महाराजगंज में डीजल संकट: पेट्रोल पंप पर मच्छरदानी लगाकर सो रहे किसान, धान बिजाई खतरे में

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महाराजगंज में डीजल संकट: पेट्रोल पंप पर मच्छरदानी लगाकर सो रहे किसान, धान बिजाई खतरे में

सारांश

महाराजगंज में डीजल की भीषण किल्लत ने किसानों को पेट्रोल पंप पर रात गुज़ारने पर मजबूर कर दिया है। धान बिजाई का मौसम चरम पर है, पर पंपसेट चलाने को ईंधन नहीं — और ऊपर से मई में दो बार हुई कीमत वृद्धि ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

मुख्य बातें

महाराजगंज के किसान 21 मई 2026 को डीजल के लिए पेट्रोल पंप पर मच्छरदानी लगाकर रात गुज़ारने को मजबूर हैं।
धान बिजाई के अहम मौसम में पंपसेट चलाने के लिए डीजल उपलब्ध नहीं, जिससे फसल पर खतरा मंडरा रहा है।
19 मई को पेट्रोल 86 पैसे और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ; 15 मई को भी ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी थी।
ट्यूबवेल और नहरों की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण किसान पूरी तरह डीजल-चालित पंपसेट पर निर्भर हैं।
मध्य-पूर्व में तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित बताई जा रही है।

महाराजगंज के किसान इन दिनों डीजल की भीषण किल्लत से जूझ रहे हैं — स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग पेट्रोल पंप पर रातभर मच्छरदानी लगाकर सोने को मजबूर हैं। 21 मई 2026 को सामने आई इस तस्वीर ने उत्तर प्रदेश के कृषि संकट को उजागर किया है, जहाँ धान की बिजाई के सबसे अहम मौसम में पंपसेट चलाने के लिए ईंधन उपलब्ध नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

महाराजगंज के पेट्रोल पंपों पर किसानों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। किसान बोतल, कनस्तर और डिब्बे लेकर डीजल मिलने का इंतजार करते नज़र आ रहे हैं। स्थानीय किसानों के अनुसार न तो यह पता चल पा रहा है कि डीजल कब मिलेगा और न ही कोई आधिकारिक सूचना दी जा रही है।

एक किसान ने बताया, 'पेट्रोल पंप पर हम लोग डीजल लेने के लिए आए हैं। डीजल की कमी से यहां हाहाकार मचा हुआ है। रात में लोग पेट्रोल पंप पर मच्छरदानी लगाकर सो रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कब मिलेगा और कब नहीं मिलेगा, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है।'

धान बिजाई पर असर

किसानों के लिए यह संकट इसलिए और गहरा है क्योंकि अभी धान के बीज बोने का समय है और खेतों में पानी पहुँचाने के लिए पंपसेट में डीजल की सख्त ज़रूरत है। एक किसान ने कहा, 'इस वक्त तक धान का बीज पड़ जाना चाहिए था और खेतों में पानी चल जाना चाहिए था।' ट्यूबवेल और नहरों की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण किसान पूरी तरह डीजल-चालित पंपसेट पर निर्भर हैं।

किसानों ने यह भी कहा कि उनके पास इतना भी डीजल नहीं बचा कि पंपसेट चला सकें। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है।

ईंधन मूल्य वृद्धि का दोहरा बोझ

19 मई 2026 को पेट्रोल 86 पैसे और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल और डीजल के दाम में ₹3 प्रति लीटर और सीएनजी में ₹2 की बढ़ोतरी की गई थी। यानी महज एक सप्ताह में किसानों पर दोहरी मार पड़ी — एक तरफ कीमत में बढ़ोतरी, दूसरी तरफ उपलब्धता का संकट।

सरकार की प्रतिक्रिया

किसानों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभी अपीलों को मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन बिजाई के इस अहम मौसम में डीजल की अनुपलब्धता उनकी फसल को नुकसान पहुँचा सकती है। एक किसान ने कहा, 'सरकार पता नहीं कैसा उपाय कर रही है कि हम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।' अब तक जिला प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस राहत घोषणा सामने नहीं आई है।

आगे की स्थिति

यदि डीजल की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो महाराजगंज में धान की बिजाई में देरी से किसानों को उत्पादन नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बिजाई का यह मौसम सीधे खरीफ फसल की पैदावार से जुड़ा है, और हर हफ्ते की देरी उपज पर असर डाल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो इस निर्भरता की कीमत सबसे पहले छोटे किसान चुकाते हैं। दो हफ्तों में दो बार ईंधन मूल्य वृद्धि और साथ में उपलब्धता का संकट — यह संयोग नहीं, नीतिगत प्राथमिकता का सवाल है। बिजाई की देरी का सीधा असर खरीफ उत्पादन पर पड़ेगा, और इसकी कीमत उपभोक्ता भी खाद्य महंगाई के रूप में चुकाएंगे।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराजगंज में डीजल की कमी क्यों हो रही है?
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित बताई जा रही है, जिससे महाराजगंज सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में डीजल की उपलब्धता घट गई है। स्थानीय किसानों के अनुसार पेट्रोल पंपों पर डीजल कब मिलेगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही है।
डीजल संकट से धान की फसल पर क्या असर पड़ेगा?
धान बिजाई के लिए खेतों में पानी भरना ज़रूरी होता है, जो डीजल-चालित पंपसेट से होता है। डीजल न मिलने से बिजाई में देरी हो रही है, जिससे खरीफ सीजन की पैदावार प्रभावित हो सकती है और किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मई 2026 में ईंधन के दाम कितने बढ़े हैं?
15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल में ₹3 प्रति लीटर और सीएनजी में ₹2 की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद 19 मई को पेट्रोल 86 पैसे और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर और महंगा हो गया। यानी महज एक सप्ताह में किसानों पर दोहरी मार पड़ी।
क्या सरकार ने महाराजगंज के किसानों के लिए कोई राहत घोषित की है?
अब तक जिला प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस राहत पैकेज या आपातकालीन डीजल आपूर्ति की घोषणा सामने नहीं आई है। किसानों का कहना है कि सरकारी उपाय उन तक नहीं पहुँच पा रहे हैं।
किसान डीजल के लिए इतने निर्भर क्यों हैं?
महाराजगंज में ट्यूबवेल और नहरों की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, इसलिए किसान खेतों में सिंचाई के लिए डीजल-चालित पंपसेट पर निर्भर हैं। सार्वजनिक सिंचाई बुनियादी ढाँचे की कमी के कारण कोई भी ईंधन संकट सीधे कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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