नड्डा–सुवेंदु बैठक: पश्चिम बंगाल को NHM के तहत ₹3,505 करोड़, AB PM-JAY और HPV टीकाकरण पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 23 मई 2026 को नई दिल्ली में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक उच्च-स्तरीय स्वास्थ्य समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने, प्रमुख केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निधियों के समयबद्ध उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई।
वित्तीय आवंटन और निधि जारी
बैठक में यह जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पश्चिम बंगाल को कुल ₹3,505.59 करोड़ का संसाधन आवंटन किया गया है। इसी बैठक के दौरान पहली किस्त के रूप में ₹527.58 करोड़ राज्य को जारी कर दिए गए। राज्य को यह भी निर्देश दिया गया कि प्रधानमंत्री-अभिमान और 15वें वित्त आयोग के स्वास्थ्य अनुदान के तहत पहले से उपलब्ध निधियों का शीघ्र उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
नड्डा ने स्पष्ट किया कि जहाँ प्रभावी कार्यान्वयन और निधियों का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, वहाँ वित्तीय संसाधन कभी बाधा नहीं बनेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के कार्यान्वयन में अपेक्षाकृत पिछड़ा रहा है।
आयुष्मान भारत और HPV टीकाकरण पर ज़ोर
केंद्रीय मंत्री ने AB PM-JAY योजना के कार्यान्वयन हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया जल्द पूरी करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों सहित पश्चिम बंगाल के लगभग 1.45 करोड़ परिवारों को विस्तारित स्वास्थ्य कवरेज मिलने की उम्मीद है। नड्डा ने राज्य में HPV टीकाकरण अभियान शीघ्र शुरू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, यह कहते हुए कि बड़ी संख्या में युवा लड़कियाँ गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर और संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल उन राज्यों में रहा है जिन्होंने अब तक AB PM-JAY को पूरी तरह अपनाया नहीं है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने इस बैठक में योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र से समर्थन और मार्गदर्शन माँगा।
टीबी उन्मूलन, वेक्टर जनित रोग और मातृ-शिशु स्वास्थ्य
बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने पर विशेष बल दिया गया। नड्डा ने सांसदों और विधानसभा सदस्यों के लिए विशेष जागरूकता कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव दिया ताकि जन भागीदारी सुनिश्चित हो सके। खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान के तहत टीकाकरण कवरेज बढ़ाने और काला-अजार तथा लिम्फैटिक फाइलेरियासिस जैसी बीमारियों के खिलाफ निरंतर सतर्कता बनाए रखने पर भी चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री ने मातृ मृत्यु दर (MMR), 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) जैसे प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया — विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों की जन स्वास्थ्य संवेदनशीलता को देखते हुए। मुख्यमंत्री अधिकारी ने मानसून के मद्देनज़र मलेरिया और डेंगू जैसी वेक्टर जनित बीमारियों से निपटने की तैयारियों को प्राथमिकता देने की बात कही।
चिकित्सा शिक्षा और बुनियादी ढाँचे की माँग
मुख्यमंत्री अधिकारी ने बैठक में यह तथ्य उजागर किया कि पश्चिम बंगाल के तीन क्षेत्रों में अभी भी मेडिकल कॉलेज नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण का उल्लेख किया जिसमें प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना है, और कम सुविधाओं वाले जिलों में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से सहयोग माँगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा, जिससे तृतीयक स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान क्षमताओं में वृद्धि होगी।
नड्डा ने आश्वासन दिया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय राज्य के अनुरोध पर तकनीकी सहायता और विशेषज्ञ टीमों को तैनात करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने राज्य को जन औषधि केंद्रों और अमृत फार्मेसियों के विस्तार हेतु विस्तृत प्रस्ताव भेजने की भी सलाह दी।
आगे की राह
दोनों नेताओं ने स्वस्थ भारत और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के तहत स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को सुदृढ़ करने, रोग निगरानी में सुधार और सभी नागरिकों के लिए सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के कार्यान्वयन में तेज़ी और जमीनी स्तर पर स्क्रीनिंग गतिविधियों के विस्तार पर भी सहमति बनी। AB PM-JAY MoU पर हस्ताक्षर और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के प्रस्ताव अब केंद्र-राज्य समन्वय की अगली कड़ी बनेंगे।