ईरान में हालात गंभीर: 2,400 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला, दूतावास मुस्तैद

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ईरान में हालात गंभीर: 2,400 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला, दूतावास मुस्तैद

सारांश

ईरान में हालात गंभीर बने हुए हैं लेकिन तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 2,400 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश पहुंचाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दूतावास टीम के समर्पण की सराहना की। ट्रंप ने संघर्षविराम अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया, ईरान ने वार्ता से इनकार किया।

Key Takeaways

  • 2,400 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकालकर स्वदेश पहुंचाया जा चुका है।
  • विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 24 अप्रैल को अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में यह जानकारी दी।
  • तेहरान स्थित भारतीय दूतावास संकट के बावजूद पूरी तरह सक्रिय और नागरिकों की सहायता में जुटा है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्षविराम अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया लेकिन नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी।
  • ईरान ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से इनकार किया और नाकाबंदी हटाने की मांग रखी।
  • ईरान संकट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार परियोजना पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और अब तक 2,400 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर स्वदेश पहुंचाया जा चुका है। मंत्रालय ने साफ किया कि क्षेत्र में संघर्षविराम के बावजूद स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।

विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में क्या कहा गया?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 24 अप्रैल को पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में कहा कि ईरान और उसके आसपास के क्षेत्रों में हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी के लिए संघर्षविराम लागू है, लेकिन शुरुआत से अब तक परिस्थितियां बेहद कठिन रही हैं।

जायसवाल ने तेहरान स्थित भारतीय राजदूत और उनकी पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण और निरंतर कार्य देशवासियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि दबाव में भी बिना रुके काम करने की वजह से ही 2,400 भारतीयों को सुरक्षित घर वापस लाया जा सका।

ट्रंप का संघर्षविराम विस्तार और ईरान का इनकार

इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एकतरफा तौर पर संघर्षविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया। यह कदम तब उठाया गया जब ईरान ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने से मना कर दिया था।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि चूंकि ईरान आंतरिक रूप से बुरी तरह बंटा हुआ है, इसलिए वह तब तक संघर्षविराम जारी रखेंगे जब तक ईरान एक स्पष्ट और एकजुट रुख नहीं अपनाता। साथ ही उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखने की घोषणा भी की।

ईरान की सरकारी मीडिया संस्था प्रेस टीवी के अनुसार, तेहरान ने साफ कहा है कि वह नाकाबंदी हटाए जाने की शर्त पर ही बातचीत में लौटेगा और दबाव में आकर किसी भी वार्ता में शामिल नहीं होगा।

भारत की कूटनीतिक स्थिति और रणनीति

भारत ने इस पूरे संकट में एक संतुलित और मानवीय कूटनीति का परिचय दिया है। ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं जिनमें चाबहार बंदरगाह परियोजना, ऊर्जा सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार प्रमुख आयाम हैं। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी था कि वह अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालते हुए किसी भी पक्ष को नाराज न करे।

गौरतलब है कि ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक, छात्र और व्यापारी मौजूद हैं। संकट के शुरुआती दिनों में संचार व्यवस्था बाधित होने और उड़ानें रद्द होने के कारण निकासी प्रक्रिया अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही। इसके बावजूद भारतीय दूतावास ने विशेष विमानों और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश पहुंचाया।

क्षेत्रीय तनाव और भारत पर संभावित प्रभाव

पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल आपूर्ति मार्ग प्रभावित हो सकते हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है।

इसके अलावा चाबहार बंदरगाह जो भारत की मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच की रणनीतिक कड़ी है, की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका वार्ता की दिशा और संघर्षविराम की स्थायित्व यह तय करेगी कि क्षेत्र में स्थिरता कब लौटेगी।

Point of View

न किसी की आलोचना, लेकिन अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में कोई कसर नहीं। विडंबना यह है कि जहां ट्रंप और ईरान के बीच दबाव बनाम प्रतिरोध का खेल चल रहा है, वहीं भारत उस आग में अपने लोगों को बचाने में जुटा है। असली सवाल यह है कि अगर ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी लंबी खिंची तो चाबहार परियोजना और भारत की मध्य एशिया रणनीति का क्या होगा, यह सिर्फ एक मानवीय संकट नहीं बल्कि भारत की भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक परीक्षा भी है।
NationPress
27/04/2026

Frequently Asked Questions

ईरान से कितने भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है?
अब तक 2,400 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाया जा चुका है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 24 अप्रैल को दी।
ईरान में भारतीय दूतावास अभी भी काम कर रहा है?
हाँ, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है। भारतीय राजदूत और उनकी टीम संकट के बीच भी लगातार नागरिकों की सहायता में जुटी हुई है।
ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्षविराम क्यों बढ़ाया?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान आंतरिक रूप से बंटा हुआ है और एकजुट रुख नहीं अपना पा रहा, इसलिए उन्होंने संघर्षविराम अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया। हालांकि ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी गई है।
ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता में शामिल होने से क्यों मना किया?
ईरान ने स्पष्ट किया कि वह नौसैनिक नाकाबंदी हटाए जाने की शर्त पर ही बातचीत में शामिल होगा। प्रेस टीवी के अनुसार तेहरान ने कहा कि वह दबाव में आकर वार्ता में वापस नहीं आएगा।
ईरान संकट का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी से कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा भारत की चाबहार बंदरगाह परियोजना और मध्य एशिया से व्यापारिक संपर्क भी बाधित होने का खतरा है।
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