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पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना का एक माह पूरा, 50 हजार से अधिक मरीजों का इलाज: सुवेंदु अधिकारी

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पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना का एक माह पूरा, 50 हजार से अधिक मरीजों का इलाज: सुवेंदु अधिकारी

सारांश

पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना के पहले महीने में 50 हजार से अधिक मरीजों का इलाज और ₹28 करोड़ से अधिक खर्च — मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। 1,849 बाहरी राज्यों के मरीजों का भी इलाज हुआ, जो 'एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य कार्ड' की अवधारणा को साकार करता है।

मुख्य बातें

16 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) लागू होने के बाद पहले महीने में 50 हजार से अधिक मरीजों को कैशलेस इलाज मिला।
लाभार्थियों के उपचार पर ₹28 करोड़ से अधिक की लागत वहन की गई।
1,102 से अधिक पश्चिम बंगाल के मरीजों ने राज्य के बाहर अस्पतालों में इलाज कराया।
पश्चिम बंगाल के अस्पतालों ने अन्य राज्यों से आए 1,849 मरीजों का उपचार किया।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक्स पर इसे स्वास्थ्य सेवाओं में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के लागू होने के एक माह पूरे होने पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसे स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है। 16 अगस्त 2026 को राज्य में योजना की शुरुआत के बाद से पहले महीने में ही 50 हजार से अधिक जरूरतमंद मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिली है और इस पर ₹28 करोड़ से अधिक की लागत वहन की गई है।

मुख्य उपलब्धियाँ: पहले महीने के आँकड़े

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी में बताया कि योजना के अंतर्गत पहले ही माह में 50 हजार से अधिक मरीजों को राज्य के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराया गया। उपचार पर खर्च की गई ₹28 करोड़ से अधिक की राशि सीधे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत साबित हुई है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल उन राज्यों में से एक था जहाँ यह केंद्रीय स्वास्थ्य योजना वर्षों तक लागू नहीं हो पाई थी। ऐसे में यह पहला आधिकारिक मासिक प्रदर्शन-रिपोर्ट राज्य के स्वास्थ्य परिदृश्य के लिए एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

अंतर-राज्यीय स्वास्थ्य सेवा का विस्तार

आँकड़ों के अनुसार, योजना की पहुँच केवल पश्चिम बंगाल की सीमाओं तक सीमित नहीं रही। 1,102 से अधिक पश्चिम बंगाल के मरीजों ने राज्य के बाहर स्थित अस्पतालों में कैशलेस उपचार का लाभ उठाया। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के अस्पतालों ने अन्य राज्यों से आए 1,849 मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया।

यह आँकड़ा AB-PMJAY की 'एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य कार्ड' की अवधारणा को व्यावहारिक धरातल पर साकार होते दिखाता है, जहाँ लाभार्थी किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में देशभर में इलाज करा सकता है।

सरकार की प्रतिबद्धता और स्वास्थ्यकर्मियों का योगदान

मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है और राज्य सरकार सभी नागरिकों तक सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूत बनाने और गरीब व जरूरतमंद परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इस उपलब्धि के लिए उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों का विशेष आभार व्यक्त किया और कहा कि उनकी दिन-रात की मेहनत से बड़ी संख्या में लोगों को समय पर बेहतर उपचार मिल सका।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामर्थ्य लंबे समय से एक राजनीतिक बहस का विषय रही है। योजना के तहत लाभार्थी परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती है, जो कि गंभीर बीमारियों के इलाज में कर्ज या संपत्ति बेचने की मजबूरी से राहत दिलाती है।

अधिकारी ने कहा कि शुरुआती आँकड़े यह दर्शाते हैं कि यह पहल आम लोगों के लिए राहत का प्रभावी माध्यम बन रही है और आने वाले समय में इससे और अधिक परिवार लाभान्वित होंगे।

क्या होगा आगे

राज्य सरकार का लक्ष्य सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या और लाभार्थी नामाँकन को और बढ़ाना है। आँकड़ों के अनुसार, पहले महीने की यह प्रगति अगले महीनों में और तेज होने की संभावना है जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ेगी और अधिक अस्पताल पैनल में शामिल होंगे। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि योजना का लाभ अंतिम छोर के लाभार्थी तक पहुँच सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी अभी बाकी है — क्योंकि शुरुआती महीनों में नामाँकन की गति स्वाभाविक रूप से तेज रहती है और बाद में धीमी पड़ सकती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पश्चिम बंगाल ने इस केंद्रीय योजना को वर्षों की देरी के बाद अपनाया, जिस दौरान लाखों पात्र परिवार इसके लाभ से वंचित रहे। ₹28 करोड़ का खर्च प्रभावशाली है, परंतु यह सुनिश्चित करना होगा कि लाभ वास्तव में सबसे वंचित तबके तक पहुँच रहा है और दावों में कोई अनियमितता न हो — जो राष्ट्रीय स्तर पर AB-PMJAY की एक पुरानी चुनौती रही है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना कब शुरू हुई?
पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) 16 अगस्त 2026 को लागू हुई। इसके एक महीने बाद 14 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पहले माह की उपलब्धियाँ साझा कीं।
पहले महीने में कितने मरीजों को आयुष्मान भारत का लाभ मिला?
पहले महीने में 50 हजार से अधिक मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में कैशलेस इलाज मिला। इन मरीजों के उपचार पर ₹28 करोड़ से अधिक की लागत वहन की गई।
क्या पश्चिम बंगाल के मरीज दूसरे राज्यों में भी आयुष्मान भारत का लाभ उठा सकते हैं?
हाँ, आँकड़ों के अनुसार पहले महीने में 1,102 से अधिक पश्चिम बंगाल के मरीजों ने राज्य के बाहर स्थित अस्पतालों में कैशलेस उपचार लिया। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के अस्पतालों ने दूसरे राज्यों से आए 1,849 मरीजों का भी इलाज किया।
आयुष्मान भारत योजना के तहत कितना लाभ मिलता है?
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़ी राहत है।
पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना को लेकर आगे की क्या योजना है?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार राज्य सरकार सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या और लाभार्थी नामाँकन बढ़ाने पर काम कर रही है। स्वास्थ्य विभाग नियमित समीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगा कि योजना का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचे।
राष्ट्र प्रेस
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