वैभव सूर्यवंशी पूरे भारत का लाल — गिरिराज सिंह; J&K विवादित किताब पर भी साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 5 जुलाई 2026 को बेगूसराय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की और उन्हें 'सिर्फ बिहार का नहीं, बल्कि पूरे भारत का लाल' करार दिया। इसी दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में वितरित की गई विवादित पुस्तक 'पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जेएंडके' को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
वैभव सूर्यवंशी पर गिरिराज का बयान
गिरिराज सिंह ने कहा, 'हमारे देश के महान क्रिकेटर, चाहे सचिन तेंदुलकर हों, रवि शास्त्री हों या सुनील गावस्कर, सभी ने वैभव सूर्यवंशी को एक कुशल क्रिकेटर बताया है। मेरा मानना है कि वैभव सूर्यवंशी जैसा क्रिकेटर बहुत कम पैदा होता है।' उन्होंने यह भी कहा कि वैभव ने बेगूसराय में पाँच-छह साल तक अपनी क्रिकेट की तैयारी की है और वह पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
विवादित पुस्तक का मामला
जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में समग्र शिक्षा योजना के तहत 2025-26 शैक्षणिक सत्र में वितरित की गई पुस्तक 'ग्रेट पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (सीरीज 4)' को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस पुस्तक को निजी प्रकाशक ओबेरॉय बुक्स सर्विस ने छापा है और इसे हिलाल अहमद तथा संतोष मीना ने संपादित किया है।
आलोचकों के अनुसार, इस पुस्तक में मकबूल भट जैसे दोषी व्यक्ति के साथ-साथ सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम, मीरवाइज उमर फारूक और मौलवी फारूक जैसे अलगाववादी नेताओं पर अलग-अलग अध्याय शामिल हैं। पुस्तक पर समग्र शिक्षा का लोगो लगाकर इसे स्कूली पुस्तकालयों में भेजा गया था।
गिरिराज सिंह की विपक्ष पर तीखी प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने इस मामले को तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ते हुए कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सत्ता का लालच ही लोगों को तुष्टिकरण के लिए प्रेरित करता है। अगर आज कांग्रेस की सरकार होती, तो ऐसा सिर्फ लाइब्रेरी में ही नहीं, बल्कि स्कूलों में भी हो रहा होता।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी आतंकवादी को 'महान' बताया जाए तो इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता। गिरिराज सिंह ने सीधे अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर चुप रहेंगे।
आगे क्या
विवादित पुस्तक को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह मामला संसदीय सत्र में भी उठाया जा सकता है, ऐसे संकेत मिल रहे हैं।