20 अगस्त 2026
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घाटी अस्पताल नर्सों का तबादला आदेश के खिलाफ प्रदर्शन, महाराष्ट्र सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

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घाटी अस्पताल नर्सों का तबादला आदेश के खिलाफ प्रदर्शन, महाराष्ट्र सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

सारांश

छत्रपति संभाजीनगर के घाटी अस्पताल की नर्सें 21 मई को सड़क पर उतरीं — निशाने पर था महाराष्ट्र सरकार का व्यापक तबादला आदेश। फेडरेशन की अध्यक्ष इंदुमती ने कहा कि बिना किसी आरोप के हो रहे तबादले महिला स्वास्थ्यकर्मियों के परिवारों को तोड़ रहे हैं। माँगें न मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के बैनर तले घाटी अस्पताल , छत्रपति संभाजीनगर की नर्सों ने 21 मई 2026 को तबादला आदेशों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
नर्सों ने माँग की कि तबादला प्रक्रिया तत्काल वापस ली जाए और उन्हें इससे अलग रखा जाए।
फेडरेशन अध्यक्ष इंदुमती ने कहा — किसी नर्स पर भ्रष्टाचार या आर्थिक अनियमितता का कोई आरोप नहीं, फिर भी तबादले हो रहे हैं।
स्टाफ सदस्य मकरंद ने कहा कि सरकार के कदम का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और यह महिला कर्मचारियों के परिवारों को सीधे प्रभावित करेगा।
नर्सों ने चेतावनी दी — माँगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

छत्रपति संभाजीनगर के घाटी अस्पताल की नर्सों ने महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के नेतृत्व में 21 मई 2026 (गुरुवार) को प्रशासनिक तबादला आदेशों के विरोध में सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। नर्सों ने महाराष्ट्र सरकार से तबादला प्रक्रिया तत्काल वापस लेने की माँग करते हुए चेतावनी दी कि माँगें न मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शनकारी नर्सों ने अस्पताल परिसर में एकत्र होकर सरकार विरोधी नारे लगाए। उनका कहना था कि हर तीन साल में होने वाले तबादलों से न केवल उनका पेशेवर जीवन, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी बुरी तरह प्रभावित होता है। नर्सों ने स्पष्ट किया कि उनके विभाग में पहले से ही हर दो-तीन साल में वार्ड स्तर पर आंतरिक तबादले होते रहे हैं, इसलिए इस व्यापक बाहरी तबादला प्रक्रिया की कोई उचित वजह नहीं दिखती।

महिला कर्मचारियों पर असर

महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन की अध्यक्ष इंदुमती ने कहा कि नर्सिंग पेशे में अधिकतर महिलाएँ कार्यरत हैं और तबादले से पूरे परिवार पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा, 'कई नर्सों के छोटे-छोटे बच्चे हैं और वे अपने बुजुर्ग माता-पिता और सास-ससुर की भी देखभाल करती हैं। ऐसे में तबादले से महिलाओं के सामने कई व्यावहारिक समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं।'

इंदुमती ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी नर्स पर भ्रष्टाचार या किसी आर्थिक अनियमितता का कोई आरोप नहीं है, फिर भी तबादले किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लिया जाए।

स्टाफ की आपत्तियाँ

अस्पताल के स्टाफ सदस्य मकरंद ने कहा कि नर्सों का तबादला किसी आर्थिक लाभ या भुगतान प्रणाली से जुड़ा नहीं है, इसलिए इस तरह की व्यापक तबादला प्रक्रिया उचित नहीं है। उन्होंने कहा, 'सरकार के इस कदम के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।' मकरंद ने यह भी कहा कि तबादले लागू होने पर पूरे परिवार को दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ेगा, जो महिला कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से कठिन होगा।

नर्सों की प्रमुख माँगें

प्रदर्शनकारी नर्सों ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख माँगें रखीं — तबादला आदेश तत्काल वापस लिया जाए; नर्सों को व्यापक तबादला प्रक्रिया से अलग रखा जाए; और इस संबंध में सरकार आधिकारिक आदेश जारी करे। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इन माँगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

आगे की राह

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में पहले से ही स्वास्थ्यकर्मियों की कमी की शिकायतें हैं। गौरतलब है कि नर्सिंग स्टाफ के बड़े पैमाने पर तबादले से अस्पताल सेवाओं की निरंतरता पर भी सवाल उठ सकते हैं। फेडरेशन ने सरकार से जल्द संवाद की उम्मीद जताई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो व्यापक तबादला प्रक्रिया का औचित्य क्या है — यह सवाल सरकार के लिए असहज करने वाला है। महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी पहले से चर्चा में है; ऐसे में अनुभवी नर्सों के बड़े पैमाने पर तबादले सेवा की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकते हैं। सरकार को संवाद का रास्ता खोलना होगा, वरना यह स्थानीय विरोध राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घाटी अस्पताल नर्सों ने प्रदर्शन क्यों किया?
महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के बैनर तले घाटी अस्पताल की नर्सों ने 21 मई 2026 को प्रशासनिक तबादला आदेशों के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि बिना किसी आरोप के हो रहे इन तबादलों से महिला कर्मचारियों और उनके परिवारों पर गंभीर व्यावहारिक असर पड़ता है।
नर्सेज फेडरेशन की प्रमुख माँगें क्या हैं?
फेडरेशन ने तीन माँगें रखी हैं — तबादला आदेश तत्काल वापस लिया जाए, नर्सों को व्यापक तबादला प्रक्रिया से अलग रखा जाए, और सरकार इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करे।
तबादला आदेश महिला नर्सों को कैसे प्रभावित करता है?
फेडरेशन अध्यक्ष इंदुमती के अनुसार, नर्सिंग पेशे में अधिकतर महिलाएँ हैं जिनके छोटे बच्चे और बुजुर्ग परिजन हैं। हर तीन साल में तबादले से पूरे परिवार को नई जगह शिफ्ट होना पड़ता है, जो महिला कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से कठिन होता है।
क्या नर्सों पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप है?
नहीं। फेडरेशन अध्यक्ष इंदुमती ने स्पष्ट किया कि किसी भी नर्स पर भ्रष्टाचार या आर्थिक अनियमितता का कोई आरोप नहीं है। स्टाफ सदस्य मकरंद ने भी कहा कि नर्सों का तबादला किसी आर्थिक लाभ या भुगतान प्रणाली से नहीं जुड़ा, इसलिए यह व्यापक प्रक्रिया अनुचित है।
यदि सरकार ने माँगें नहीं मानीं तो क्या होगा?
प्रदर्शनकारी नर्सों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल फेडरेशन सरकार से जल्द संवाद की उम्मीद जता रही है।
राष्ट्र प्रेस
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