पुणे जहरीली शराब कांड: रोहित पवार ने अवैध दुकान में की तोड़फोड़, 12 से अधिक मौतें
सारांश
मुख्य बातें
पुणे और पिंपरी चिंचवड में जहरीली शराब पीने से 12 से अधिक लोगों की मौत के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार और उनके कार्यकर्ताओं ने उस अवैध शराब दुकान में तोड़फोड़ की, जहाँ से यह जानलेवा शराब बेची जा रही थी। 29 मई को हुई इस कार्रवाई में रोहित पवार स्वयं मौके पर पहुँचे और दुकान का काउंटर तोड़ दिया।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, शराब में मेथनॉल मिलाए जाने के कारण यह त्रासदी हुई। मामले में मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े को गिरफ्तार कर लिया गया है। शराब दुकान के मालिक कर्नल सिंह विरखा समेत कुल 8 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इससे पहले रोहित पवार ससून अस्पताल गए और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।
रोहित पवार की प्रतिक्रिया
तोड़फोड़ को उचित ठहराते हुए रोहित पवार ने कहा, "जब व्यवस्था काम नहीं करती, जब पुलिस प्रशासन कमजोर होता है, तब हमें जनता को संदेश देना पड़ता है। हमें कुछ चीजें अपने हाथ में लेनी पड़ती हैं।" उन्होंने आगे कहा, "गरीब लोग शराब पीने से मर जाते हैं, व्यवस्था कुछ नहीं करती। ऐसे में लोगों को कानून अपने हाथ में लेना पड़ता है।"
पुलिस पर आरोप
रोहित पवार ने जाँच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि "पुलिस किसी को बचाने की कोशिश कर रही है।" उन्होंने कहा कि एक आरोपी का स्वयं हिरासत में चले जाना संदिग्ध है और इसका मतलब है कि "बड़े अपराधी बच निकलेंगे।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने खुद एक व्यक्ति को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, जिससे आगे की जाँच प्रभावित हो सकती है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में अवैध और मिलावटी शराब से होने वाली मौतों की घटनाएँ बार-बार सामने आती रही हैं। गौरतलब है कि मेथनॉल-मिश्रित शराब से होने वाली मौतें देश के कई राज्यों में पहले भी हो चुकी हैं और हर बार प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठते हैं। पीड़ितों में अधिकांश निम्न-आय वर्ग के लोग बताए जा रहे हैं।
क्या होगा आगे
पुलिस मामले की जाँच जारी रखे हुए है और गिरफ्तार 8 आरोपियों से पूछताछ हो रही है। रोहित पवार की तोड़फोड़ की कार्रवाई पर भी कानूनी सवाल उठ सकते हैं। विपक्षी दलों ने सरकार से जवाबदेही और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की माँग की है।