सीधी में अतिक्रमण विवाद हिंसक: एसएचओ इंद्रज सिंह पर कुल्हाड़ी से हमला, 5 आरोपी नामजद
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सोमवार, 15 जून को सरकारी रास्ते पर कथित अवैध कब्जे को लेकर चल रहा विवाद उस समय हिंसक हो गया जब पटपारा गाँव में प्रदर्शनकारियों ने कर्तव्य पर तैनात कमरजी थाने के एसएचओ इंद्रज सिंह पर कुल्हाड़ी और दरांती से हमला कर दिया। हमले में अधिकारी के सिर में गंभीर चोटें आईं और उन्हें तत्काल डायल-112 इमरजेंसी सेवा के ज़रिए सीधी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मुख्य घटनाक्रम
घटना कमरजी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले पटपारा गाँव में उस समय शुरू हुई जब ग्रामीणों ने एक सरकारी रास्ते पर कथित अवैध कब्जे के विरोध में सार्वजनिक सड़क जाम कर दी। पुलिस के अनुसार यह विवाद कुछ समय से राजस्व विभाग के पास लंबित था और बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला था, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता रहा।
तनाव की सूचना मिलते ही एसएचओ इंद्रज सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे और प्रदर्शनकारियों को जाम हटाकर आवाजाही बहाल करने के लिए समझाने की कोशिश की। इसी दौरान कुछ लोगों ने अधिकारी पर कुल्हाड़ी और दरांती से हमला कर दिया, जिससे वे मौके पर ही गिर पड़े।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) विकास कुमार आनंद पाँच पुलिस स्टेशनों के अधिकारियों और कर्मियों के साथ पटपारा पहुँचे। भीड़ को हटाया गया, जाम खुलवाया गया और स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। गाँव में किसी भी अतिरिक्त तनाव को रोकने के लिए फिलहाल अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
पाँच आरोपी नामजद, जाँच जारी
पुलिस ने दर्ज एफआईआर में पाँच आरोपियों के नाम दर्ज किए हैं — दिनेश पटेल उर्फ गुंथी, सुनील पटेल, विनय पटेल, प्रीतम पटेल और रितेश उर्फ सिंटू पटेल। इन पर सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस दल पर हमला करने के आरोप लगाए गए हैं। कार्रवाई के दौरान कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।
पुलिस अधीक्षक का बयान
पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी ने इस हमले को कर्तव्यरत कानून प्रवर्तन कर्मी पर किया गया गंभीर अपराध बताया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही कई थानों से बल एकत्र कर मौके पर भेजा गया और मामले की गहन जाँच की जा रही है। कोरी ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
आगे क्या
यह घटना इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि राजस्व विवादों का समय पर निपटारा न होने पर स्थानीय तनाव किस तरह हिंसा का रूप ले सकता है। अब जाँच एजेंसियों के सामने यह भी सवाल है कि सरकारी रास्ते पर कब्जे की शिकायत इतने लंबे समय तक लंबित क्यों रही। फिलहाल पुलिस सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई में जुटी है।