केरल वित्त विधेयक 2025: कम अल्कोहल पेयों पर टैक्स कटौती प्रस्ताव कायम, UDF में दरार गहरी
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार ने 27 जून 2025 को कम अल्कोहल वाले मादक पेयों पर कर कटौती के विवादास्पद प्रस्ताव को मसौदा वित्त विधेयक में शामिल करते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह बढ़ते विरोध के बावजूद इस फैसले से पीछे नहीं हटेगी। 1 जुलाई को केरल विधानसभा में पेश होने वाला यह विधेयक अब राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा विवादित मुद्दा बन चुका है।
वित्त विधेयक में क्या है प्रस्ताव
शनिवार को आधिकारिक रूप से प्रकाशित मसौदा वित्त विधेयक में कम अल्कोहल वाले मादक पेयों पर कर की दर घटाने का प्रावधान शामिल किया गया है। सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विधेयक पारित होने मात्र से नए उत्पादों की बिक्री स्वतः आरंभ नहीं होगी — किसी भी नए पेय को बाज़ार में उतारने से पहले आबकारी विभाग की अलग से अनुमति अनिवार्य होगी। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल कर ढाँचे को तर्कसंगत बनाने के लिए है, न कि राज्य की शराब नीति में बदलाव।
UDF गठबंधन में मतभेद
यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने इसका खुलकर विरोध किया है। गठबंधन के भीतर बढ़ती दरार के बीच मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन आने वाले दिनों में सहयोगी दलों के साथ बैठक कर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि इस तरह की आंतरिक असहमति UDF की एकजुटता के लिए असहज संकेत है।
कांग्रेस के भीतर विरोध
आबकारी मंत्री टी. सिद्दीक सहित कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर यह विवाद सुलझ गया है। हालाँकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केपीसीसी अध्यक्ष वी.एम. सुधीरन अब भी इस फैसले के सबसे मुखर विरोधी बने हुए हैं। सुधीरन ने माँग की है कि विधानसभा में विधेयक पेश करने से पहले कर रियायत संबंधी प्रावधान हटाए जाएँ। उनका तर्क है कि यह कदम शराब की उपलब्धता सीमित करने की कांग्रेस की दीर्घकालिक नीति के सीधे विरुद्ध है।
विपक्ष और धार्मिक संगठनों की आपत्ति
विपक्षी दलों, धार्मिक संगठनों और शराबबंदी समर्थक समूहों ने भी इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की है। आलोचकों का कहना है कि कम अल्कोहल वाले पेयों पर टैक्स घटाने से राज्य की शराब सेवन हतोत्साहित करने की घोषित नीति कमज़ोर पड़ेगी और नए उपभोक्ता वर्ग — विशेषकर युवा — तक मादक पेयों की पहुँच आसान हो जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में शराब से जुड़ी सामाजिक समस्याएँ पहले से ही चर्चा में हैं।
आगे क्या होगा
वित्त विधेयक 1 जुलाई को विधानसभा में पेश होगा और इस पर होने वाली बहस UDF की आंतरिक एकता की असली परीक्षा होगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल कर व्यवस्था में किसी अन्य बदलाव की योजना नहीं है। मुख्यमंत्री सतीशन के सहयोगी दलों के साथ बातचीत के नतीजे तय करेंगे कि यह प्रावधान विधेयक में बना रहेगा या वापस लिया जाएगा।