पुणे जहरीली शराब कांड: मृतक संख्या 20 हुई, मेथेनॉल नेटवर्क की जड़ों तक पहुंची सीआईडी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के पुणे में जहरीली हाथभट्टी शराब से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) ने 6 जून 2026 तक 20 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है, जबकि 8 अन्य पीड़ित विभिन्न अस्पतालों में जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे हैं। जांच एजेंसियां अब अवैध शराब निर्माण, मेथेनॉल की आपूर्ति और उसके वितरण से जुड़े पूरे गिरोह को उखाड़ने के लिए बहुस्तरीय कार्रवाई में जुटी हैं।
घटनाक्रम: कब और कहाँ हुई मौतें
26 से 28 मई 2026 के बीच पुणे के दापोडी और हडपसर थाना क्षेत्रों में जहरीली हाथभट्टी शराब के सेवन के बाद दर्जनों लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ी। सीआईडी के अनुसार, दापोडी क्षेत्र में 16 और हडपसर क्षेत्र में 4 लोगों की मौत हुई। 29 मई 2026 को दोनों थाना क्षेत्रों में मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के साथ महाराष्ट्र और मुंबई दारूबंदी कानून की धाराएं भी शामिल की गई हैं।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि हाथभट्टी शराब में जहरीले रासायनिक पदार्थ मिलाए गए थे, जो मानव शरीर के लिए घातक सिद्ध हुए।
मेथेनॉल सप्लाई नेटवर्क की परतें
जांच में सामने आया है कि आरईएक्स इंटरनेशनल कंपनी ने अविनाश कार्गो प्राइवेट लिमिटेड के जरिए मुख्य आरोपी योगेश व्हानखडे को 215 लीटर मेथेनॉल भेजा था। इस कड़ी को खंगालने के लिए भोसरी स्थित कंपनी कार्यालय की तलाशी ली गई और कर्मचारियों के बयान दर्ज कर आवश्यक दस्तावेज जब्त किए गए।
भिवंडी के वलगांव स्थित आरईएक्स इंटरनेशनल के गोदाम की भी जांच की गई, जिसे पहले खाद्य एवं प्रशासन विभाग द्वारा सील किया गया था। अधिकारियों ने पंचनामा कर गोदाम खोला और वहां मौजूद 39 ड्रमों से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से नमूने एकत्र कर रासायनिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे।
गिरफ्तारियां और पूछताछ
इस मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अरुण जगदंब चौबे (59) और अभिषेक अरुण चौबे (34), दोनों निवासी वाशीगांव, नवी मुंबई, से गहन पूछताछ की गई। उनके बयानों के आधार पर ही आरईएक्स इंटरनेशनल के गोदाम तक जांच पहुंची।
आरोपी इरफान निसार कुरैशी (50), निवासी दापोडी रेलवे स्टेशन के समीप, को अदालत ने 8 जून 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। वहीं, आर्यन संजीव धोत्रे (22) को भी गिरफ्तार किया गया — जांच के अनुसार वह वडारवाडी क्षेत्र में अवैध हाथभट्टी शराब बेचने का काम करता था और इस नेटवर्क में उसकी अहम भूमिका थी।
फर्जी आधार कार्ड तैयार करने के संदेह में सोमनाथ तात्याबा गावडे से भी पूछताछ की गई है। अधिकारियों को आशंका है कि अवैध कारोबार में पहचान छिपाने के लिए नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
डिजिटल और वित्तीय सुराग
सीआईडी ने आरोपियों के वाशी स्थित कार्यालय से एक लैपटॉप और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके साथ ही आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक में मौजूद बैंक खातों का विवरण हासिल कर वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की गई है।
मुख्य आरोपी योगेश व्हानखडे द्वारा शराब की ढुलाई में इस्तेमाल की जाने वाली एक्टिवा मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। फुगेवाडी क्षेत्र से एक डीवीआर बरामद हुआ है और अब तक पुलिस कुल 5 सीसीटीवी डीवीआर और हार्ड डिस्क अपने कब्जे में ले चुकी है, जिनसे आरोपियों की गतिविधियों और नेटवर्क की पूरी तस्वीर उभारने की कोशिश जारी है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में जहरीली शराब से मौतों की यह कोई पहली घटना नहीं है — राज्य में पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के कई कांड सामने आ चुके हैं, जो अवैध शराब माफिया की गहरी जड़ों की ओर इशारा करते हैं। फॉरेंसिक नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होगी। सीआईडी का ध्यान अब मेथेनॉल की आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हर कड़ी को तोड़ने और इस नेटवर्क के पीछे के मास्टरमाइंड तक पहुंचने पर केंद्रित है।