सियोल में 'इंडियन वॉर मेमोरियल' का उद्घाटन, राजनाथ सिंह ने कोरियाई युद्ध के भारतीय वीरों को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पैट्रियट्स एवं वेटरन्स अफेयर्स मंत्री क्वोन ओह-यूल ने गुरुवार, 21 मई को सियोल के इमजिंगक पार्क में 'इंडियन वॉर मेमोरियल' का संयुक्त उद्घाटन किया। कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर स्थापित यह स्मारक भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (CFI) की वीरता, बलिदान और मानवीय सेवा को समर्पित है।
स्मारक का ऐतिहासिक महत्व
यह स्मारक ठीक उसी स्थान पर निर्मित किया गया है जहाँ 1954 में कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया ने 'हिंद नगर' की स्थापना की थी। यहाँ लगभग 22,000 युद्धबंदियों को उनकी शांतिपूर्ण वापसी तक रखा गया था। इस परियोजना का वित्तपोषण भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया है।
उद्घाटन समारोह में दोनों देशों के मंत्रियों ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी सेवाओं को दक्षिण कोरिया आज भी गहरे सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करता है।
60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और 'मैरून एंजेल्स'
कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस यूनिट ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों और भीषण गोलाबारी के बीच हजारों घायल सैनिकों एवं नागरिकों का उपचार किया। इस यूनिट की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. एजी रंगराज के हाथों में थी।
भारतीय जवानों की अद्वितीय बहादुरी और निस्वार्थ मानवीय सेवा के कारण उन्हें 'मैरून एंजेल्स' की उपाधि दी गई। डॉ. रंगराज को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरिया के पैट्रियट्स एवं वेटरन्स अफेयर्स मंत्रालय ने इस महीने को कर्नल रंगराज के सम्मान में समर्पित किया है। उनकी भतीजी कल्पना प्रसाद भी इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित रहीं।
लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया और तटस्थ राष्ट्र आयोग
भारत ने युद्धविराम के बाद भी कोरियाई संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेफ्टिनेंट जनरल केएस थिमैया के नेतृत्व में भारत ने न्यूट्रल नेशंस रिपैट्रिएशन कमीशन की अध्यक्षता की, जिसका गठन 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते के बाद युद्धबंदियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए किया गया था।
कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया ने इन अत्यंत संवेदनशील जिम्मेदारियों को निष्पक्षता, पेशेवर दक्षता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ निभाया, जिसके लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सम्मान मिला। लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का नेतृत्व आज भी शांति और कूटनीति में भारत की सकारात्मक भूमिका का प्रतीक माना जाता है।
दोनों देशों के बीच समझौता और मंत्रियों के वक्तव्य
इस अवसर पर भारत और दक्षिण कोरिया के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य कोरियाई युद्ध के दिग्गज सैनिकों का सम्मान करना और आपसी संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही भारतीय सैनिकों के बलिदान की स्मृति में एक विशेष संस्मरण भी जारी किया गया।
राजनाथ सिंह ने कहा, 'कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और मानवीय सहायता के लिए भारत का योगदान दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की मजबूत नींव है।' उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद करना दोनों देशों के जन-जन के रिश्तों को और सुदृढ़ करेगा। उन्होंने स्मारक निर्माण में सहयोग के लिए दक्षिण कोरिया सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
दक्षिण कोरिया के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने कोरियाई युद्ध में भारत की भूमिका की सराहना करते हुए भारतीय सैनिकों के बलिदान और मानवीय सेवाओं को दोनों देशों की स्थायी मित्रता का प्रतीक बताया। समारोह में भारत व दक्षिण कोरिया के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि, युद्धवीर, राजनयिक समुदाय के सदस्य और कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
आगे की राह
यह स्मारक भारत-दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इमजिंगक पार्क में स्थापित यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को उन भारतीय वीरों की निस्वार्थ सेवा की याद दिलाता रहेगा।