आंध्र प्रदेश में बनेगी दुनिया की पहली 'कोको सिटी', चंद्रबाबू नायडू का ऐतिहासिक फैसला
सारांश
Key Takeaways
- आंध्र प्रदेश में विश्व की पहली समर्पित 'कोको सिटी' स्थापित की जाएगी, जो 250 एकड़ में फैली होगी।
- मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 24 अप्रैल को कृषि समीक्षा बैठक में यह घोषणा की।
- आंध्र प्रदेश मशरूम मिशन 2026-2031 के तहत प्रतिवर्ष 1 लाख मीट्रिक टन केसर उत्पादन का लक्ष्य।
- रायलसीमा को वैश्विक बागवानी हब बनाने और राज्यभर में 50 लाख एकड़ बागवानी विस्तार की योजना।
- अनंतपुर में सेब की प्रायोगिक खेती सफल, वैज्ञानिक अध्ययन के बाद विस्तार का निर्देश।
- बीपीएल किसान परिवारों को दुग्ध उत्पादन और पशुधन आधारित पूरक आय योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
अमरावती, 24 अप्रैल। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि उनका राज्य विश्व की पहली समर्पित 'कोको सिटी' स्थापित करने जा रहा है। यह 250 एकड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना प्रगतिशील किसानों के लिए एक अनुभव एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस परियोजना हेतु उपयुक्त भूमि की पहचान करने का तत्काल निर्देश दिया है।
कृषि समीक्षा बैठक में बड़े निर्णय
शुक्रवार को आयोजित कृषि संबंधी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नायडू ने कृषि क्षेत्र को व्यापक रूप से सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की कृषि भूमि वर्षभर उत्पादक बनी रहनी चाहिए, जिससे किसानों को बहुफसलीय खेती के माध्यम से निरंतर आय प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि किसानों को बाजार की मांग के अनुरूप फसलों की खेती के बारे में जागरूक किया जाए और उन्हें सर्वाधिक लाभदायक विकल्पों की ओर मार्गदर्शन दिया जाए।
मशरूम मिशन और अरकु में केसर उत्पादन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री नायडू ने आंध्र प्रदेश मशरूम मिशन 2026-2031 के अंतर्गत प्रतिवर्ष एक लाख मीट्रिक टन केसर उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने अधिकारियों को अरकु एजेंसी क्षेत्र में केसर की खेती का विस्तार करने और उपज की गुणवत्ता सुधारने के उपायों का अध्ययन करने का आदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि अरकु पहले से ही अपनी विशिष्ट कॉफी के लिए वैश्विक पहचान रखता है। केसर उत्पादन को इसी श्रेणी में विकसित करने की रणनीति आदिवासी किसानों की आजीविका को नई दिशा दे सकती है।
रायलसीमा को वैश्विक बागवानी केंद्र बनाने की योजना
मुख्यमंत्री ने रायलसीमा को एक वैश्विक बागवानी केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए क्लस्टर आधारित विकास योजना बनाने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यभर में बागवानी खेती को 50 लाख एकड़ तक विस्तारित करने की कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया।
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि अनंतपुर में प्रायोगिक आधार पर उगाए जा रहे सेब स्वाद में उत्कृष्ट हैं और वहां की जलवायु परिस्थितियां इस खेती के लिए अनुकूल हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर वैज्ञानिक अध्ययन कराकर खेती के विस्तार का निर्देश दिया।
इसके अतिरिक्त एवोकैडो, अंजीर, कटहल, अमरूद और काली मिर्च की खेती बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। अंजीर जैसे फलों को मूल्यवर्धन के लिए सूखे मेवों के रूप में प्रसंस्कृत करने की योजना भी प्रस्तावित की गई।
प्राकृतिक खेती और किसानों की आय पर फोकस
मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती के तहत उत्पादित उपज के लिए प्रमाणन-आधारित विपणन व्यवस्था सक्षम करने का निर्देश दिया, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। पिछले रबी सीजन में प्रति हेक्टेयर यूरिया उपयोग में आई कमी को उन्होंने एक सकारात्मक संकेत बताया।
उन्होंने रायथु बाजारों से उपज की घर-घर डिलीवरी की व्यवस्था विकसित करने का भी निर्देश दिया। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) किसान परिवारों को सरकारी योजनाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और पशुधन आधारित पूरक आय के अवसर प्रदान करने की बात भी कही गई।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सूचित किया कि राज्यव्यापी फसल सर्वेक्षण जारी है, जिसमें खेती के अंतर्गत फसलों और उपलब्ध जल संसाधनों का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब आंध्र प्रदेश अपनी कृषि अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की कोशिश में है। चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने सत्ता में वापसी के बाद से कृषि विविधीकरण को प्राथमिकता दी है। 'कोको सिटी' जैसी अवधारणा न केवल किसानों को उच्च-मूल्य फसलों की ओर प्रेरित करेगी, बल्कि कृषि पर्यटन और निर्यात के नए द्वार भी खोल सकती है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो केरल और कर्नाटक पहले से ही मसाला और बागवानी फसलों के क्लस्टर विकास में आगे हैं। आंध्र प्रदेश की यह योजना उन राज्यों को प्रतिस्पर्धी चुनौती देने की दिशा में एक सुनियोजित कदम प्रतीत होती है।
आगामी महीनों में 250 एकड़ भूमि चयन, मशरूम मिशन की प्रगति रिपोर्ट और बागवानी विस्तार की कार्ययोजना पर सरकार की कार्यवाही पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।