शांगहाई में समुद्री साझा भविष्य मंच: नीली अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा पर वैश्विक चर्चा

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शांगहाई में समुद्री साझा भविष्य मंच: नीली अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा पर वैश्विक चर्चा

सारांश

शांगहाई मैरीटाइम यूनिवर्सिटी में 23 अप्रैल को दूसरे 'समुद्री साझा भविष्य' मंच में समुद्री सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था और एशिया-प्रशांत सहयोग पर वैश्विक विशेषज्ञों ने मंथन किया। संयुक्त राष्ट्र ने भी चीन की भूमिका की सराहना की और वैश्विक समुद्री सुरक्षा रिपोर्ट 2025-2026 जारी की गई।

Key Takeaways

  • 23 अप्रैल 2025 को शांगहाई मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के लिनकांग कैंपस में दूसरे 'समुद्री साझा भविष्य वाला समुदाय' मंच का आयोजन हुआ।
  • मंच की थीम 'संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा की रक्षा करें और नीले विकास को बढ़ावा दें' रही।
  • एक मुख्य मंच और चार समानांतर उप-मंचों में एशिया-प्रशांत सहयोग, नीली अर्थव्यवस्था और समुद्री कानून पर विचार-विमर्श हुआ।
  • संयुक्त राष्ट्र ESCAP अधिकारी ने वीडियो संबोधन में चीन की समुद्री भूमिका की सराहना की।
  • 'वैश्विक समुद्री सुरक्षा स्थिति आकलन 2025-2026' रिपोर्ट और नीले भविष्य निर्माण पहल इस मंच में जारी की गई।
  • यह मंच वैश्विक महासागर शासन में चीन की केंद्रीय भूमिका स्थापित करने की दिशा में एक सुनियोजित कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।

बीजिंग, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शांगहाई मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के लिनकांग कैंपस में 23 अप्रैल 2025 को दूसरे 'समुद्री साझा भविष्य वाला समुदाय' शांगहाई मंच का सफल आयोजन किया गया। इस मंच की केंद्रीय थीम थी — 'संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा की रक्षा करें और नीले विकास को बढ़ावा दें'। यह आयोजन वैश्विक महासागर शासन और समुद्री सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मंच का उद्देश्य और वैश्विक महत्व

साझा भविष्य वाले समुद्री समुदाय की अवधारणा मानव जाति के लिए साझा भविष्य की व्यापक सोच का एक सजीव विस्तार है। चीन ने इसे वैश्विक महासागर शासन में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक नीति उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया है। इस मंच का प्राथमिक लक्ष्य चीन और अन्य देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में संवाद और सहयोग का एक सुदृढ़ सेतु तैयार करना है।

यह मंच ऐसे समय में आयोजित हुआ जब वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ रहा है। दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुकी है। ऐसे में यह मंच नीली अर्थव्यवस्था और समुद्री कूटनीति को एक साथ संबोधित करता है।

मुख्य मंच और समानांतर उप-मंच

इस आयोजन में एक मुख्य मंच और चार समानांतर उप-मंच शामिल थे। विशेषज्ञों और विद्वानों ने निम्नलिखित विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया:

एशिया-प्रशांत समुद्री सहयोगात्मक विकास, समुद्री सुरक्षा और कानूनी सिद्धांत, नीली अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली तथा राष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति — इन चार प्रमुख धुरियों पर चर्चा केंद्रित रही। इन उप-मंचों ने विभिन्न देशों के नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं को एक साझा मंच पर लाने का काम किया।

संयुक्त राष्ट्र का समर्थन और आह्वान

संयुक्त राष्ट्र एशिया-प्रशांत आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वीडियो संबोधन के माध्यम से इस मंच को संबोधित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग में चीन की भूमिका की सराहना करते हुए सभी पक्षों से आपसी सहयोग मजबूत करने और साझा सहमति बनाने का आग्रह किया।

