तापी में लकड़ी तस्करों का पीछा करते RFO विकास देसाई की मौत, गुजरात सरकार ने जाँच के आदेश दिए
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के तापी जिले में 20 जुलाई को अवैध लकड़ी तस्करों का पीछा करने के दौरान रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) विकास देसाई की एक घातक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। देसाई तापी रेंज में तैनात थे और उन्हें सूचना मिली थी कि तस्कर कीमती खैर की लकड़ी लेकर फरार हो रहे हैं। इस दुखद घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं और वन संपदा के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति जारी रखने की घोषणा की है।
घटनाक्रम: कैसे हुई दुर्घटना
अधिकारियों के अनुसार, RFO विकास देसाई को सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध तस्कर अवैध रूप से कटी खैर की लकड़ी लेकर भाग रहे हैं। कर्तव्य के प्रति समर्पण दिखाते हुए उन्होंने तुरंत कार्रवाई शुरू की और तस्करों का पीछा किया। इसी पीछा के दौरान वह एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए और उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब गुजरात में वन क्षेत्रों में अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं। गौरतलब है कि खैर एक कीमती प्रजाति की लकड़ी है, जिसकी तस्करी पर वन विभाग की पैनी नज़र रहती है।
सरकार की प्रतिक्रिया और श्रद्धांजलि
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने विकास देसाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका निधन वन विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
मोढवाडिया ने कहा, 'जब तक वन संस्कृति जीवित रहेगी, तब तक मानव सभ्यता भी सुरक्षित रहेगी। इस महान उद्देश्य के लिए RFO विकास देसाई का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।' उन्होंने आगे कहा कि देसाई का जीवन पूरे वन समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
मंत्री ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य सरकार और वन विभाग की ओर से भी देसाई को श्रद्धांजलि दी तथा परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की। वन राज्य मंत्री प्रवीण माली ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
विकास देसाई: एक परिचय
विकास देसाई पाटन जिले के चाणसमा तालुका के भाटसर गाँव के रहने वाले थे। चार भाई-बहनों में वह तीसरे नंबर पर थे। वन विभाग में आने से पहले वह सचिवालय में डिप्टी सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। करीब तीन वर्ष पहले उन्होंने वन विभाग में सेवा आरंभ की थी।
उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और पाँच वर्षीय पुत्र हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) डॉ. जयपाल सिंह सहित वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शोक व्यक्त करने परिवार से मिलने पहुँचे।
आगे क्या: जाँच और सख्त कार्रवाई
मंत्री मोढवाडिया ने घटना की विस्तृत जाँच की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि वन संपदा को नुकसान पहुँचाने वाली अवैध गतिविधियों के विरुद्ध राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति अटल रहेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग का कार्य केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का एक पवित्र दायित्व है। विकास देसाई का बलिदान इस दायित्व की सबसे बड़ी मिसाल बन गया है।