चीन का कड़ा जवाब: ट्रंप के ईरानी जहाज 'गिफ्ट' दावे को बीजिंग ने नकारा
सारांश
Key Takeaways
- चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 24 अप्रैल 2025 को ट्रंप के दावे को बिना सबूत का बताते हुए खारिज किया।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि हॉर्मुज़ स्ट्रेट में रोके गए ईरानी जहाज में चीन का 'गिफ्ट' हो सकता है।
- निक्की हेली ने 21 अप्रैल को आरोप लगाया कि जहाज में मिसाइलों के लिए रासायनिक सामग्री थी।
- चीन ने 20 अप्रैल को भी हॉर्मुज़ स्ट्रेट की स्थिति को 'जटिल और संवेदनशील' बताया था।
- हॉर्मुज़ स्ट्रेट से दुनिया के तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग बनाता है।
- चीन और ईरान के बीच 2021 में हस्ताक्षरित 25 वर्षीय रणनीतिक समझौता इस विवाद की पृष्ठभूमि में अहम भूमिका निभाता है।
बीजिंग, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद दावे को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हॉर्मुज़ स्ट्रेट में अमेरिका द्वारा रोके गए एक ईरानी जहाज में बीजिंग की ओर से भेजा गया 'उपहार' हो सकता है। 24 अप्रैल 2025 को बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस ब्रीफिंग में चीनी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के लगाए गए किसी भी आरोप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चीनी विदेश मंत्रालय की तीखी प्रतिक्रिया
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने शुक्रवार की प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "चीन बिना किसी तथ्यात्मक साक्ष्य के लगाए गए आरोपों और अटकलों को सिरे से खारिज करता है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि देशों के बीच सामान्य व्यापारिक गतिविधियों को बाधित या नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन व्यापार तनाव पहले से ही चरम पर है और दोनों देशों के बीच टैरिफ युद्ध जारी है। ऐसे में ट्रंप का यह दावा कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।
ट्रंप ने क्या कहा था?
राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार, 22 अप्रैल को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि अमेरिका ने एक ऐसे जहाज को रोका है जिसमें संदिग्ध सामग्री थी। उन्होंने कहा, "यह शायद चीन की ओर से एक 'गिफ्ट' हो सकता है। मुझे इस पर आश्चर्य हुआ क्योंकि मेरे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अच्छे संबंध हैं।"
ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी, क्योंकि एक तरफ वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अच्छे संबंधों का दावा करते हैं और दूसरी तरफ बीजिंग पर ईरान को सामग्री आपूर्ति का आरोप लगा रहे हैं — यह विरोधाभास उनकी विदेश नीति की जटिलता को उजागर करता है।
निक्की हेली का आरोप और हॉर्मुज़ स्ट्रेट विवाद
साउथ कैरोलिना की पूर्व गवर्नर निक्की हेली ने 21 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर दावा किया था कि हॉर्मुज़ स्ट्रेट में पकड़ा गया जहाज चीन से ईरान जा रहा था और उसमें मिसाइलों के लिए रासायनिक सामग्री हो सकती थी।
हेली ने कहा था कि यह घटना इस बात की पुष्टि करती है कि चीन, ईरान सरकार को सक्रिय रूप से समर्थन दे रहा है। उनके इस बयान ने अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी।
इससे एक दिन पहले, 20 अप्रैल को, गुओ जियाकुन ने हॉर्मुज़ स्ट्रेट की स्थिति को "जटिल और संवेदनशील" बताते हुए अमेरिका की जबरन जहाज रोकने की कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने सभी पक्षों से जिम्मेदारी दिखाने और तनाव न बढ़ाने की अपील की थी।
हॉर्मुज़ स्ट्रेट का रणनीतिक महत्व
हॉर्मुज़ स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता की पृष्ठभूमि में यह क्षेत्र लगातार संवेदनशील बना हुआ है। यदि यहां कोई बड़ा संघर्ष होता है, तो वैश्विक तेल कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है — जो भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए भी चिंताजनक होगा।
व्यापक संदर्भ: चीन-ईरान-अमेरिका त्रिकोण
गौरतलब है कि चीन, ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और दोनों देशों के बीच 25 वर्षीय रणनीतिक सहयोग समझौता वर्ष 2021 में हस्ताक्षरित हुआ था। इस समझौते के तहत चीन ने ईरान में भारी निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी।
अमेरिका लंबे समय से चीन पर ईरान प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप लगाता रहा है। यह पहली बार नहीं है जब किसी अमेरिकी नेता ने चीन-ईरान संबंधों पर सवाल उठाए हों। ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल (2017-2021) में भी चीनी कंपनियों पर ईरान को सामग्री आपूर्ति के आरोप में प्रतिबंध लगाए गए थे।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका इस जहाज में मिली सामग्री के बारे में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक करता है या नहीं, और क्या चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता पर इसका कोई असर पड़ता है।