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त्रिपुरा में जंगली हाथी का कहर: बुजुर्ग महिला की जान जाने के बाद भड़के ग्रामीण

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त्रिपुरा में जंगली हाथी का कहर: बुजुर्ग महिला की जान जाने के बाद भड़के ग्रामीण

सारांश

त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक जंगली हाथी के हमले में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। जानिए इस घटना का पूरा मंजर।

मुख्य बातें

70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की जंगली हाथी के हमले में मौत।
ग्रामीणों का गुस्सा और वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन।
प्रशासन ने मुआवजा और सुरक्षा उपायों का आश्वासन दिया।
जंगलों में भोजन और पानी की कमी से मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है।
खोवाई जिले में पहले भी हाथियों के हमले में मौतें हुई हैं।

अगरतला, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के खोवाई जिले के जुम्बारी गांव में शनिवार सुबह एक जंगली हाथी के हमले में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया और नाराज़ ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।

घटना उस समय हुई जब मनिमाला देबबर्मा अपने घर के आंगन में थीं। अचानक एक जंगली हाथी ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतका के बेटे अजीत देबबर्मा के अनुसार, यह हमला सुबह तड़के हुआ और उनकी माँ को बचाने का कोई मौका नहीं मिला।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। हालात इतनी बिगड़ गए कि सूचना जुटाने पहुंचे एक पत्रकार और सब-डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (एसडीएफओ) पर भी भीड़ ने हमला कर दिया। गुस्साए लोगों ने स्थानीय वन कार्यालय में भी तोड़फोड़ की।

हिंसा में एसडीएफओ घायल हो गए, जबकि सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को स्थिति बिगड़ने पर वहां से निकलना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी निष्क्रिय बने रहे और हालात को काबू में करने में नाकाम रहे।

घटना के बाद प्रशासन ने मुआवजे का ऐलान किया है। वन विभाग की ओर से 1 लाख रुपये और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से 4 लाख रुपये देने का वादा किया गया है।

प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जुम्बारी क्षेत्र में सोलर इलेक्ट्रिक फेंसिंग और हाथी-रोधी खाइयां (ट्रेंच) बनाने का आश्वासन दिया है। साथ ही, समस्या पैदा कर रहे हाथी को नियमानुसार स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, यह इलाका पहले भी मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित रहा है। पिछले कुछ वर्षों में खोवाई जिले में कम से कम पांच लोगों की मौत हाथियों के हमलों में हो चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में भोजन और पानी की कमी तथा मानव अतिक्रमण के कारण हाथी अक्सर आबादी वाले इलाकों की ओर आ जाते हैं, जिससे इस तरह की दुखद घटनाएं होती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे स्थानीय समुदायों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक उपायों की आवश्यकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस घटना में मृतक की पहचान क्या है?
मृतक का नाम मनिमाला देबबर्मा है, जो 70 वर्ष की थीं।
घटना के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
प्रशासन ने मुआवजे की घोषणा की और क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को लागू करने का आश्वासन दिया।
क्या इस तरह की घटनाएं आम हैं?
हां, त्रिपुरा में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं अक्सर होती रही हैं।
ग्रामीणों ने किस प्रकार का प्रदर्शन किया?
गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के कार्यालय में तोड़फोड़ की और अधिकारियों पर हमला किया।
इस घटना का मुख्य कारण क्या था?
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन और पानी की कमी और मानव अतिक्रमण के कारण हाथी आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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