वियतनाम राष्ट्रपति टो लाम ने महाबोधि मंदिर में की प्रार्थना, 7 मई तक भारत दौरे पर
सारांश
मुख्य बातें
वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम ने 5 मई 2026 को अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत बोधगया से की और महाबोधि मंदिर में प्रार्थना अर्पित की — वह पवित्र स्थल जहाँ भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है और यह दौरा 2016 में स्थापित भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है।
बोधगया में स्वागत और आध्यात्मिक संबंध
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गया पहुँचने पर राष्ट्रपति टो लाम का गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि गया जैसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शहर में राष्ट्रपति का स्वागत करना गर्व की बात है और यह ऐतिहासिक यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा भारत और वियतनाम के द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूती देगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2011 में टो लाम ने वियतनाम के फाट तिच पगोडा में बोधगया से लाए गए बोधि वृक्ष का रोपण किया था — यह तथ्य दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत और बौद्ध धार्मिक संबंधों को रेखांकित करता है।
दिल्ली में आधिकारिक कार्यक्रम
6 मई को राष्ट्रपति टो लाम को राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत दिया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके साथ द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत वार्ता करेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी वियतनामी राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगी, जबकि अन्य नेता भी उनसे मिलने वाले हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान बोधगया और मुंबई के अलावा अन्य कार्यक्रम भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलेगी और सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि
टो लाम वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव भी हैं और 7 मई तक भारत में रहेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब 7 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी ने लाम को राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी थी और दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत और वियतनाम के बीच ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध रहे हैं, जो समय के साथ प्रगाढ़ हुए हैं। 2016 में प्रधानमंत्री मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक दशक पूरा होना इस दौरे को विशेष महत्व देता है।
आगे क्या होगा
राष्ट्रपति टो लाम की यह यात्रा बोधगया से शुरू होकर नई दिल्ली और मुंबई तक फैली है। दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली वार्ता से व्यापार, रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के नए अध्याय खुलने की उम्मीद है, और यह दौरा भारत-वियतनाम संबंधों की अगली पीढ़ी की दिशा तय कर सकता है।