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केरल शराब नीति विवाद: माकपा ने LDF सरकार की नीति का बचाव किया, धार्मिक नेताओं ने सावधानी की अपील की

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केरल शराब नीति विवाद: माकपा ने LDF सरकार की नीति का बचाव किया, धार्मिक नेताओं ने सावधानी की अपील की

सारांश

केरल में लो-अल्कोहल पेयों पर टैक्स घटाने का प्रस्ताव सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया है। माकपा का कहना है कि नीति किसानों के लिए थी, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए नहीं — जबकि विपक्ष उत्पादन और कर नीति को एक ही तराजू पर तौल रहा है। धार्मिक नेताओं ने संयम और संवाद की राह सुझाई है।

मुख्य बातें

माकपा राज्य सचिव एम.वी.
गोविंदन ने 26 जून 2025 को नई दिल्ली में LDF सरकार की लो-अल्कोहल पेय नीति का बचाव किया।
गोविंदन के अनुसार नीति का उद्देश्य काजू, सेब जैसे कृषि उत्पादों से वैल्यू-एडेड पेय बनाकर किसानों की आय बढ़ाना था, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ देना नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नई सरकार बनने के महज तीन दिनों के भीतर यह फाइल मुख्यमंत्री तक पहुँच गई, जो असामान्य है।
समस्ता (ईके गुट) के अध्यक्ष सैयद जिफरी मुत्तुकोया थंगल ने कहा कि इस्लाम में शराब प्रतिबंधित है, लेकिन नीति बनाना सरकार का अधिकार है।
थालास्सेरी के आर्चबिशप मार जोसेफ पाम्पलानी ने मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीशन के व्यापक चर्चा के फैसले का स्वागत किया।

केरल में कम अल्कोहल वाले पेयों (लो-अल्कोहल बेवरेज) पर टैक्स कटौती के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद 26 जून 2025 को और गहरा गया, जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [माकपा] ने पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार की शराब नीति का खुलकर बचाव किया। इसके साथ ही राज्य के प्रमुख धार्मिक नेताओं ने सरकार से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही कोई निर्णय लेने का आग्रह किया।

माकपा का पक्ष: कृषि आधारित नीति थी, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा देना नहीं

माकपा के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि LDF सरकार की नीति का मकसद कभी भी बहुराष्ट्रीय शराब कंपनियों को लाभ पहुँचाना नहीं था। उन्होंने कहा कि नीति का उद्देश्य काजू, सेब और अन्य कृषि उत्पादों से वैल्यू-एडेड, कम अल्कोहल वाले पेय तैयार कर किसानों की आय बढ़ाना था।

गोविंदन ने बताया कि जब वे आबकारी मंत्री थे, तब इस नीति को विस्तृत चर्चा के बाद तैयार किया गया था। उनके अनुसार, नीति बन जाने के बाद ही बैकार्डी जैसी कंपनियाँ वितरण अधिकार लेने के लिए सरकार के पास आई थीं — यानी नीति कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी।

विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप

गोविंदन ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर उत्पादन नीति और कर नीति को आपस में मिलाकर जनता को भ्रमित कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती सरकार की नीति कृषि-आधारित उत्पादन से जुड़ी थी, जबकि मौजूदा विवाद लो-अल्कोहल पेयों पर टैक्स ढाँचे में बदलाव के प्रस्ताव से संबंधित है — ये दोनों अलग-अलग विषय हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनवरी 2022 में जब यह मामला विधानसभा की विषय समिति (सब्जेक्ट कमेटी) के पास भेजा गया, तब वे आबकारी मंत्री के पद पर नहीं थे और उनके कार्यकाल में इस फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नई सरकार पर सवाल: तीन दिन में फाइल CM तक कैसे पहुँची?

