रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया पहुंचे, 19-21 मई को द्विपक्षीय वार्ता और युद्ध स्मारक उद्घाटन

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया पहुंचे, 19-21 मई को द्विपक्षीय वार्ता और युद्ध स्मारक उद्घाटन

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का तीन दिवसीय दक्षिण कोरिया दौरा महज शिष्टाचार यात्रा नहीं — यह हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ती रक्षा कूटनीति का ठोस कदम है। द्विपक्षीय वार्ता, रक्षा उद्योग साझेदारी और कोरियाई युद्ध में भारत की ऐतिहासिक भूमिका की याद में युद्ध स्मारक उद्घाटन — तीनों मिलकर इस दौरे को विशेष बनाते हैं।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 19 मई 2025 को तीन दिवसीय यात्रा पर सियोल, दक्षिण कोरिया पहुंचे।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और डीएपीए मंत्री ली योंग-चेओल के साथ द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित।
21 मई को दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन; कोरियाई युद्ध में भारत ने 2 लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया था।
भारतीय सेना की कस्टोडियन फोर्स ने लगभग 2,000 युद्धबंदियों का शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन सुनिश्चित किया था।
राजनाथ सिंह इससे पहले 18-19 मई को वियतनाम की यात्रा पर रहे — पूर्व एशिया में रक्षा कूटनीति की व्यापक रणनीति का हिस्सा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 19 मई 2025 को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सियोल, दक्षिण कोरिया पहुंचे। 19 से 21 मई तक चलने वाले इस दौरे का केंद्रबिंदु भारत और कोरिया गणराज्य के बीच रक्षा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समन्वय को नई गति देना है। सियोल पहुंचने पर राजनाथ सिंह ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने और साझा हितों में सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

मुख्य द्विपक्षीय वार्ता

राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ व्यापक द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देश रक्षा साझेदारी की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करेंगे और सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर नई पहलों पर चर्चा करेंगे। साझा क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा।

इसके अतिरिक्त, राजनाथ सिंह अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (डीएपीए) मंत्री ली योंग-चेओल से भी मुलाकात करेंगे, जिसमें रक्षा उत्पादन और रक्षा औद्योगिक सहयोग को विस्तार देने पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। राजनाथ सिंह भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता भी करेंगे, जिसमें दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कोरियाई युद्ध में भारत की भूमिका

भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों की जड़ें कोरियाई युद्ध तक जाती हैं, जो इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अध्याय है। उस दौर में भारत ने शांति और मानवीय सहायता के उद्देश्य से भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट तैनात की थी। इस यूनिट ने तीन वर्षों से अधिक समय तक सेवाएँ देते हुए दो लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया और लगभग 2,500 सर्जरी कीं, साथ ही बड़ी संख्या में नागरिकों का भी इलाज किया गया।

युद्ध की समाप्ति के बाद भारत ने तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग की अध्यक्षता की। संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकृत इस प्रस्ताव के अंतर्गत भारतीय सेना की कस्टोडियन फोर्स ने लगभग 2,000 युद्धबंदियों का शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन सुनिश्चित किया — जिसे वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता है।

भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन

इसी ऐतिहासिक योगदान की स्मृति में 21 मई को दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राजनाथ सिंह के साथ दक्षिण कोरिया के मंत्री क्वोन ओह-यूल भी शामिल होंगे। यह उद्घाटन दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक स्मृति और कूटनीतिक निकटता को एक साथ रेखांकित करता है।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी और हिंद-प्रशांत रणनीति का सामंजस्य

भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और दक्षिण कोरिया की 'इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी' के बीच बढ़ता सामंजस्य इस साझेदारी को नई ऊंचाई दे रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, शांति, स्थिरता और मुक्त समुद्री मार्गों के प्रति प्रतिबद्धता ने भारत-दक्षिण कोरिया रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ किया है। गौरतलब है कि इस दौरे से पहले राजनाथ सिंह 18 से 19 मई तक वियतनाम की यात्रा पर रहे, जो भारत की पूर्व एशिया में रक्षा कूटनीति की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग में साझेदारी और समुद्री सहयोग को मजबूत करना है, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके। इस दौरे के नतीजे भारत की पूर्व-एशिया रक्षा साझेदारी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्पष्ट संकेत देता है कि भारत हिंद-प्रशांत में अपनी रक्षा साझेदारियों को तेज़ी से विस्तार दे रहा है — और यह केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है। दक्षिण कोरिया के साथ रक्षा उद्योग सहयोग की संभावना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोरिया वैश्विक हथियार निर्यात में तेज़ी से उभरा है और भारत 'मेक इन इंडिया' के तहत सह-उत्पादन भागीदार खोज रहा है। युद्ध स्मारक उद्घाटन ऐतिहासिक स्मृति को सक्रिय कूटनीतिक पूंजी में बदलने की भारत की परिपक्व रणनीति को दर्शाता है। असली परीक्षा यह होगी कि इन वार्ताओं से ठोस रक्षा अनुबंध और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते निकलते हैं या नहीं।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का दक्षिण कोरिया दौरा कब और क्यों हो रहा है?
राजनाथ सिंह 19 से 21 मई 2025 तक दक्षिण कोरिया की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे का उद्देश्य भारत-कोरिया रक्षा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समन्वय को मजबूत करना है।
राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया में किन नेताओं से मिलेंगे?
राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक और डीएपीए मंत्री ली योंग-चेओल से मिलेंगे। इसके अलावा वे भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता भी करेंगे।
दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन कब होगा और इसका महत्व क्या है?
21 मई 2025 को दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त उद्घाटन होगा। यह स्मारक कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट की सेवाओं को श्रद्धांजलि है, जिसने 2 लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया था।
कोरियाई युद्ध में भारत की क्या भूमिका थी?
कोरियाई युद्ध के दौरान भारत ने शांति और मानवीय सहायता के लिए 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट तैनात की, जिसने तीन वर्षों में 2 लाख से अधिक मरीजों का उपचार और लगभग 2,500 सर्जरी कीं। युद्ध के बाद भारत ने तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग की अध्यक्षता करते हुए लगभग 2,000 युद्धबंदियों का शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन सुनिश्चित किया।
भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और दक्षिण कोरिया के संबंध कैसे जुड़े हैं?
भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और दक्षिण कोरिया की 'इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी' के बीच बढ़ता सामंजस्य दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत आधार दे रहा है। साझा लोकतांत्रिक मूल्य, मुक्त समुद्री मार्गों की प्रतिबद्धता और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों देशों के हितों को एकजुट करते हैं।
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