राजनाथ सिंह का वियतनाम-दक्षिण कोरिया दौरा: ब्रह्मोस डील और रक्षा साझेदारी पर होगी अहम वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार, 19 मई 2025 को वियतनाम की राजधानी हनोई पहुँचेंगे और इसके बाद दक्षिण कोरिया का दौरा करेंगे। इस द्विदेशीय यात्रा का केंद्रीय उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और सैन्य मौजूदगी को और सुदृढ़ करना है। रवाना होने से पहले राजनाथ सिंह ने कहा कि इस दौरे में रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत बनाने और समुद्री सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
वियतनाम में ब्रह्मोस सौदा — मुख्य एजेंडा
हनोई दौरे में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदे पर चर्चा सबसे अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह डील उन्नत चरण में पहुँच चुकी है और इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹5,800 करोड़ बताई जा रही है। यदि यह समझौता संपन्न होता है, तो फिलीपींस के बाद वियतनाम ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली हासिल करने वाला दूसरा प्रमुख दक्षिण-पूर्व एशियाई देश बन जाएगा — जो भारत के रक्षा निर्यात एजेंडे के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि होगी।
इसके अतिरिक्त, भारत वियतनाम के सुखोई-30 लड़ाकू विमानों और किलो-क्लास पनडुब्बियों के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सहायता देने पर भी विचार कर रहा है। समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक सहयोग और रक्षा उपकरणों के रखरखाव पर भी बातचीत अपेक्षित है।
दक्षिण कोरिया: तकनीकी हस्तांतरण और स्टार्टअप सहयोग
दक्षिण कोरिया दौरे में रक्षा निर्माण, तकनीकी हस्तांतरण और अगली पीढ़ी की सैन्य तकनीकों पर सहयोग प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों देशों के बीच पहले से के-9 वज्र तोप प्रणाली पर सहयोग चल रहा है। अब एयर डिफेंस सिस्टम और रक्षा स्टार्टअप सहयोग को विस्तार देने पर वार्ता होने की संभावना है।
विशेष रूप से 'कोरिया-इंडिया डिफेंस एक्सेलेरेटर' पहल को आगे बढ़ाया जा सकता है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप्स, रिसर्च संस्थानों और निवेशकों को एक साझा मंच पर लाकर उन्नत सैन्य तकनीकों का संयुक्त विकास करना है।
एक्ट ईस्ट नीति को नई धार
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और 'फ्री, ओपन एंड रूल्स-बेस्ड इंडो-पैसिफिक' रणनीति को नई मजबूती देने वाला कदम है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव और चीन के विस्तारवादी रुख के बीच भारत, वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे सामरिक साझेदारों के साथ रक्षा संबंधों को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपने रक्षा निर्यात को तेज़ी से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को वैश्विक बाज़ार में स्थापित करने पर जोर दे रहा है।
आगे क्या होगा
दोनों देशों के साथ वार्ता के नतीजे रक्षा मंत्रालय द्वारा यात्रा के समापन पर साझा किए जाने की उम्मीद है। ब्रह्मोस सौदे पर अंतिम हस्ताक्षर की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार वार्ता निर्णायक दौर में है। इस दौरे के नतीजे भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।