उन्होंने विशेष रूप से जहाजरानी क्षेत्र में हरित (Green), डिजिटल और लचीले (Resilient) विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह संयुक्त राष्ट्र का समर्थन इस मंच को एक बहुपक्षीय वैधता प्रदान करता है।

महत्वपूर्ण रिपोर्ट और पहल का विमोचन

मंच के दौरान दो अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जारी किए गए। पहला — 'वैश्विक समुद्री सुरक्षा स्थिति आकलन और दृष्टिकोण (2025-2026)' रिपोर्ट, जो वैश्विक समुद्री खतरों और अवसरों का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। दूसरा — 'संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा की रक्षा और नीले भविष्य का निर्माण' शीर्षक से एक महत्वाकांक्षी पहल।

इन दोनों दस्तावेज़ों ने समुद्री सहयोग की अवधारणाओं को व्यापक बनाया और विभिन्न देशों के बीच सहयोग के नए मार्ग खोले।

भारत के लिए प्रासंगिकता और व्यापक संदर्भ

यह मंच ऐसे समय में आयोजित हुआ जब भारत भी अपनी 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री उपस्थिति मजबूत कर रहा है। चीन का यह मंच स्पष्ट रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री कूटनीति में अपनी केंद्रीय भूमिका स्थापित करने की दिशा में एक सुनियोजित कदम है।

गौरतलब है कि 2024 में पहले शांगहाई मंच के बाद से इस पहल ने तेज़ी से अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है। आने वाले वर्षों में इस मंच के विस्तार और अधिक देशों की भागीदारी की संभावना है, जो वैश्विक समुद्री शासन की रूपरेखा को नया आकार दे सकती है।

(साभार — चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

Point of View

तब चीन का यह मंच एशिया-प्रशांत में समुद्री कूटनीति की बाज़ी अपने हाथ में लेने की कोशिश है। संयुक्त राष्ट्र का समर्थन इस पहल को बहुपक्षीय वैधता देता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह मंच वास्तविक सहयोग का मंच बनेगा या चीन के समुद्री विस्तारवाद को वैश्विक स्वीकृति दिलाने का माध्यम।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

समुद्री साझा भविष्य वाला समुदाय शांगहाई मंच क्या है?
यह चीन द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री सम्मेलन है जिसका उद्देश्य वैश्विक महासागर शासन, समुद्री सुरक्षा और नीली अर्थव्यवस्था पर सहयोग बढ़ाना है। 23 अप्रैल 2025 को शांगहाई मैरीटाइम यूनिवर्सिटी में इसका दूसरा संस्करण आयोजित हुआ।
इस मंच में किन विषयों पर चर्चा हुई?
मंच में एशिया-प्रशांत समुद्री सहयोग, समुद्री सुरक्षा और कानूनी सिद्धांत, नीली अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति जैसे विषयों पर चर्चा हुई। एक मुख्य मंच और चार समानांतर उप-मंचों में विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
संयुक्त राष्ट्र ने इस मंच में क्या भूमिका निभाई?
संयुक्त राष्ट्र एशिया-प्रशांत आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के एक अधिकारी ने वीडियो संबोधन के माध्यम से चीन की समुद्री सहयोग भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने हरित, डिजिटल और लचीले समुद्री विकास को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
इस मंच में कौन सी रिपोर्ट और पहल जारी की गई?
'वैश्विक समुद्री सुरक्षा स्थिति आकलन और दृष्टिकोण (2025-2026)' रिपोर्ट और 'संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा की रक्षा और नीले भविष्य का निर्माण' पहल इस मंच में जारी की गई। इनका उद्देश्य समुद्री सहयोग की दिशा में आम सहमति बनाना था।
यह मंच भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी 'सागर' नीति के तहत सक्रिय है और चीन का यह मंच एशिया-प्रशांत में समुद्री कूटनीति को प्रभावित कर सकता है। दोनों देशों के बीच समुद्री हितों के टकराव के मद्देनज़र यह मंच भारतीय नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।
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