बर्लिन में राजनाथ सिंह की बड़ी बैठक: भारत-जर्मनी रक्षा सह-विकास और सह-उत्पादन पर बनी सहमति

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बर्लिन में राजनाथ सिंह की बड़ी बैठक: भारत-जर्मनी रक्षा सह-विकास और सह-उत्पादन पर बनी सहमति

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में भारत-जर्मनी रक्षा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक में सह-विकास व सह-उत्पादन पर सहमति बनाई। जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ 'डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप' पर हस्ताक्षर हुए। यह तीन दिवसीय यात्रा दोनों देशों के रक्षा संबंधों को ऐतिहासिक मजबूती देने वाली है।

Key Takeaways

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय जर्मनी यात्रा पर हैं और 23 अप्रैल, 2025 को बर्लिन में रक्षा उद्योग प्रतिनिधियों से मिले।
  • बैठक में सह-विकास (Co-Development) और सह-उत्पादन (Co-Production) पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी।
  • जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ बैठक में 'डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप' पर ऐतिहासिक हस्ताक्षर हुए।
  • जर्मन उद्योग जगत ने भारत की नई रक्षा औद्योगिक नीति और निवेश-अनुकूल माहौल की सराहना की।
  • राजनाथ सिंह ने बर्लिन में प्रवासी भारतीय समुदाय को 'भारत-जर्मनी के बीच जीवंत सेतु' बताया।
  • यह यात्रा भारत की रक्षा कूटनीति और आत्मनिर्भर भारत अभियान को वैश्विक मंच पर मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बर्लिन, 23 अप्रैल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भारत और जर्मनी के रक्षा उद्योग से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में उन्नत तकनीकों के सह-विकास (Co-Development) और सह-उत्पादन (Co-Production) को लेकर दोनों देशों के बीच ठोस सहमति बनी। यह बैठक तीन दिवसीय जर्मनी यात्रा का एक अहम पड़ाव रही।

बैठक में क्या हुआ खास?

गुरुवार, 23 अप्रैल को बर्लिन में आयोजित इस बैठक में रक्षा उत्पादन, अत्याधुनिक तकनीक और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग की असीमित संभावनाएं हैं और दोनों देश मिलकर इस क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकते हैं।

रक्षा मंत्री ने बताया कि जर्मन उद्योग जगत ने भारत में रक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उन्होंने भारत की नई रक्षा औद्योगिक नीति और निवेश-अनुकूल वातावरण को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत उदाहरण बताया।

जर्मन कंपनियों से किया विशेष आग्रह

राजनाथ सिंह ने जर्मन कंपनियों से आग्रह किया कि वे भारत के साथ मिलकर विशेष और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन की दिशा में सक्रिय कदम उठाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का द्विपक्षीय सहयोग न केवल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा को भी नई मजबूती देगा।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि भारत विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार को प्राथमिकता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप पर हस्ताक्षर

इससे पहले राजनाथ सिंह ने जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच 'डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप' पर हस्ताक्षर किए गए, जो भारत-जर्मनी रक्षा उद्योग सहयोग को एक नई संरचित दिशा प्रदान करेगा। यह समझौता दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।

भारतीय समुदाय से भी की मुलाकात

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में प्रवासी भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत और जर्मनी के बीच एक 'जीवंत सेतु' बताते हुए उनके योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में प्रवासी भारतीयों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है और वे दोनों देशों को करीब लाने में अमूल्य योगदान दे रहे हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है, बुनियादी ढांचे में व्यापक विस्तार हो रहा है और स्टार्टअप इकोसिस्टम में युवा नए-नए नवाचार लेकर आ रहे हैं।

यह यात्रा भारत-जर्मनी रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को एक नई गति देने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले महीनों में डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप के तहत दोनों देशों के बीच ठोस परियोजनाओं की घोषणा अपेक्षित है।

Point of View

बल्कि भारत की 'आत्मनिर्भर रक्षा' नीति को वैश्विक साझेदारियों से जोड़ने की सुविचारित रणनीति है। 'डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप' पर हस्ताक्षर यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि भारत अब रक्षा आयातक की छवि से बाहर निकलकर तकनीकी सह-निर्माता की भूमिका में आना चाहता है। यह बदलाव भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता दोनों के लिए निर्णायक साबित होगा।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

राजनाथ सिंह की जर्मनी यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीन दिवसीय जर्मनी यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-जर्मनी के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना था। इस दौरान उन्होंने जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से मुलाकात की और रक्षा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सह-विकास व सह-उत्पादन पर चर्चा की।
डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप क्या है और इसका क्या महत्व है?
'डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप' भारत और जर्मनी के बीच रक्षा उद्योग सहयोग की दिशा तय करने वाला एक ऐतिहासिक समझौता है। यह दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी, तकनीकी नवाचार और संयुक्त उत्पादन को संरचित रूप देगा।
राजनाथ सिंह ने जर्मन कंपनियों से क्या आग्रह किया?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मन कंपनियों से आग्रह किया कि वे भारत के साथ मिलकर उन्नत और विशेष तकनीकों के क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन में सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि यह सहयोग भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता को भी मजबूत करेगा।
राजनाथ सिंह ने बर्लिन में प्रवासी भारतीयों को क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में प्रवासी भारतीय समुदाय को 'भारत और जर्मनी के बीच जीवंत सेतु' बताया। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और भारत की अर्थव्यवस्था व स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग से भारत को क्या फायदा होगा?
भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग से भारत को उन्नत सैन्य तकनीक, सह-उत्पादन के अवसर और रक्षा निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। यह सहयोग भारत को 'आत्मनिर्भर भारत' के रक्षा लक्ष्यों की प्राप्ति में भी सहायक होगा।
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