बीसीसीआई को कीर्ति आजाद की चेतावनी: ओल्ड ट्रैफर्ड टी20 में डूरेक्स विज्ञापन पर संसद में उठाएंगे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी कीर्ति आजाद ने 5 जुलाई 2026 को ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए भारत-इंग्लैंड दूसरे टी20 मैच के दौरान प्रसारित एक कथित एडल्ट विज्ञापन पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से इस मामले की तत्काल जाँच की माँग की है और चेतावनी दी है कि ज़रूरत पड़ी तो वे इसे संसद में उठाएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
आजाद के अनुसार, मैच के दौरान ओवरों के बीच डूरेक्स ब्रांड का एक विज्ञापन प्रसारित हुआ, जिसे वे 'एडल्ट कंटेंट' की श्रेणी में रखते हैं। उन्होंने कहा कि उस समय अनुमानित 44 करोड़ दर्शक मैच देख रहे थे, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल थे। आजाद ने सीधे शब्दों में कहा, "यह एक एडल्ट विज्ञापन है। बच्चे अपने माता-पिता के साथ मैच देखते हैं। वे 16 साल से कम उम्र के बच्चे हैं। इस देश में क्रिकेट को धर्म माना जाता है।"
बच्चों पर असर की चिंता
पूर्व ऑलराउंडर ने तर्क दिया कि ऐसे विज्ञापन माता-पिता को असहज स्थिति में डाल देते हैं, जबकि बच्चे अनजाने में उनसे प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "माता-पिता को नहीं पता कि कहाँ देखना है, और बच्चे इसे नहीं समझते। वे पूछते हैं कि यह क्या है। इसका उनके दिमाग पर क्या असर होगा? यह एक बहुत बड़ा सवाल है, और बीसीसीआई को इसका जवाब देना चाहिए।"
शराब-तंबाकू बैन से तुलना
आजाद ने विज्ञापन की वैधता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, "शराब और सिगरेट के विज्ञापन प्रतिबंधित हैं, और होने भी चाहिए। तो एडल्ट विज्ञापन क्यों? और वह भी ओवरों के बीच। मैं इसकी वैधता पर बड़ा सवाल उठाता हूँ।" यह ऐसे समय में आया है जब भारत में खेल प्रसारण के दौरान विज्ञापन नियमन पहले से ही बहस का विषय रहा है।
सोशल मीडिया और संसद तक पहुँचाने की चेतावनी
आजाद ने मैच के दौरान ही सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने लिखा, "बच्चे ओल्ड ट्रैफर्ड में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच को लाइव देख रहे हैं। क्या यह शर्म की बात नहीं है कि स्क्रीन पर डूरेक्स का एक विज्ञापन आता है। बीसीसीआई इस पर ध्यान दे।"
बीसीसीआई से जवाब की माँग
पूर्व क्रिकेटर ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली अपील बीसीसीआई से है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले। उन्होंने कहा, "क्रिकेट बोर्ड को पहले इस मामले को देखना चाहिए। अगर ज़रूरत पड़ी, तो मैं इसे संसद में उठाऊंगा।" अब तक बीसीसीआई की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।