केरल कैबिनेट बैठकें ऐतिहासिक, कोडिकुन्निल सुरेश बोले — चुनावी वादे एक-एक कर हो रहे पूरे
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने केरल की नवगठित यूडीएफ सरकार की पहली और दूसरी कैबिनेट बैठकों को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि सरकार चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को एक-एक कर पूरा कर रही है। 21 मई को तिरुवनंतपुरम में एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि लोगों को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं और सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्य घटनाक्रम
सुरेश ने कहा कि पहली और दूसरी कैबिनेट बैठकों में लिए गए निर्णयों से राज्य की जनता काफी संतुष्ट है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछली एलडीएफ सरकार का पूरा ध्यान के-रेल सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट पर केंद्रित था, जिसे अब रद्द कर दिया गया है। उनके अनुसार, नई सरकार ने कई अहम जन-हितैषी फैसले लिए हैं।
मिल्मा दूध मूल्यवृद्धि पर सरकार की स्थिति
मिल्मा द्वारा दूध की कीमतों में ₹4 प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरेश ने स्पष्ट किया कि मिल्मा एक सहकारी संस्था है और इसके चेयरमैन तथा बोर्ड सदस्यों का चुनाव पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि दूध की कीमत बढ़ाने का निर्णय भी उसी दौर में लिया गया था।
उन्होंने कहा कि नई सरकार को सत्ता में आए अभी केवल दो दिन हुए हैं और इस सरकार ने मूल्यवृद्धि को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। यह निर्णय एलडीएफ-समर्थित बोर्ड और मिल्मा प्रबंधन का है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
सुरेश ने भरोसा दिलाया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री से इस फैसले की समीक्षा कर इसे वापस लेने की माँग की जाएगी, ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब नई सरकार जन-हितैषी छवि बनाने की कोशिश में है।
नई कैबिनेट की संरचना
गौरतलब है कि केरल में नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हुई है। कैबिनेट के 14 सदस्य — जिनमें मुख्यमंत्री सतीशन भी शामिल हैं — पहली बार मंत्री पद पर आसीन हुए हैं। इनमें से छह नेता पहली बार विधायक चुने गए हैं और कैबिनेट में दो महिला मंत्रियों को भी स्थान दिया गया है। इसे यूडीएफ की युवा और नई नेतृत्व छवि पेश करने की कोशिश माना जा रहा है।
आम जनता पर असर
मिल्मा की दूध मूल्यवृद्धि सीधे तौर पर केरल के लाखों उपभोक्ताओं की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है। यदि सरकार इस निर्णय की समीक्षा कराने में सफल होती है, तो यह नई सरकार की जन-संवेदनशीलता का पहला ठोस प्रमाण होगा। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय का इस मसले पर रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है।