वियतनाम राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा: ₹1.38 लाख करोड़ के व्यापार को नई ऊँचाई, सप्लाई चेन साझेदारी पर फोकस

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वियतनाम राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा: ₹1.38 लाख करोड़ के व्यापार को नई ऊँचाई, सप्लाई चेन साझेदारी पर फोकस

सारांश

वियतनाम राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा महज कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — यह उस आर्थिक धुरी को और मजबूत करने का मौका है जो 2016 से तेजी से बन रही है। 16.46 अरब डॉलर के रिकॉर्ड व्यापार और 28% की तिमाही बढ़ोतरी के बीच, दोनों देश वैश्विक सप्लाई चेन पुनर्गठन में साझा भूमिका के लिए तैयार दिखते हैं।

मुख्य बातें

वियतनाम राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के उद्देश्य से हो रही है।
द्विपक्षीय व्यापार 2016 के 5.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 16.46 अरब डॉलर पर पहुँचा।
2026 की पहली तिमाही में व्यापार 4.8 अरब डॉलर , साल-दर-साल 28% की बढ़ोतरी।
भारतीय कंपनियाँ वियतनाम के 20 से अधिक प्रांतों में परियोजनाएँ चला रही हैं।
विंग्रुप का तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का प्रस्ताव।
टेक्सटाइल, फुटवियर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ऊर्जा नए सहयोग क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं।

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही है। वियतनाम न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में रिकॉर्ड 16.46 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है और 2026 की पहली तिमाही में ही 4.8 अरब डॉलर का व्यापार दर्ज किया गया है। नई दिल्ली में हो रही यह राजनयिक बैठक व्यापार, निवेश, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम है।

व्यापार में ऐतिहासिक उछाल

वियतनाम के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 2016 में दोनों देशों के बीच व्यापार मात्र 5.4 अरब डॉलर था, जो 2025 तक बढ़कर रिकॉर्ड 16.46 अरब डॉलर हो गया। यह वृद्धि उसी वर्ष स्थापित हुई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बाद से लगातार जारी है।

2026 की पहली तिमाही में भी यह रफ्तार बरकरार रही — 4.8 अरब डॉलर का व्यापार दर्ज हुआ, जो साल-दर-साल आधार पर 28 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आँकड़ा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की गहराती जड़ों का प्रमाण है।

पूरक अर्थव्यवस्थाएँ: कौन क्या देता है

भारत से वियतनाम को टेक्सटाइल मटेरियल, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स और स्टील का निर्यात होता है, जो वहाँ के उत्पादन और निर्यात ढाँचे को समर्थन देता है। वहीं, वियतनाम से भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कृषि उत्पाद जैसे मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेस्ड सामान प्रमुखता से आते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों अर्थव्यवस्थाएँ अब एक-दूसरे की पूरक बनती जा रही हैं। जहाँ भारत कच्चे माल, दवाइयों और सॉफ्टवेयर में मजबूत है, वहीं वियतनाम मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक व्यापार नेटवर्क में आगे है। यह पूरकता दोनों देशों को सीधी प्रतिस्पर्धा से परे ले जाकर सप्लाई चेन एकीकरण की ओर अग्रसर कर रही है।

निवेश संबंधों का विस्तार

भारतीय कंपनियाँ वियतनाम के 20 से अधिक प्रांतों और शहरों में परियोजनाएँ संचालित कर रही हैं। दूसरी ओर, वियतनामी कंपनियाँ भी भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं — इसका सबसे उल्लेखनीय उदाहरण है विंग्रुप का तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का प्रस्ताव।

गौरतलब है कि वैश्विक कंपनियाँ अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस में विविधता लाने की कोशिश में लगी हैं, और ऐसे में भारत व वियतनाम दोनों क्षेत्रीय सप्लाई चेन के पुनर्गठन में अहम भूमिका निभाने की दिशा में खुद को स्थापित कर रहे हैं।

नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ

टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे क्षेत्र औद्योगिक सहयोग के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बनते जा रहे हैं। वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलाव और दोनों देशों की पूरक ताकतें इन क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने में सहायक हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ऊर्जा भी सहयोग के उभरते हुए क्षेत्र हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच विकास के नए ढाँचे की नींव रखने का अवसर बन सकती है, जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह यात्रा केवल संख्याओं की पुष्टि करती है या ठोस सप्लाई चेन ढाँचे की नींव रखती है। वैश्विक कंपनियाँ चीन से बाहर विकल्प तलाश रही हैं, और ऐसे में भारत-वियतनाम की पूरकता एक रणनीतिक अवसर है — लेकिन यह अवसर तभी फलेगा जब दोनों देश बंदरगाह कनेक्टिविटी, सीमा शुल्क सुगमता और साझा मानकों पर ठोस कदम उठाएँ। विंग्रुप के तमिलनाडु प्रस्ताव जैसे निवेश संकेत उत्साहजनक हैं, परंतु घोषणाओं और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वियतनाम राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या है?
वियतनाम न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य 2016 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत व्यापार, निवेश, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना है। दोनों देश विकास के लिए एक नया साझा ढाँचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार कितना है?
वियतनाम के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार रिकॉर्ड 16.46 अरब डॉलर तक पहुँचा, जो 2016 के 5.4 अरब डॉलर से तीन गुना अधिक है। 2026 की पहली तिमाही में 4.8 अरब डॉलर का व्यापार दर्ज हुआ, जो साल-दर-साल 28% की बढ़ोतरी है।
भारत-वियतनाम सप्लाई चेन साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
वैश्विक कंपनियाँ अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस में विविधता ला रही हैं, और ऐसे में भारत व वियतनाम की पूरक ताकतें — भारत का कच्चे माल, दवाइयों और सॉफ्टवेयर में दबदबा तथा वियतनाम की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता — क्षेत्रीय सप्लाई चेन पुनर्गठन में दोनों को अहम भागीदार बनाती हैं। यह पूरकता दोनों को प्रतिस्पर्धियों से साझेदारों में बदल रही है।
वियतनाम की विंग्रुप कंपनी भारत में क्या करने जा रही है?
वियतनामी कंपनी विंग्रुप ने तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह भारत में वियतनामी निवेश के बढ़ते रुझान का एक प्रमुख उदाहरण है।
भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी कब स्थापित हुई?
भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी 2016 में स्थापित हुई थी। तब से दोनों देशों ने राजनीतिक भरोसा मजबूत किया है और व्यावहारिक सहयोग को लगातार विस्तार दिया है, जिसका परिणाम व्यापार में तीन गुना वृद्धि के रूप में सामने आया है।
राष्ट्र प्रेस
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