वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत को बताया 'विकास और नवाचार का वैश्विक केंद्र', द्विपक्षीय संबंधों को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

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वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत को बताया 'विकास और नवाचार का वैश्विक केंद्र', द्विपक्षीय संबंधों को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

सारांश

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने नई दिल्ली में PM मोदी के साथ शिखर वार्ता के बाद भारत को 'विकास और नवाचार का वैश्विक केंद्र' करार दिया। 50 वर्षीय राजनयिक संबंधों और 10 वर्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देते हुए दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को 'रणनीतिक स्तंभ' बनाने और डिजिटल-तकनीकी सहयोग को नया इंजन बनाने पर सहमति जताई।

मुख्य बातें

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने 6 मई 2026 को नई दिल्ली में भारत को "विकास और नवाचार का वैश्विक केंद्र" बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत में 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों और 10 वर्षों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को "रणनीतिक स्तंभ" बनाने पर सहमति जताई।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन को सहयोग का नया इंजन बनाने की घोषणा।
वियतनाम ने यूएनसीएलओएस 1982 के आधार पर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
वियतनाम ने हर वैश्विक मंच पर भारत को "पूर्ण सहयोग" देने का आश्वासन दिया।

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने बुधवार, 6 मई 2026 को नई दिल्ली में भारत की तीव्र प्रगति की सराहना करते हुए उसे "दुनिया में विकास और नवाचार का वैश्विक केंद्र" बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हनोई, नई दिल्ली के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

शिखर वार्ता के प्रमुख बिंदु

राष्ट्रपति तो लाम ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, "मैं बहुत खुश हूँ और भारत को तेज़ी से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने की बधाई देता हूँ। भारत दुनिया में ग्रोथ और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बन गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत "बेहद सफल" रही और 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों तथा 10 वर्षों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के परिणामों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-वियतनाम संबंध अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के एक नए दशक में प्रवेश कर रहे हैं और दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा हितों को लेकर अधिक सक्रिय हो रहे हैं।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग को 'रणनीतिक स्तंभ' बनाने की सहमति

दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को "रणनीतिक स्तंभ" के रूप में स्थापित करने पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति तो लाम के अनुसार, इस कदम से क्षेत्र में शांति और स्थिरता को और मज़बूती मिलेगी। गौरतलब है कि दोनों देशों की भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए — भारत का हिंद महासागर में और वियतनाम का दक्षिण चीन सागर में — यह साझेदारी रणनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।

तो लाम ने यह भी कहा कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से यूएनसीएलओएस 1982 के आधार पर शांति, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रौद्योगिकी और डिजिटल परिवर्तन: सहयोग का नया इंजन

वियतनामी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन को दोनों देशों के सहयोग का नया इंजन बनाया जाएगा। इसके साथ ही व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर आर्थिक संबंधों को नई गति दी जाएगी। यह दिशा भारत की 'डिजिटल इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' पहलों के अनुरूप है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करने की कोशिश कर रही हैं।

वैश्विक मंचों पर भारत को पूर्ण समर्थन

तो लाम ने भारत की वैश्विक भूमिका के विस्तार का समर्थन करते हुए कहा कि वियतनाम हर वैश्विक मंच पर भारत का "पूर्ण सहयोग" करेगा। दोनों देश क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग को और मज़बूत करेंगे। उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री मोदी का वियतनामी प्रतिनिधिमंडल के भव्य स्वागत के लिए आभार भी व्यक्त किया।

यह शिखर वार्ता दोनों देशों के संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचार करती है — आने वाले महीनों में दोनों पक्षों द्वारा घोषित सहयोग समझौतों के क्रियान्वयन पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ बीजिंग के दबाव के बीच हनोई नई दिल्ली को एक विश्वसनीय संतुलनकारी शक्ति के रूप में देख रहा है। रक्षा सहयोग को 'रणनीतिक स्तंभ' बनाने की सहमति और यूएनसीएलओएस 1982 का स्पष्ट उल्लेख — बिना चीन का नाम लिए — दक्षिण चीन सागर में साझा चिंताओं की ओर इशारा करता है। असली परीक्षा यह होगी कि व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला के वादे कितनी जल्दी ठोस समझौतों में बदलते हैं, क्योंकि भारत-वियतनाम द्विपक्षीय व्यापार अपनी क्षमता से अभी भी काफी नीचे है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
राष्ट्रपति तो लाम की नई दिल्ली यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करना और 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों तथा 10 वर्षों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना था। दोनों नेताओं ने रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी क्या है?
भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी 10 वर्ष पहले स्थापित हुई थी, जो रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और राजनयिक सहयोग के व्यापक ढाँचे को समेटती है। 6 मई 2026 की शिखर वार्ता में इस साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति बनी।
यूएनसीएलओएस 1982 का उल्लेख क्यों महत्वपूर्ण है?
यूएनसीएलओएस 1982 संयुक्त राष्ट्र का समुद्री कानून सम्मेलन है, जो समुद्री सीमाओं और नौवहन अधिकारों को परिभाषित करता है। दक्षिण चीन सागर में वियतनाम और भारत दोनों की रुचि को देखते हुए इसका उल्लेख नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
भारत-वियतनाम रक्षा सहयोग में क्या नया तय हुआ?
दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को 'रणनीतिक स्तंभ' के रूप में स्थापित करने पर सहमति जताई, जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मज़बूती मिलेगी। यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक समन्वय का हिस्सा है।
भारत-वियतनाम प्रौद्योगिकी सहयोग में क्या शामिल होगा?
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन को दोनों देशों के सहयोग का नया इंजन बनाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर आर्थिक संबंधों को नई गति देने पर भी सहमति बनी।
राष्ट्र प्रेस
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