क्या अहमदाबाद में खैर लकड़ी तस्करी पर ईडी का शिकंजा कस गया?

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क्या अहमदाबाद में खैर लकड़ी तस्करी पर ईडी का शिकंजा कस गया?

सारांश

अहमदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय ने खैर लकड़ी की तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 11.3 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन के खिलाफ उठाए गए कदम का हिस्सा है। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • ईडी ने 11.3 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया।
  • यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई।
  • खैर लकड़ी की अवैध तस्करी से वन्यजीवों के आवास को खतरा है।
  • जांच जारी है और आरोपियों की पहचान कर ली गई है।
  • इससे पहले भी कई संपत्तियों को अटैच किया गया था।

अहमदाबाद, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने खैर लकड़ी की अवैध तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी ने लगभग 11.3 करोड़ रुपए मूल्य की 14 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।

ईडी ने यह जांच सूरत वन मंडल के अंतर्गत मंडवी साउथ रेंज के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर द्वारा दर्ज की गई प्रथम अपराध रिपोर्ट (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। यह मामला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उल्लंघन से संबंधित है, जिसमें खैर लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी का संज्ञान लिया गया था।

जांच में यह पाया गया है कि मुस्ताक आदम तसिया, मोहम्मद ताहिर अहमद हुसैन और उनके सहयोगी गुजरात के विभिन्न जिलों जैसे व्यास, तापी, सूरत, वलसाड, नवसारी और नर्मदा में स्थित वन्यजीव अभयारण्यों से बिना अनुमति खैर के पेड़ों की कटाई कर रहे थे। इसके पश्चात, इस लकड़ी को अवैध रूप से अन्य राज्यों में भेजकर बेचा जाता था।

ईडी के अनुसार, इस अवैध गतिविधि से न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी गंभीर क्षति पहुंची। जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने खैर लकड़ी को ग्रे मार्केट में बेचकर करोड़ों रुपए की अवैध कमाई की।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान, ईडी ने आरोपियों की पहचान की और गोधरा जिले में स्थित लगभग 11.3 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

इससे पहले, ईडी ने 12 जनवरी को दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन संपत्तियों की कीमत 53.50 लाख रुपए बताई गई है, जबकि उनकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 4.65 करोड़ रुपए है। ये प्रॉपर्टी आरोपी प्रेम देवी लूनिया और पायल चोकसी के नाम पर हैं।

ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शिकायत के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 24 मई 2018 को मेसर्स श्री ओम फैब और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद 16 दिसंबर 2019 को चार्जशीट दायर की गई, जिसमें पाया गया कि रंजीत लूनिया की सभी प्रोप्राइटरशिप कंपनियों को बैंक की ओर से 1.50 लाख रुपए की क्रेडिट लिमिट दी गई थी। इस लोन पर ब्याज समेत कुल 9.95 करोड़ रुपए बकाया थे, जो एनपीए की तारीख तक बढ़कर लगभग 10.932 करोड़ रुपए हो गए थे।

जांच में यह सामने आया कि रंजीत लूनिया ने पैनल वैल्यूअर मयूर शाह और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर क्रिमिनल साजिश की। उन्होंने नकली और गलत बिजनेस रिकॉर्ड तैयार किए और लोन लेने के लिए गिरवी रखी गई संपत्तियों की झूठी वैल्यूएशन रिपोर्ट बैंक में जमा करवाई। इसके अलावा, लोन के पैसे का उपयोग वास्तविक बिजनेस के बजाय विभिन्न बैंक खातों में डायवर्ट किया गया। बाद में यह राशि कैश में निकाली गई और बुलियन खरीदने तथा हाउस लोन चुकाने जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल की गई।

Point of View

बल्कि यह भी दिखाता है कि देश में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कानूनों का पालन कितना आवश्यक है। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करें।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

खैर लकड़ी की अवैध तस्करी से सरकार को क्या नुकसान हुआ?
इस अवैध गतिविधि से सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को गंभीर क्षति पहुंची।
ईडी ने कितनी संपत्तियों को कुर्क किया है?
ईडी ने लगभग 11.3 करोड़ रुपए मूल्य की 14 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है।
यह कार्रवाई किन कानूनों के तहत की गई है?
यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।
जांच का आधार क्या था?
यह जांच सूरत वन मंडल के अंतर्गत रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
क्या आगे की जांच जारी है?
हाँ, मामले में आगे की जांच जारी है।
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