पीएआईएमएएनए से बुनियादी ढांचे की निगरानी मजबूत: 41.50 लाख करोड़ की 1,941 परियोजनाएं ट्रैक पर
सारांश
Key Takeaways
- पीएआईएमएएनए प्लेटफॉर्म पर मार्च 2025 तक 41.50 लाख करोड़ रुपए की 1,941 केंद्रीय परियोजनाएं डिजिटल निगरानी में हैं।
- कुल संशोधित लागत का 48.02 प्रतिशत यानी 19.93 लाख करोड़ रुपए अब तक व्यय किए जा चुके हैं।
- 777 परियोजनाएं (लगभग 40%25) 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति हासिल कर चुकी हैं।
- सड़क परिवहन मंत्रालय 1,120 परियोजनाओं (10.61 लाख करोड़) के साथ शीर्ष पर, रेल मंत्रालय 8.37 लाख करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर।
- 786 मेगा परियोजनाएं (प्रत्येक ₹1,000 करोड़+) की कुल मूल लागत 30.48 लाख करोड़ रुपए है।
- यह प्रणाली 17 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में पारदर्शिता और डेटा-आधारित शासन सुनिश्चित कर रही है।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसके पीएआईएमएएनए (PAIMANA — Project Assessment Infrastructure Monitoring and Analytics for Nation Building) डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देश में बुनियादी ढांचे के विकास की निगरानी को नई ऊंचाई दी गई है। मार्च 2025 तक यह प्रणाली 41.50 लाख करोड़ रुपए की कुल संशोधित लागत वाली 1,941 केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं पर नजर रख रही है।
पीएआईएमएएनए क्या है और यह कैसे काम करता है
पीएआईएमएएनए एक उन्नत डिजिटल निगरानी प्रणाली है जिसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म 17 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में फैली परियोजनाओं की वास्तविक समय में प्रगति, वित्तीय व्यय और भौतिक स्थिति को एकीकृत डेटाबेस में दर्ज करता है।
सरकार के अनुसार यह प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाने, समय पर समीक्षा सुनिश्चित करने और मंत्रालयों में डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायक सिद्ध हो रही है। इससे परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि जैसी पुरानी समस्याओं पर लगाम लगाने में मदद मिल रही है।
खर्च और प्रगति के प्रमुख आंकड़े
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, निगरानी में शामिल परियोजनाओं पर अब तक कुल 19.93 लाख करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं, जो कुल संशोधित लागत का 48.02 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि परियोजनाओं का क्रियान्वयन निरंतर गति से आगे बढ़ रहा है।
भौतिक प्रगति के मोर्चे पर भी स्थिति उत्साहजनक है। 777 परियोजनाएं यानी कुल का लगभग 40 प्रतिशत, 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति हासिल कर चुकी हैं। वहीं 261 परियोजनाएं वित्तीय पूर्णता के मामले में भी 80 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर चुकी हैं।
परिवहन क्षेत्र का दबदबा, सड़क मंत्रालय अग्रणी
भारत के बुनियादी ढांचे के परिदृश्य में परिवहन और रसद क्षेत्र सबसे बड़ा हिस्सेदार बना हुआ है। इस क्षेत्र में 1,428 परियोजनाएं शामिल हैं जिनकी संशोधित लागत 22.66 लाख करोड़ रुपए है। इसमें सड़कें, रेलवे, विमानन और जलमार्ग सभी शामिल हैं।
मंत्रालयों में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय सबसे आगे है — इसके तहत 1,120 परियोजनाएं हैं जिनकी कुल लागत 10.61 लाख करोड़ रुपए है। रेल मंत्रालय 244 परियोजनाओं के साथ दूसरे स्थान पर है और इसका वित्तीय भार 8.37 लाख करोड़ रुपए है — जो प्रति परियोजना लागत के हिसाब से सर्वाधिक है।
अन्य प्रमुख मंत्रालयों में कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बिजली तथा आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय शामिल हैं।
मेगा और प्रमुख परियोजनाओं का विश्लेषण
पोर्टफोलियो में 786 मेगा परियोजनाएं हैं जिनमें से प्रत्येक की लागत 1,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक है। इनकी संयुक्त मूल लागत 30.48 लाख करोड़ रुपए है।
इसके अलावा 1,155 प्रमुख परियोजनाएं जिनकी लागत 1,000 करोड़ रुपए से कम है, कुल सूची में 5.41 लाख करोड़ रुपए का योगदान देती हैं। इस प्रकार बड़ी और छोटी दोनों श्रेणियों की परियोजनाएं एक ही छत के नीचे डिजिटल निगरानी में हैं।
व्यापक संदर्भ: डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम
गौरतलब है कि भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि दशकों से एक बड़ी चुनौती रही है। CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की पिछली रिपोर्टें बताती रही हैं कि सैकड़ों परियोजनाएं तय समय से वर्षों पीछे चलती हैं और मूल बजट से कई गुना अधिक खर्च होता है।
ऐसे में पीएआईएमएएनए जैसी प्रणाली का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह न केवल परियोजनाओं की स्थिति दर्शाता है बल्कि संभावित बाधाओं की पूर्व चेतावनी देने में भी सक्षम है। आगे आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेष 52 प्रतिशत अव्ययित राशि किस गति से खर्च होती है और कितनी परियोजनाएं तय समयसीमा में पूरी होती हैं।