5 जुलाई 2026
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होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी आपूर्ति बहाल, केंद्र ने आपातकालीन गैस पाबंदियाँ हटाईं

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होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी आपूर्ति बहाल, केंद्र ने आपातकालीन गैस पाबंदियाँ हटाईं

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी आवाजाही बहाल होते ही केंद्र ने आपातकालीन गैस पाबंदियाँ हटा दीं — लेकिन यह राहत उस बड़े सवाल को नहीं मिटाती कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक संकरे जलमार्ग पर कितनी निर्भर है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 5 जुलाई 2026 को 'नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026' के अधिकांश प्रावधान वापस लिए।
होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी शिपिंग बहाल होना और अमेरिका-ईरान युद्धविराम इस फैसले की मुख्य वजह।
भारत अपनी एलएनजी आपूर्ति का लगभग 65 प्रतिशत और कच्चे तेल आयात का 40-45 प्रतिशत पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है।
संघर्ष के दौरान कुछ एलएनजी आपूर्तिकर्ताओं ने 'फोर्स मेज्योर' घोषित कर कार्गो मार्ग बदले थे।
तीन आपातकालीन ऊर्जा उपायों में से एलपीजी उत्पादन और डीजल बिक्री प्रतिबंध पहले ही हटाए जा चुके थे; गैस नियमन प्रावधान अब वापस लिए गए।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 जुलाई 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर 'नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026' के अधिकांश प्रावधान वापस ले लिए हैं। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद होर्मुज स्ट्रेट से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की शिपिंग पुनः शुरू होने पर यह फैसला लिया गया है। पश्चिम एशिया संघर्ष के चरम पर लागू किए गए ये आपातकालीन नियम देश में गैस के वितरण को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करते थे।

क्या थे आपातकालीन प्रावधान

संघर्ष के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी शिपमेंट बाधित होने पर केंद्र सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत तीन आपातकालीन ऊर्जा उपाय लागू किए थे। इनमें से पहला था — प्राथमिकता सूची के आधार पर घरेलू उत्पादित गैस और आयातित एलएनजी के बंटवारे पर सरकारी नियंत्रण। दूसरा उपाय पेट्रोकेमिकल इकाइयों से फीडस्टॉक हटाकर रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश देना था, और तीसरा था थोक ग्राहकों को डीजल बिक्री पर प्रतिबंध। ये दोनों पहले के उपाय आपूर्ति स्थिति सामान्य होते ही पहले ही वापस लिए जा चुके थे।

होर्मुज स्ट्रेट का भारत के लिए महत्त्व

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की ज़रूरत का लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस खपत का करीब 50 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। देश के कुल कच्चे तेल आयात का 40-45 प्रतिशत और एलएनजी आपूर्ति का 65 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है। इनमें से अधिकांश कतर से आने वाले कार्गो होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरते हैं, जिससे यह जलमार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील है।

संघर्ष के दौरान क्या हुआ

अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी की आवाजाही बाधित हुई थी। कुछ प्रमुख एलएनजी आपूर्तिकर्ताओं को 'फोर्स मेज्योर' का सहारा लेना पड़ा और कार्गो के मार्ग बदलने पड़े, जिससे भारत में गैस की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुईं। हालाँकि, रुकावट के दौरान भारत वैकल्पिक उत्पादकों से कच्चे तेल की खरीद कर आपूर्ति में विविधता लाने में सफल रहा, लेकिन प्राकृतिक गैस का आयात विशेष रूप से जोखिम में बना रहा।

अब आगे की स्थिति

मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू है, राजनयिक बातचीत जारी है और होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है। इन सकारात्मक संकेतों के बाद आपातकालीन गैस नियमन आदेश के शेष प्रावधानों को भी वापस लेना उचित समझा गया। यह घटनाक्रम भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की पश्चिम एशियाई भू-राजनीति पर गहरी निर्भरता को एक बार फिर रेखांकित करता है, और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए आपूर्ति विविधीकरण की आवश्यकता को और अधिक प्रासंगिक बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह प्रकरण भारत की ऊर्जा रणनीति की एक बुनियादी कमज़ोरी उजागर करता है — कच्चे तेल के विपरीत, प्राकृतिक गैस आपूर्ति में विविधीकरण अभी भी सीमित है। कतर पर एलएनजी निर्भरता और होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक अनिवार्यता मिलकर एक ऐसा एकल-बिंदु जोखिम बनाते हैं जिसे कोई भी आपातकालीन नियमन आदेश दीर्घकाल में नहीं सँभाल सकता। भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी स्रोतों से दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंधों की ओर तेज़ी से बढ़ना होगा। जब तक यह विविधीकरण ठोस रूप नहीं लेता, हर पश्चिम एशियाई संकट भारत को इसी आपातकालीन चक्र में धकेलता रहेगा।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने आपातकालीन प्राकृतिक गैस पाबंदियाँ क्यों हटाईं?
अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी शिपिंग फिर से शुरू हो गई और आपूर्ति की स्थिति में सुधार आया, इसलिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने 5 जुलाई 2026 को 'नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026' के अधिकांश प्रावधान वापस ले लिए।
होर्मुज स्ट्रेट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भारत अपनी एलएनजी आपूर्ति का लगभग 65 प्रतिशत और कच्चे तेल आयात का 40-45 प्रतिशत पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। इस जलमार्ग में कोई भी रुकावट भारत की ऊर्जा आपूर्ति को सीधे प्रभावित करती है।
पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारत ने गैस संकट से कैसे निपटा?
सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत तीन आपातकालीन उपाय लागू किए — गैस वितरण पर प्राथमिकता-आधारित नियंत्रण, एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश, और थोक ग्राहकों को डीजल बिक्री पर प्रतिबंध। साथ ही, कच्चे तेल की खरीद के लिए वैकल्पिक उत्पादकों से संपर्क किया गया।
'फोर्स मेज्योर' का एलएनजी आपूर्ति पर क्या असर पड़ा?
होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण कुछ एलएनजी आपूर्तिकर्ताओं ने 'फोर्स मेज्योर' घोषित किया, यानी वे अनुबंधित आपूर्ति देने में असमर्थ रहे। इससे कार्गो के मार्ग बदलने पड़े और भारत में गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा।
क्या भारत की एलएनजी आपूर्ति अब पूरी तरह सामान्य हो गई है?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही बहाल हो गई है और आपूर्ति में सुधार आया है, इसलिए आपातकालीन नियमन हटाए गए हैं। हालाँकि, पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और दीर्घकालिक आपूर्ति विविधीकरण अभी भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनिवार्य बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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