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केरल कैबिनेट बैठकें ऐतिहासिक, कोडिकुन्निल सुरेश बोले — चुनावी वादे एक-एक कर हो रहे पूरे

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केरल कैबिनेट बैठकें ऐतिहासिक, कोडिकुन्निल सुरेश बोले — चुनावी वादे एक-एक कर हो रहे पूरे

सारांश

केरल में नई यूडीएफ सरकार के गठन के महज दो दिन बाद कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने पहली-दूसरी कैबिनेट बैठकों को ऐतिहासिक बताया। साथ ही मिल्मा की ₹4/लीटर दूध मूल्यवृद्धि को पिछली एलडीएफ सरकार का निर्णय करार देते हुए इसकी समीक्षा की माँग उठाई।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने केरल की पहली और दूसरी कैबिनेट बैठकों को ऐतिहासिक करार दिया।
सरकार चुनाव के दौरान किए गए वादों को एक-एक कर पूरा कर रही है; नई यूडीएफ सरकार को सत्ता में आए केवल दो दिन हुए हैं।
मिल्मा की ₹4 प्रति लीटर दूध मूल्यवृद्धि को सुरेश ने एलडीएफ-समर्थित बोर्ड का निर्णय बताया; समीक्षा की माँग की।
पिछली एलडीएफ सरकार का प्रमुख प्रोजेक्ट के-रेल सिल्वरलाइन रद्द किया गया।
कैबिनेट के 14 सदस्य पहली बार मंत्री बने; 6 नेता पहली बार विधायक; 2 महिला मंत्री शामिल।

कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने केरल की नवगठित यूडीएफ सरकार की पहली और दूसरी कैबिनेट बैठकों को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि सरकार चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को एक-एक कर पूरा कर रही है। 21 मई को तिरुवनंतपुरम में एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि लोगों को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं और सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

मुख्य घटनाक्रम

सुरेश ने कहा कि पहली और दूसरी कैबिनेट बैठकों में लिए गए निर्णयों से राज्य की जनता काफी संतुष्ट है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछली एलडीएफ सरकार का पूरा ध्यान के-रेल सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट पर केंद्रित था, जिसे अब रद्द कर दिया गया है। उनके अनुसार, नई सरकार ने कई अहम जन-हितैषी फैसले लिए हैं।

मिल्मा दूध मूल्यवृद्धि पर सरकार की स्थिति

मिल्मा द्वारा दूध की कीमतों में ₹4 प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरेश ने स्पष्ट किया कि मिल्मा एक सहकारी संस्था है और इसके चेयरमैन तथा बोर्ड सदस्यों का चुनाव पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि दूध की कीमत बढ़ाने का निर्णय भी उसी दौर में लिया गया था।

उन्होंने कहा कि नई सरकार को सत्ता में आए अभी केवल दो दिन हुए हैं और इस सरकार ने मूल्यवृद्धि को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। यह निर्णय एलडीएफ-समर्थित बोर्ड और मिल्मा प्रबंधन का है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

सुरेश ने भरोसा दिलाया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री से इस फैसले की समीक्षा कर इसे वापस लेने की माँग की जाएगी, ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब नई सरकार जन-हितैषी छवि बनाने की कोशिश में है।

नई कैबिनेट की संरचना

गौरतलब है कि केरल में नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हुई है। कैबिनेट के 14 सदस्य — जिनमें मुख्यमंत्री सतीशन भी शामिल हैं — पहली बार मंत्री पद पर आसीन हुए हैं। इनमें से छह नेता पहली बार विधायक चुने गए हैं और कैबिनेट में दो महिला मंत्रियों को भी स्थान दिया गया है। इसे यूडीएफ की युवा और नई नेतृत्व छवि पेश करने की कोशिश माना जा रहा है।

आम जनता पर असर

मिल्मा की दूध मूल्यवृद्धि सीधे तौर पर केरल के लाखों उपभोक्ताओं की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है। यदि सरकार इस निर्णय की समीक्षा कराने में सफल होती है, तो यह नई सरकार की जन-संवेदनशीलता का पहला ठोस प्रमाण होगा। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय का इस मसले पर रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मिल्मा मूल्यवृद्धि पर जिम्मेदारी एलडीएफ पर डालना राजनीतिक सुविधा से अधिक कुछ नहीं — क्योंकि सहकारी संस्थाओं पर राज्य सरकार का प्रभाव निर्विवाद है। असली परीक्षा तब होगी जब सरकार वास्तव में इस मूल्यवृद्धि को वापस कराएगी या नहीं। 14 में से 14 मंत्रियों का पहली बार मंत्री बनना ताज़गी तो देता है, पर प्रशासनिक अनुभव की कमी भविष्य में चुनौती बन सकती है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोडिकुन्निल सुरेश ने केरल कैबिनेट बैठकों को ऐतिहासिक क्यों कहा?
उन्होंने कहा कि पहली और दूसरी कैबिनेट बैठकों में जनता के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं और सरकार चुनाव के दौरान किए गए वादों को एक-एक कर पूरा कर रही है। उनके अनुसार राज्य की जनता इन निर्णयों से काफी संतुष्ट है।
मिल्मा दूध मूल्यवृद्धि पर नई केरल सरकार का क्या रुख है?
कांग्रेस सांसद सुरेश ने स्पष्ट किया कि ₹4 प्रति लीटर की यह बढ़ोतरी एलडीएफ-समर्थित बोर्ड और मिल्मा प्रबंधन का निर्णय है, नई सरकार का नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री से इस फैसले की समीक्षा कर इसे वापस लेने की माँग करने का भरोसा दिलाया।
के-रेल सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट का क्या हुआ?
सुरेश के अनुसार पिछली एलडीएफ सरकार का पूरा ध्यान के-रेल सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट पर था, जिसे अब रद्द कर दिया गया है। नई यूडीएफ सरकार ने इसे आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है।
केरल की नई कैबिनेट में कौन-कौन से नए चेहरे हैं?
कैबिनेट के 14 सदस्य — जिनमें मुख्यमंत्री सतीशन भी शामिल हैं — पहली बार मंत्री पद पर आसीन हुए हैं। इनमें से छह नेता पहली बार विधायक चुने गए हैं और दो महिला मंत्रियों को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है।
केरल में नई यूडीएफ सरकार से जनता को क्या उम्मीदें हैं?
सुरेश के अनुसार लोगों को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं और सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है। चुनावी वादों को पूरा करना और मिल्मा जैसे मुद्दों पर राहत देना नई सरकार की प्राथमिकताओं में माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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