दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय
सारांश
Key Takeaways
- दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा
- द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय
- आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और संस्कृति पर जोर
- वैश्विक स्थिति में भारत की मजबूती
- संभावित क्षेत्रों में रक्षा और शिपबिल्डिंग का सहयोग
सोल, १८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की तीन दिवसीय भारत यात्रा जो रविवार से शुरू हो रही है, इसे भारत और दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यह यात्रा आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा, संस्कृति और जनसामान्य के बीच संबंधों को भी मजबूत करने का प्रयास करेगी।
अंतरराष्ट्रीय पत्रिका द डिप्लोमैट के अनुसार, यह दौरा २०२६ में “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के दूसरे दशक में एक नए चरण की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत की पिछली आधिकारिक यात्रा जुलाई २०१८ में हुई थी, जबकि नरेंद्र मोदी की आखिरी यात्रा दक्षिण कोरिया में फरवरी २०१९ में हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच संपर्क मुख्यतः बहुपरकारी मंचों तक सीमित रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह ठहराव तब हो रहा है जब वैश्विक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति तेजी से मजबूती हासिल कर रही है। बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के बीच कई देश और कंपनियां भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देख रही हैं। भारत ने फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव हासिल किया है और इस दशक के अंत तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ने की संभावना जताई जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत—जो विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है—ने बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में उदारीकरण के माध्यम से अपने कारोबारी माहौल में सुधार किया है।
हालांकि, रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत और दक्षिण कोरिया अभी तक अपने मल्टी एलाइनमेंट दृष्टिकोण के बीच संभावित तालमेल को पूरी तरह नहीं खोज पाए हैं, जबकि इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां तेजी से बन रही हैं।
१९ से २१ अप्रैल तक प्रस्तावित यह यात्रा मौजूदा कूटनीतिक माहौल में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, जून २०२५ में सत्ता में आई दक्षिण कोरिया की वर्तमान सरकार पूर्व राष्ट्रपति मून जे-इन की “न्यू सदर्न पॉलिसी” को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका उद्देश्य एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंधों को मजबूत करना है।
सरकार अपने "१२३ नेशनल पॉलिसी एजेंडा" में "ग्लोबल साउथ" शब्द का उपयोग करते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की तैयारी का संकेत दे रही है। इस संदर्भ में भारत—जो ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज मानी जाती है—के साथ संबंधों को मजबूत करना सियोल की प्राथमिकता बनती दिख रही है।
रिपोर्ट में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पूरक क्षमताओं पर भी जोर दिया गया है। खासतौर पर रक्षा और शिपबिल्डिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के माध्यम से मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं।