डेयरी क्रांति: MP सरकार का 52 लाख किलो दूध खरीद का बड़ा लक्ष्य, CM मोहन यादव का ऐलान
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 24 अप्रैल को MP राज्य सहकारी डेयरी महासंघ की समीक्षा बैठक में 52 लाख किलोग्राम दैनिक दूध खरीद का लक्ष्य घोषित किया।
- वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन केवल 9.67 लाख किलोग्राम दूध की खरीद हो रही है — लक्ष्य से पांच गुना से अधिक कम।
- 26,000 गांवों को डेयरी गतिविधियों से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना है।
- वर्ष 2025-26 में 1,752 नई डेयरी सहकारी समितियां बनाई गईं और 701 निष्क्रिय समितियां पुनः सक्रिय की गईं।
- इंदौर में मिल्क पाउडर प्लांट और शिवपुरी-ग्वालियर में डेयरी इकाइयों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
- मोबाइल आधारित दूध खरीद प्रणाली और फील्ड फोर्स मॉनिटरिंग ऐप से पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
भोपाल, 24 अप्रैल। मध्य प्रदेश में डेयरी सेक्टर को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी हो रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश राज्य सहकारी डेयरी महासंघ की समीक्षा बैठक में घोषणा की कि राज्य सरकार प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दूध खरीद का लक्ष्य हासिल करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने डेयरी विकास को किसानों की आय दोगुनी करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का सबसे कारगर माध्यम बताया।
किसान कल्याण वर्ष के तहत डेयरी को मिलेगी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत डेयरी गतिविधियों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि सहकारी ढांचे के माध्यम से डेयरी की सुविधाएं हर गांव तक पहुंचें, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के नए द्वार खुलें।
उन्होंने कहा, ''डेयरी विकास किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है और सरकार सहकारी ढांचे के जरिए इसे गांव-गांव तक पहुंचाने पर काम कर रही है।''
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सहयोग और खरीद में सुधार
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ साझेदारी को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि इस सहयोग से दूध की खरीद दरों में सुधार हुआ है और किसानों को उचित मूल्य मिल रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि NDDB के अनुभव का लाभ राज्य स्तर से लेकर ग्राम स्तर की डेयरी समितियों तक उठाया जाए, ताकि पूरी व्यवस्था में एकरूपता और दक्षता बनी रहे।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार करें, नई प्रोसेसिंग एवं उत्पाद निर्माण इकाइयां स्थापित करें, पशु आहार संयंत्रों को आधुनिक बनाएं और डेयरी वैल्यू चेन को डिजिटल करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना लागू करें।
26,000 गांव और 52 लाख किलो दूध — बड़े लक्ष्य, बड़ी चुनौती
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि राज्य सरकार 26,000 गांवों को डेयरी गतिविधियों से जोड़ने और रोज़ाना दूध खरीद को 52 लाख किलोग्राम तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन केवल 9.67 लाख किलोग्राम दूध की खरीद हो रही है, जिसे 153 बल्क मिल्क कूलर के जरिए संभाला जा रहा है। यानी लक्ष्य और वर्तमान स्थिति के बीच पांच गुना से अधिक का अंतर है — जो इस योजना की महत्वाकांक्षा और चुनौती दोनों को दर्शाता है।
वर्ष 2025-26 में 1,752 नई डेयरी सहकारी समितियां गठित की गई हैं, जबकि 701 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय किया गया है। यह संस्थागत विस्तार इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की नींव है।
डिजिटल तकनीक और आधुनिक प्रोसेसिंग से मिलेगी नई रफ्तार
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने मोबाइल आधारित दूध खरीद प्रणाली लागू की है। इससे किसान दूध की मात्रा, गुणवत्ता और कीमत की जानकारी रियल टाइम में प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही फील्ड फोर्स मॉनिटरिंग ऐप के जरिए निगरानी तंत्र को भी सशक्त किया गया है।
प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए इंदौर में मिल्क पाउडर प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जबकि शिवपुरी और ग्वालियर की डेयरी इकाइयों का उन्नयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री यादव ने ब्रांडिंग मजबूत करने और आधुनिक पैकेजिंग अपनाने पर भी विशेष जोर दिया, ताकि मध्य प्रदेश के डेयरी उत्पाद देश और विदेश के बाजारों में अपनी पहचान बना सकें।
गहरा विश्लेषण: लक्ष्य बड़ा, रास्ता लंबा
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश अभी डेयरी उत्पादन में गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से काफी पीछे है। गुजरात का अमूल मॉडल दशकों की मेहनत और सहकारी अनुशासन का नतीजा है। MP में वर्तमान दैनिक खरीद 9.67 लाख किलोग्राम से 52 लाख किलोग्राम तक पहुंचने के लिए न केवल बुनियादी ढांचे में भारी निवेश, बल्कि पशुपालकों को दीर्घकालिक प्रोत्साहन और बाजार की गारंटी भी देनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक किसानों को समय पर और उचित भुगतान नहीं मिलता, सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा।
आने वाले महीनों में इन योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट और 2025-26 के अंत में खरीद के आंकड़े यह तय करेंगे कि यह ऐलान केवल नीतिगत दस्तावेज बनकर रहता है या जमीन पर डेयरी क्रांति की असली शुरुआत होती है।