'खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए' - हरभजन सिंह का कीर्ति आजाद के बयान पर प्रतिक्रिया

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'खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए' - हरभजन सिंह का कीर्ति आजाद के बयान पर प्रतिक्रिया

सारांश

भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 वर्ल्ड 2026 का खिताब जीता, लेकिन कप्तान के मंदिर जाने पर विवाद खड़ा हुआ। कीर्ति आजाद ने इसे शर्मनाक बताया, जबकि हरभजन सिंह ने खेल और राजनीति को अलग रखने की बात की। यह मुद्दा भारतीय क्रिकेट में धार्मिक आस्था की स्थिति को उजागर करता है।

Key Takeaways

  • भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 वर्ल्ड 2026 का खिताब जीता।
  • कीर्ति आजाद ने कप्तान के मंदिर जाने को शर्मनाक बताया।
  • हरभजन सिंह ने खेल और राजनीति को अलग रखने की बात की।
  • यह मुद्दा भारतीय क्रिकेट में धर्म और आस्था के बीच का विवाद है।
  • खेल का कोई धर्म नहीं होता, यह केवल टीम के लिए होता है।

नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड को फाइनल में हराकर टी20 वर्ल्ड 2026 का खिताब अपने नाम किया। इस जीत के बाद, भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव, कोच गौतम गंभीर, और जय शाह हनुमान मंदिर पहुंचे। कप्तान के इस मंदिर जाने पर टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर आपत्ति जताई, इसे शर्मनाक करार दिया। कीर्ति आजाद के बयान पर हरभजन सिंह ने कहा कि खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए।

पूर्व भारतीय स्पिन गेंदबाज और राज्यसभा सांसद हरभजन ने 'राष्ट्र प्रेस' से बातचीत में कहा कि भारतीय कप्तान और कोच के मंदिर जाने पर सवाल उठाना सही नहीं है, यह उनकी आस्था है। भज्जी ने कहा, "उनकी बातें मत सुनिए। खेल और राजनीति को अलग रखिए। आपकी आस्था है, आप मंदिर जाइए, गुरुद्वारे जाइए, या कहीं भी जाइए। अगर वह गए हैं, तो यह उनकी इच्छा है।"

हरभजन ने कहा कि यह सूर्यकुमार और गौतम गंभीर की इच्छा है कि वह जहाँ जाना चाहें, और इस पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। पूर्व स्पिनर ने कहा कि यदि उन्होंने मन्नत मांगी है, तो वह कहीं भी जा सकते हैं। हरभजन ने यह भी कहा कि इस पर सवाल उठाना उचित नहीं है और हर बार टांग खींचना सही नहीं है।

उल्लेखनीय है कि टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने 'राष्ट्र प्रेस' से बातचीत में कहा था कि खिलाड़ी हमेशा अपनी टीम के लिए खेलते हैं, किसी धर्म के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि भारत में कई धर्मों के लोग रहते हैं और सभी मिलकर टीम का हिस्सा होते हैं। 1983 में जब भारत ने क्रिकेट विश्व कप जीता था, तब भी टीम में अलग-अलग धर्मों के खिलाड़ी थे। खिलाड़ी और खेल का कोई धर्म नहीं होता, वह केवल अपनी टीम के लिए खेलते हैं। इन खिलाड़ियों ने देश का नाम गर्व से ऊँचा किया है।

ट्रॉफी को मंदिर ले जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होगा, तो भारत और पाकिस्तान में क्या अंतर रह जाएगा। कीर्ति ने कहा कि वह खुद हिंदू हैं, लेकिन खेलते समय उन्होंने कभी धर्म को उससे नहीं जोड़ा। उनके मुताबिक कला और खेल का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए उन्होंने इस पर विरोध किया। उन्होंने यह भी बताया कि हर मैच से पहले और बाद में वे खुद मंदिर जाया करते थे, लेकिन देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए इस तरह की चीजें सही नहीं हैं।

कीर्ति आजाद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर भी भारतीय कप्तान सूर्यकुमार और कोच गंभीर के हनुमान मंदिर जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने लिखा कि जब भारत ने कपिल देव की कप्तानी में 1983 में वर्ल्ड कप जीता था, तब टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के खिलाड़ी थे। उस समय टीम ट्रॉफी को अपने देश भारत यानी हिंदुस्तान लेकर आई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय क्रिकेट की ट्रॉफी को किसी एक मंदिर में क्यों ले जाया जा रहा है? यदि ऐसा है तो फिर इसे मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे में क्यों नहीं ले जाया गया?

उन्होंने आगे कहा कि यह टीम पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है, किसी एक खिलाड़ी या किसी के परिवार का नहीं। मोहम्मद सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए और संजू सैमसन भी इसे चर्च में नहीं ले गए। उन्होंने यह भी कहा कि संजू ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। उनके अनुसार यह ट्रॉफी भारत के हर धर्म के लोगों की है और इसे किसी एक धर्म की जीत नहीं माना जाना चाहिए।

Point of View

यह स्पष्ट है कि खेल और राजनीति के बीच की सीमाओं को समझना आवश्यक है। भारतीय क्रिकेट एक धर्मनिरपेक्ष खेल है, और खिलाड़ियों की आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस मुद्दे को सही दृष्टिकोण से देखें।
NationPress
15/03/2026

Frequently Asked Questions

कीर्ति आजाद ने क्या कहा?
कीर्ति आजाद ने भारतीय कप्तान के मंदिर जाने को शर्मनाक बताया और कहा कि खिलाड़ी हमेशा अपनी टीम के लिए खेलते हैं।
हरभजन सिंह का इस पर क्या कहना था?
हरभजन सिंह ने कहा कि खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए और यह खिलाड़ियों की आस्था है।
क्या कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को लेकर भी कुछ कहा?
उन्होंने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर सवाल उठाया और कहा कि यह पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है।
क्या धर्म का खेल से कोई संबंध है?
हरभजन सिंह ने कहा कि कला और खेल का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए इस पर विवाद नहीं होना चाहिए।
इस मुद्दे का क्या महत्व है?
यह मुद्दा भारतीय क्रिकेट में आस्था और धर्मनिरपेक्षता के महत्व को उजागर करता है।
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