गोविंदन ने मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नई सरकार के गठन के महज तीन दिनों के भीतर यह फाइल मुख्यमंत्री के पास पहुँचना असामान्य और संदेहास्पद है। उनका आरोप है कि गठबंधन सहयोगियों और विपक्ष से चर्चा किए बिना इस प्रस्ताव को बजट में शामिल किया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी है।

धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया: सावधानी और संवाद की अपील

समस्ता (ईके गुट) के अध्यक्ष सैयद जिफरी मुत्तुकोया थंगल ने कहा कि इस्लाम में हर प्रकार की शराब प्रतिबंधित है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शराब नीति बनाना निर्वाचित सरकार का अधिकार है और सरकार से धार्मिक सिद्धांतों के आधार पर नीति बनाने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

थालास्सेरी के आर्चबिशप मार जोसेफ पाम्पलानी ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन द्वारा इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा कराने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शराब संबंधी कोई भी नीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे नशे को बढ़ावा मिलने का संदेश जाए। उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी और सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आगे क्या होगा

सरकार द्वारा गठबंधन सहयोगियों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में शराब नीति हमेशा से राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील मुद्दा रही है। आने वाले दिनों में इस बहस के और तीखे होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य में सत्ता-परिवर्तन के बाद की नीतिगत जवाबदेही का सवाल है। माकपा का 'किसान-केंद्रित नीति' वाला तर्क तब तक विश्वसनीय नहीं लगता जब तक यह स्पष्ट नहीं होता कि बैकार्डी जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को वितरण अधिकार देने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी। नई सरकार के गठन के तीन दिनों के भीतर फाइल का मुख्यमंत्री तक पहुँचना यह दर्शाता है कि यह प्रस्ताव पहले से तैयार था — सवाल यह है कि किसके हित में। धार्मिक नेताओं की संयमित प्रतिक्रिया एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अंतिम नीति की परीक्षा इसी बात से होगी कि वह सामाजिक जिम्मेदारी और आर्थिक तर्क में संतुलन कैसे बनाती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में लो-अल्कोहल पेयों पर टैक्स कटौती का प्रस्ताव क्या है?
यह प्रस्ताव केरल सरकार द्वारा कम अल्कोहल वाले पेयों पर लागू कर ढाँचे में बदलाव से संबंधित है। इसे लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तीखी बहस छिड़ी हुई है, और सरकार ने गठबंधन सहयोगियों से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लेने का संकेत दिया है।
माकपा ने LDF सरकार की शराब नीति का बचाव क्यों किया?
माकपा राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने कहा कि LDF सरकार की नीति काजू और सेब जैसे कृषि उत्पादों से वैल्यू-एडेड पेय बनाकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए थी। उनका कहना है कि विपक्ष उत्पादन नीति और कर नीति को गलत तरीके से एक साथ जोड़कर भ्रम पैदा कर रहा है।
धार्मिक नेताओं ने केरल की शराब नीति पर क्या कहा?
समस्ता (ईके गुट) के अध्यक्ष सैयद जिफरी मुत्तुकोया थंगल ने कहा कि इस्लाम में शराब प्रतिबंधित है, लेकिन नीति बनाना सरकार का अधिकार है। थालास्सेरी के आर्चबिशप मार जोसेफ पाम्पलानी ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के व्यापक चर्चा के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि नीति नशे को बढ़ावा देने वाली नहीं होनी चाहिए।
बैकार्डी का इस विवाद से क्या संबंध है?
गोविंदन के अनुसार, LDF सरकार की लो-अल्कोहल पेय नीति बनने के बाद बैकार्डी जैसी बहुराष्ट्रीय शराब कंपनियाँ वितरण अधिकार लेने के लिए सरकार के पास आई थीं। माकपा का कहना है कि नीति का मूल उद्देश्य स्थानीय कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना था, न कि इन कंपनियों के ब्रांडेड उत्पादों की बिक्री।
केरल की नई शराब नीति पर अंतिम फैसला कब तक आएगा?
सरकार ने संकेत दिया है कि गठबंधन सहयोगियों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने व्यापक चर्चा कराने का फैसला किया है, इसलिए निर्णय की कोई निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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