घाटी अस्पताल नर्सों का तबादला आदेश के खिलाफ प्रदर्शन, महाराष्ट्र सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
छत्रपति संभाजीनगर के घाटी अस्पताल की नर्सों ने महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के नेतृत्व में 21 मई 2026 (गुरुवार) को प्रशासनिक तबादला आदेशों के विरोध में सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। नर्सों ने महाराष्ट्र सरकार से तबादला प्रक्रिया तत्काल वापस लेने की माँग करते हुए चेतावनी दी कि माँगें न मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी नर्सों ने अस्पताल परिसर में एकत्र होकर सरकार विरोधी नारे लगाए। उनका कहना था कि हर तीन साल में होने वाले तबादलों से न केवल उनका पेशेवर जीवन, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी बुरी तरह प्रभावित होता है। नर्सों ने स्पष्ट किया कि उनके विभाग में पहले से ही हर दो-तीन साल में वार्ड स्तर पर आंतरिक तबादले होते रहे हैं, इसलिए इस व्यापक बाहरी तबादला प्रक्रिया की कोई उचित वजह नहीं दिखती।
महिला कर्मचारियों पर असर
महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन की अध्यक्ष इंदुमती ने कहा कि नर्सिंग पेशे में अधिकतर महिलाएँ कार्यरत हैं और तबादले से पूरे परिवार पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा, 'कई नर्सों के छोटे-छोटे बच्चे हैं और वे अपने बुजुर्ग माता-पिता और सास-ससुर की भी देखभाल करती हैं। ऐसे में तबादले से महिलाओं के सामने कई व्यावहारिक समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं।'
इंदुमती ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी नर्स पर भ्रष्टाचार या किसी आर्थिक अनियमितता का कोई आरोप नहीं है, फिर भी तबादले किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लिया जाए।
स्टाफ की आपत्तियाँ
अस्पताल के स्टाफ सदस्य मकरंद ने कहा कि नर्सों का तबादला किसी आर्थिक लाभ या भुगतान प्रणाली से जुड़ा नहीं है, इसलिए इस तरह की व्यापक तबादला प्रक्रिया उचित नहीं है। उन्होंने कहा, 'सरकार के इस कदम के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।' मकरंद ने यह भी कहा कि तबादले लागू होने पर पूरे परिवार को दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ेगा, जो महिला कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से कठिन होगा।
नर्सों की प्रमुख माँगें
प्रदर्शनकारी नर्सों ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख माँगें रखीं — तबादला आदेश तत्काल वापस लिया जाए; नर्सों को व्यापक तबादला प्रक्रिया से अलग रखा जाए; और इस संबंध में सरकार आधिकारिक आदेश जारी करे। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इन माँगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आगे की राह
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में पहले से ही स्वास्थ्यकर्मियों की कमी की शिकायतें हैं। गौरतलब है कि नर्सिंग स्टाफ के बड़े पैमाने पर तबादले से अस्पताल सेवाओं की निरंतरता पर भी सवाल उठ सकते हैं। फेडरेशन ने सरकार से जल्द संवाद की उम्मीद जताई है।