महाराजगंज में डीजल संकट: पेट्रोल पंप पर मच्छरदानी लगाकर सो रहे किसान, धान बिजाई खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
महाराजगंज के किसान इन दिनों डीजल की भीषण किल्लत से जूझ रहे हैं — स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग पेट्रोल पंप पर रातभर मच्छरदानी लगाकर सोने को मजबूर हैं। 21 मई 2026 को सामने आई इस तस्वीर ने उत्तर प्रदेश के कृषि संकट को उजागर किया है, जहाँ धान की बिजाई के सबसे अहम मौसम में पंपसेट चलाने के लिए ईंधन उपलब्ध नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
महाराजगंज के पेट्रोल पंपों पर किसानों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। किसान बोतल, कनस्तर और डिब्बे लेकर डीजल मिलने का इंतजार करते नज़र आ रहे हैं। स्थानीय किसानों के अनुसार न तो यह पता चल पा रहा है कि डीजल कब मिलेगा और न ही कोई आधिकारिक सूचना दी जा रही है।
एक किसान ने बताया, 'पेट्रोल पंप पर हम लोग डीजल लेने के लिए आए हैं। डीजल की कमी से यहां हाहाकार मचा हुआ है। रात में लोग पेट्रोल पंप पर मच्छरदानी लगाकर सो रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कब मिलेगा और कब नहीं मिलेगा, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है।'
धान बिजाई पर असर
किसानों के लिए यह संकट इसलिए और गहरा है क्योंकि अभी धान के बीज बोने का समय है और खेतों में पानी पहुँचाने के लिए पंपसेट में डीजल की सख्त ज़रूरत है। एक किसान ने कहा, 'इस वक्त तक धान का बीज पड़ जाना चाहिए था और खेतों में पानी चल जाना चाहिए था।' ट्यूबवेल और नहरों की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण किसान पूरी तरह डीजल-चालित पंपसेट पर निर्भर हैं।
किसानों ने यह भी कहा कि उनके पास इतना भी डीजल नहीं बचा कि पंपसेट चला सकें। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है।
ईंधन मूल्य वृद्धि का दोहरा बोझ
19 मई 2026 को पेट्रोल 86 पैसे और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल और डीजल के दाम में ₹3 प्रति लीटर और सीएनजी में ₹2 की बढ़ोतरी की गई थी। यानी महज एक सप्ताह में किसानों पर दोहरी मार पड़ी — एक तरफ कीमत में बढ़ोतरी, दूसरी तरफ उपलब्धता का संकट।
सरकार की प्रतिक्रिया
किसानों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभी अपीलों को मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन बिजाई के इस अहम मौसम में डीजल की अनुपलब्धता उनकी फसल को नुकसान पहुँचा सकती है। एक किसान ने कहा, 'सरकार पता नहीं कैसा उपाय कर रही है कि हम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।' अब तक जिला प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस राहत घोषणा सामने नहीं आई है।
आगे की स्थिति
यदि डीजल की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो महाराजगंज में धान की बिजाई में देरी से किसानों को उत्पादन नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बिजाई का यह मौसम सीधे खरीफ फसल की पैदावार से जुड़ा है, और हर हफ्ते की देरी उपज पर असर डाल सकती है।