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तापी में लकड़ी तस्करों का पीछा करते RFO विकास देसाई की मौत, गुजरात सरकार ने जाँच के आदेश दिए

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तापी में लकड़ी तस्करों का पीछा करते RFO विकास देसाई की मौत, गुजरात सरकार ने जाँच के आदेश दिए

सारांश

ड्यूटी पर तैनात RFO विकास देसाई खैर की लकड़ी के तस्करों का पीछा करते हुए सड़क दुर्घटना में शहीद हो गए। तीन साल की सेवा, पाँच साल का बेटा और एक अधूरा परिवार — यह सिर्फ एक अधिकारी की मौत नहीं, वन संरक्षण की कीमत का सबसे मार्मिक बयान है।

मुख्य बातें

RFO विकास देसाई की 20 जुलाई को तापी जिले में लकड़ी तस्करों का पीछा करते समय सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।
तस्कर खैर की लकड़ी अवैध रूप से ले जा रहे थे; देसाई ने सूचना मिलते ही पीछा शुरू किया था।
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने घटना की विस्तृत जाँच के आदेश दिए और जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई।
देसाई पाटन जिले के भाटसर गाँव के निवासी थे; परिवार में पत्नी और पाँच वर्षीय पुत्र हैं।
वन विभाग में आने से पहले वह सचिवालय में डिप्टी सेक्शन ऑफिसर थे; तीन वर्ष पहले वन सेवा में आए थे।
जयपाल सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी शोक व्यक्त करने परिवार से मिलने पहुँचे।

गुजरात के तापी जिले में 20 जुलाई को अवैध लकड़ी तस्करों का पीछा करने के दौरान रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) विकास देसाई की एक घातक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। देसाई तापी रेंज में तैनात थे और उन्हें सूचना मिली थी कि तस्कर कीमती खैर की लकड़ी लेकर फरार हो रहे हैं। इस दुखद घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं और वन संपदा के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति जारी रखने की घोषणा की है।

घटनाक्रम: कैसे हुई दुर्घटना

अधिकारियों के अनुसार, RFO विकास देसाई को सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध तस्कर अवैध रूप से कटी खैर की लकड़ी लेकर भाग रहे हैं। कर्तव्य के प्रति समर्पण दिखाते हुए उन्होंने तुरंत कार्रवाई शुरू की और तस्करों का पीछा किया। इसी पीछा के दौरान वह एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए और उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब गुजरात में वन क्षेत्रों में अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं। गौरतलब है कि खैर एक कीमती प्रजाति की लकड़ी है, जिसकी तस्करी पर वन विभाग की पैनी नज़र रहती है।

सरकार की प्रतिक्रिया और श्रद्धांजलि

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने विकास देसाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका निधन वन विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

मोढवाडिया ने कहा, 'जब तक वन संस्कृति जीवित रहेगी, तब तक मानव सभ्यता भी सुरक्षित रहेगी। इस महान उद्देश्य के लिए RFO विकास देसाई का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।' उन्होंने आगे कहा कि देसाई का जीवन पूरे वन समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

मंत्री ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य सरकार और वन विभाग की ओर से भी देसाई को श्रद्धांजलि दी तथा परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की। वन राज्य मंत्री प्रवीण माली ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

विकास देसाई: एक परिचय

विकास देसाई पाटन जिले के चाणसमा तालुका के भाटसर गाँव के रहने वाले थे। चार भाई-बहनों में वह तीसरे नंबर पर थे। वन विभाग में आने से पहले वह सचिवालय में डिप्टी सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। करीब तीन वर्ष पहले उन्होंने वन विभाग में सेवा आरंभ की थी।

उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और पाँच वर्षीय पुत्र हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) डॉ. जयपाल सिंह सहित वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शोक व्यक्त करने परिवार से मिलने पहुँचे।

आगे क्या: जाँच और सख्त कार्रवाई

मंत्री मोढवाडिया ने घटना की विस्तृत जाँच की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि वन संपदा को नुकसान पहुँचाने वाली अवैध गतिविधियों के विरुद्ध राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति अटल रहेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग का कार्य केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का एक पवित्र दायित्व है। विकास देसाई का बलिदान इस दायित्व की सबसे बड़ी मिसाल बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वाहन सुरक्षा या त्वरित प्रतिक्रिया दल के तस्करों का पीछा करने को मजबूर होते हैं। 'जीरो टॉलरेंस' की घोषणाएँ तब तक खोखली हैं जब तक फील्ड स्तर पर तैनात अधिकारियों को उचित संसाधन, प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण नहीं मिलते। असली सवाल यह है कि क्या जाँच केवल तस्करों तक सीमित रहेगी, या यह भी देखा जाएगा कि अकेले अधिकारी को खतरनाक पीछे का सामना क्यों करना पड़ा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RFO विकास देसाई की मौत कैसे हुई?
विकास देसाई तापी जिले में अवैध खैर की लकड़ी ले जा रहे तस्करों का पीछा कर रहे थे, जब वह एक घातक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए और उनकी मौत हो गई। यह घटना 20 जुलाई को तापी रेंज में ड्यूटी के दौरान हुई।
गुजरात सरकार ने इस घटना पर क्या कार्रवाई की?
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने घटना की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं। सरकार ने वन अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति जारी रखने और दोषी तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
विकास देसाई कौन थे और उनका परिवार कहाँ है?
विकास देसाई पाटन जिले के चाणसमा तालुका के भाटसर गाँव के निवासी थे। वन विभाग में आने से पहले वह सचिवालय में डिप्टी सेक्शन ऑफिसर थे और करीब तीन वर्ष पहले वन सेवा में आए थे। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और पाँच वर्षीय पुत्र हैं।
खैर की लकड़ी की तस्करी इतनी गंभीर समस्या क्यों है?
खैर एक कीमती वन प्रजाति है जिसकी लकड़ी बाज़ार में ऊँचे दामों पर बिकती है, जिससे यह तस्करों के लिए आकर्षक लक्ष्य बनती है। इसकी अवैध कटाई से वन संपदा और जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुँचता है, इसीलिए वन विभाग इसे रोकने के लिए सख्त निगरानी रखता है।
इस घटना की जाँच कौन करेगा और आगे क्या होगा?
राज्य सरकार ने विस्तृत जाँच की घोषणा की है। PCCF डॉ. जयपाल सिंह सहित वरिष्ठ वन अधिकारी पहले ही परिवार से मिल चुके हैं। जाँच में दुर्घटना की परिस्थितियों और तस्करों की पहचान दोनों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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