ट्रंप का दावा: रूस-यूक्रेन ने ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर जताई सहमति, पुष्टि अभी बाकी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 सितंबर 2026 को दावा किया कि रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे के ऊर्जा ढाँचे (एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर हमले न करने पर सहमति जताई है। हालाँकि, न तो रूस और न ही यूक्रेन की सरकार की ओर से इस दावे की तत्काल पुष्टि या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
ट्रंप ने क्या कहा
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'यूक्रेन ने रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करने पर सहमति जताई है और रूस ने भी ऐसा ही करने पर सहमति दी है।' उन्होंने यह नहीं बताया कि इस समझौते में कौन-से ऊर्जा प्रतिष्ठान शामिल हैं, दोनों पक्षों ने कोई शर्त रखी है या नहीं, और यह सहमति कब से प्रभावी होगी। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि इस व्यवस्था के पीछे बातचीत किसने कराई और किस स्तर पर वार्ता हुई।
युद्ध और ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि
फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद से यूक्रेन के बिजली संयंत्र, ट्रांसमिशन नेटवर्क और अन्य ऊर्जा ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन ने पुष्टि की है कि इन हमलों से बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएँ पहले से गहरी हैं।
तेल कीमतों और ईरान पर ट्रंप के अन्य दावे
ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में रूस-यूक्रेन युद्ध को दुनिया में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह बताया और लिखा कि इसके लिए ईरान ज़िम्मेदार नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान से जुड़ा सैन्य संघर्ष खत्म होते ही तेल की कीमतें तेज़ी से गिरेंगी। हालाँकि, ट्रंप ने इन दावों के समर्थन में कोई आँकड़े या समय-सीमा नहीं दी और न ही ईरान से जुड़े संघर्ष पर विस्तृत जानकारी दी।
बाइडेन प्रशासन पर आरोप
ट्रंप ने एक अलग पोस्ट में अमेरिका में महंगाई के लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके प्रशासन को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि बाइडेन के कार्यकाल में तेल की कीमतें मौजूदा समय से अधिक थीं और कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया गया है। इन दावों पर भी स्वतंत्र रूप से सत्यापन की प्रतीक्षा है।
समझौते की सीमाएँ और आगे की स्थिति
ट्रंप की घोषणा में व्यापक युद्धविराम का कोई उल्लेख नहीं है — केवल ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की बात कही गई है, जबकि अन्य सैन्य कार्रवाइयों के रुकने का कोई संकेत नहीं दिया गया। रूस और यूक्रेन दोनों की सरकारों की ओर से इस दावे पर चुप्पी बनी हुई है, जिससे इस कथित सहमति की विश्वसनीयता और व्यावहारिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और ज़मीनी स्थिति ही इस दावे की असली परीक्षा होगी।