भारत-वियतनाम 'उन्नत रणनीतिक साझेदारी': 2030 तक $25 अरब व्यापार लक्ष्य, निर्यात-निवेश को बड़ा बढ़ावा
सारांश
मुख्य बातें
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान 7 मई 2025 को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को 'उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत किया गया। राष्ट्रीय उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने कहा कि इस साझेदारी से भारत को महत्वपूर्ण कच्चे संसाधनों तक बेहतर पहुँच मिलेगी और दीर्घकालिक रूप से निर्यात, निवेश तथा जीडीपी वृद्धि को बड़ा लाभ होगा। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $25 अरब तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
साझेदारी में क्या शामिल है
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि यह द्विपक्षीय साझेदारी आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ करने, विनिर्माण सहयोग, डिजिटल संपर्क और तकनीकी साझेदारी के लिए एक मजबूत ढाँचा तैयार करती है। राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान दुर्लभ खनिज, डिजिटल भुगतान, दवा उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन, संस्कृति, शहरी विकास, शिक्षा और तकनीकी सहयोग समेत कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
जुनेजा ने यह भी रेखांकित किया कि नए द्विपक्षीय समझौते भारत की 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया', दवा निर्यात विस्तार, सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के विकास तथा महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला के विविधीकरण जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप हैं।
दुर्लभ खनिज और विनिर्माण पर असर
दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग से भारत को इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा विनिर्माण के लिए आवश्यक संसाधनों तक बेहतर पहुँच मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी निर्भरता को विविधतापूर्ण बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एआई और आईटी सेवाओं में तकनीकी सहयोग से वैश्विक डिजिटल मूल्य शृंखला में भारत की भूमिका और सुदृढ़ होगी।
दवा, कृषि और अन्य क्षेत्रों को लाभ
दवा क्षेत्र में नियामकीय सहयोग से भारतीय जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को वियतनामी बाज़ार में बेहतर पहुँच मिलेगी, जिन्हें पहले से ही प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देश भारतीय अंगूर और अनार तथा वियतनामी ड्यूरियन और चकोतरा जैसे कृषि उत्पादों के लिए बाज़ार पहुँच को सरल बनाएँगे।
गौरतलब है कि कृषि निर्यात, पर्यटन, विमानन, शहरी बुनियादी ढाँचा और स्मार्ट सिटी विकास जैसे क्षेत्रों को भी इस साझेदारी से लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। दोनों पक्षों ने मानक अनुपालन प्रमाणन सहित अनुकूल नियामकीय वातावरण तैयार करने पर भी सहमति जताई।
एक्ट ईस्ट नीति को मिलेगा बल
पीएचडीसीसीआई के महासचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि इस यात्रा के परिणाम भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' को और मजबूत करते हैं, क्योंकि इससे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रणनीतिक सहयोग का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि वियतनाम के साथ बढ़ा सहयोग संपर्क व्यवस्था, व्यापारिक मजबूती और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी को सुदृढ़ करेगा। वियतनाम ने अपनी आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन तथा निर्यात जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से अधिक उत्पाद आयात करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।