेश दिया — फिर भी कुछ तत्व समाज में तनाव पैदा करने के लिए नए विवाद खड़े करते रहते हैं।
घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर निशाना
सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर पठान ने गृह मंत्री अमित शाह को घेरते हुए कहा कि यदि सीमा पर घुसपैठ हो रही है तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्होंने कहा कि सरकार घुसपैठ का मुद्दा उठाती रहती है, लेकिन ठोस कार्रवाई नज़र नहीं आती और इस मुद्दे का इस्तेमाल मुसलमानों को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।
नीट पेपर लीक और छात्रों की माँग
नीट पेपर लीक पर पठान ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग की। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही से लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर लग गया है और कई छात्र मानसिक तनाव में आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। पठान ने इसे महज़ प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि 'कोल्ड ब्लडेड मर्डर' जैसा करार दिया। उनकी माँग है कि दोबारा परीक्षा देने के लिए यात्रा करने वाले छात्रों के आने-जाने, रहने और खाने का पूरा खर्च सरकार वहन करे।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊँचे स्तर पर है और जहरीली शराब की यह घटना राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर रही है।