केरल मत्स्य क्षेत्र का राजस्व योगदान 1.76% से 5% करने का लक्ष्य: मंत्री वीई अब्दुल गफूर
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मत्स्य, हार्बर इंजीनियरिंग और सामाजिक न्याय मंत्री वीई अब्दुल गफूर ने 14 सितंबर 2026 को कन्नूर जिले में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार मत्स्य विभाग को एक सशक्त राजस्व सृजन केंद्र के रूप में रूपांतरित करने की दिशा में काम कर रही है। फिलहाल राज्य के कुल राजस्व में मत्स्य क्षेत्र की हिस्सेदारी मात्र 1.76 प्रतिशत है, और इसे बढ़ाकर 5 प्रतिशत तक पहुँचाना सरकार का घोषित लक्ष्य है।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ
मंत्री थालास्सेरी सब-कलेक्टर कार्यालय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी सभी एजेंसियों और विभागों को निर्देश दिया कि वे चल रही परियोजनाओं, भूमि संपत्तियों और अधूरी योजनाओं का व्यापक डेटा एकत्र करें। साथ ही नई सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा।
समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मंत्री ने बताया कि सरकार समुद्र में बचाव कार्यों के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार कर रही है। इस एसओपी से मत्स्य विभाग के अधिकारी आपात स्थितियों में अधिक सटीक और तेज़ प्रतिक्रिया दे सकेंगे।
बंदरगाहों और मछुआरों की मांगें
मंत्री ने आश्वस्त किया कि थलाई हार्बर और गोपालपेट्टा फिश लैंडिंग सेंटर की जर्जर स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। उन्होंने कन्नूर जिले में अंतर्देशीय मत्स्य पालन को मजबूत करने पर ज़ोर दिया और निर्देश दिया कि सभी मछली पकड़ने वाली नौकाओं में ट्रांसपोंडर के अनिवार्य उपयोग की निगरानी की जाए।
मत्स्य विभाग की उपनिदेशक आर. जुगनू ने बैठक में जिले की गतिविधियों और आवश्यकताओं पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने प्रमुख मछली बंदरगाहों में ड्रेजिंग कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने की माँग की, ताकि बंदरगाहों की पूरी क्षमता बहाल हो सके।
समुद्री मत्स्य क्षेत्र की प्रमुख माँगों में कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार, रेफ्रिजरेटेड परिवहन वाहन, छोटी नौकाओं के लिए आइस बॉक्स, मछुआरों का बायोमेट्रिक पंजीकरण, डीजल सब्सिडी और लकड़ी की नौकाओं को स्टील या फाइबर नौकाओं से बदलने के लिए वित्तीय सहायता शामिल है।
अंतर्देशीय मत्स्य पालन की चुनौतियाँ
रिपोर्ट में अंतर्देशीय मत्स्य पालन से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया। व्यक्तिगत किसानों को मत्स्य पालन में सहायता, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, मुफ्त बिजली और नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता रेखांकित की गई।
बैठक में केरल स्टेट कोस्टल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, फिशरीज बोर्ड, एडीएके, सहकारी संस्थाओं और मात्स्यफेड के प्रतिनिधियों ने अपनी गतिविधियों और आवश्यकताओं से मंत्री को अवगत कराया। हार्बर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने थलाई, अजिक्कल और मप्पिला बे मछली बंदरगाहों तथा गोपालपेट्टा, चूटाड, धर्मदाम, न्यू माहे, एट्टीकुलम, पुथियांगडी और नीरकडावु फिश लैंडिंग सेंटरों की स्थिति और जरूरतों पर प्रस्तुति दी।
सामाजिक न्याय और बैठक नेतृत्व
जिला सामाजिक न्याय अधिकारी पी. बिजू ने जिले में सामाजिक न्याय विभाग की गतिविधियों की जानकारी दी और विभिन्न अनुदानों की समीक्षा के साथ लंबित बकाया राशि के भुगतान की माँग उठाई। बैठक की अध्यक्षता थालास्सेरी नगर परिषद के अध्यक्ष करायी चंद्रशेखरन ने की। इसमें मत्स्य विभाग के विशेष सचिव अब्दुल नासिर, संयुक्त उपनिदेशक पी. अनीश और मंत्री के निजी सचिव एन. पद्मकुमार भी उपस्थित थे।
क्षेत्र दौरा और आगे की राह
कन्नूर दौरे के दौरान मंत्री गफूर ने थलाई फिशिंग हार्बर का स्थलीय निरीक्षण किया, वहाँ की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और इसके बाद थलाई स्थित फीड मिल तथा थालास्सेरी के मछली बाजार का भी दौरा किया। यह ऐसे समय में आया है जब केरल का तटीय समुदाय बुनियादी ढाँचे की कमी और आजीविका की अनिश्चितता से जूझ रहा है — राज्य की यह पहल मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है।