रोहित पवार ने पुणे में अवैध शराब की दुकान तोड़ी, पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने 29 मई को अपने समर्थकों के साथ पुणे में एक अवैध शराब की दुकान पर तोड़फोड़ की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो-तीन दिनों में खराब गुणवत्ता वाली अवैध शराब पीने से कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है और पुलिस इस अवैध कारोबार में शामिल है।
मुख्य घटनाक्रम
विधायक रोहित पवार ने दुकान पर पहुँचकर तोड़फोड़ की और स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा, "पिछले दो-तीन दिनों में खराब क्वालिटी वाली अवैध शराब पीने से लगभग आठ लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस का दावा है कि ये मौतें हार्ट अटैक या अन्य कारणों से हुई हैं, जो सच छिपाने की कोशिश लगती है।" उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट हुई मौतों से परे और भी मामले हो सकते हैं।
पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
रोहित पवार ने सवाल उठाया कि दुकान मालिक को अवैध शराब बेचने की अनुमति किसने दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि राज्य सरकार और पुणे पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती, तो इसका अर्थ यही है कि पुलिस विभाग स्वयं इस अवैध धंधे में शामिल है। उन्होंने आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की।
कोयता गैंग और बढ़ती आपराधिक गतिविधियाँ
विधायक ने बताया कि पुणे में 'कोयता गैंग' की गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ी हैं। उनके अनुसार, जो लोग पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं, गैंग के सदस्य उनके घर पहुँचकर तोड़फोड़ और हमले करते हैं। एक मामले में एक बच्चे का हाथ तक तोड़ दिया गया। दिन-दहाड़े हत्याएँ और महिलाओं के विरुद्ध अपराध भी बढ़ रहे हैं।
सीआईडी पर सवाल और अजित पवार विमान दुर्घटना मामला
रोहित पवार ने सीआईडी मुख्यालय का दौरा कर विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "सीआईडी कभी अत्यंत सम्मानित विभाग हुआ करता था, जिसकी तुलना अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से की जाती थी। अब पिछले छह महीनों में हमारे प्रयासों के बावजूद अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। सीआईडी अब अपनी विश्वसनीयता खो चुका है।" इसके अतिरिक्त, उन्होंने अजित पवार विमान दुर्घटना मामले को सीबीआई को सौंपने की माँग की और कहा कि आरटीआई के माध्यम से माँगी गई जानकारी को दबाया जा रहा है तथा डीजीसीए ने भी अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
आगे क्या होगा
रोहित पवार की इस कार्रवाई के बाद पुणे में अवैध शराब के कारोबार और पुलिस की भूमिका पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है, जो आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगी।