केरल चुनाव के मद्देनजर शराब बिक्री पर प्रतिबंध: जानें पूरी जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- शराब बिक्री पर 48 घंटे का प्रतिबंध
- मतदान प्रक्रिया की सुरक्षा का उद्देश्य
- केरल में शराब का सेवन करने वाले की संख्या
- बेवको का महत्वपूर्ण योगदान
- उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
तिरुवनंतपुरम, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा चुनावों का प्रचार अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। इसी के चलते, मंगलवार शाम 6 बजे से लेकर 9 अप्रैल शाम 6 बजे तक, केरल में शराब की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
गुरुवार को केरल में 140 नए विधायकों के लिए मतदान होना है। इस संदर्भ में, अधिकारियों ने 48 घंटे का सख्त प्रतिबंध लागू किया है, जिससे राज्य में शराब के सेवन की आदतों पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सके।
इस दौरान, सभी पेय पदार्थ की दुकानें, बार, बीयर पार्लर और यहां तक कि बेवको की दुकानें भी बंद रहेंगी।
चुनाव आयोग द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या को रोकना है, ताकि शांतिपूर्ण मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
केरल की कुल 3.34 करोड़ आबादी में से लगभग 32.9 लाख लोग शराब का सेवन करते हैं, जिनमें करीब 29.8 लाख पुरुष और 3.1 लाख महिलाएं शामिल हैं।
हर दिन लगभग पांच लाख लोग शराब का सेवन करते हैं, जिससे अचानक लगी यह रोक और भी अधिक ध्यान आकर्षित करती है।
केरल भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत में शीर्ष राज्यों में से एक है, जहां वार्षिक खपत लगभग 8.3 लीटर है।
यहां रम और ब्रांडी की मांग सबसे अधिक है, जो राज्य द्वारा संचालित नेटवर्क के माध्यम से होने वाली बिक्री का लगभग 94 प्रतिशत है।
इस नेटवर्क की मुख्य धारा केरल स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन (बेवको) है, साथ ही कंज्यूमरफेड द्वारा संचालित 39 आउटलेट भी हैं।
हालांकि, अगले दो दिनों तक इन सभी दुकानों पर शटर पूरी तरह से बंद रहेंगे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि होटलों, दुकानों या सार्वजनिक स्थानों पर शराब की बिक्री की अनुमति नहीं होगी, और यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा।
मतदान क्षेत्रों के आसपास निगरानी भी कड़ी कर दी गई है ताकि नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।