होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी आपूर्ति बहाल, केंद्र ने आपातकालीन गैस पाबंदियाँ हटाईं
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 जुलाई 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर 'नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026' के अधिकांश प्रावधान वापस ले लिए हैं। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद होर्मुज स्ट्रेट से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की शिपिंग पुनः शुरू होने पर यह फैसला लिया गया है। पश्चिम एशिया संघर्ष के चरम पर लागू किए गए ये आपातकालीन नियम देश में गैस के वितरण को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करते थे।
क्या थे आपातकालीन प्रावधान
संघर्ष के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी शिपमेंट बाधित होने पर केंद्र सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत तीन आपातकालीन ऊर्जा उपाय लागू किए थे। इनमें से पहला था — प्राथमिकता सूची के आधार पर घरेलू उत्पादित गैस और आयातित एलएनजी के बंटवारे पर सरकारी नियंत्रण। दूसरा उपाय पेट्रोकेमिकल इकाइयों से फीडस्टॉक हटाकर रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश देना था, और तीसरा था थोक ग्राहकों को डीजल बिक्री पर प्रतिबंध। ये दोनों पहले के उपाय आपूर्ति स्थिति सामान्य होते ही पहले ही वापस लिए जा चुके थे।
होर्मुज स्ट्रेट का भारत के लिए महत्त्व
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की ज़रूरत का लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस खपत का करीब 50 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। देश के कुल कच्चे तेल आयात का 40-45 प्रतिशत और एलएनजी आपूर्ति का 65 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है। इनमें से अधिकांश कतर से आने वाले कार्गो होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरते हैं, जिससे यह जलमार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील है।
संघर्ष के दौरान क्या हुआ
अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी की आवाजाही बाधित हुई थी। कुछ प्रमुख एलएनजी आपूर्तिकर्ताओं को 'फोर्स मेज्योर' का सहारा लेना पड़ा और कार्गो के मार्ग बदलने पड़े, जिससे भारत में गैस की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुईं। हालाँकि, रुकावट के दौरान भारत वैकल्पिक उत्पादकों से कच्चे तेल की खरीद कर आपूर्ति में विविधता लाने में सफल रहा, लेकिन प्राकृतिक गैस का आयात विशेष रूप से जोखिम में बना रहा।
अब आगे की स्थिति
मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू है, राजनयिक बातचीत जारी है और होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है। इन सकारात्मक संकेतों के बाद आपातकालीन गैस नियमन आदेश के शेष प्रावधानों को भी वापस लेना उचित समझा गया। यह घटनाक्रम भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की पश्चिम एशियाई भू-राजनीति पर गहरी निर्भरता को एक बार फिर रेखांकित करता है, और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए आपूर्ति विविधीकरण की आवश्यकता को और अधिक प्रासंगिक बनाता है।