ट्रॉफी के लिए हनुमान मंदिर में जाने पर कांग्रेस नेता दलवई के तीखे सवाल
सारांश
Key Takeaways
- ट्रॉफी का महत्व सभी के लिए है।
- धर्म और खेल को अलग रखना चाहिए।
- राजनीतिक बयानबाजी खेल को प्रभावित कर सकती है।
मुंबई, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव द्वारा आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद ट्रॉफी के साथ हनुमान मंदिर में दर्शन पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद के बाद अब कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने सवाल उठाए हैं कि ट्रॉफी सभी देशवासियों की है, यह किसी एक खिलाड़ी की नहीं है।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "यह सभी धर्मों का देश है और यहां सभी का अधिकार है। ट्रॉफी लेकर मंदिर जाने की क्या आवश्यकता थी? यह ट्रॉफी पूरे देश की है। कीर्ति आजाद ने सही मुद्दा उठाया है। खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।" उन्होंने बार-बार यह सवाल उठाया है कि ट्रॉफी को सिर्फ हनुमान मंदिर में ही क्यों ले जाया गया?
इससे पहले, कीर्ति आजाद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सूर्यकुमार और गौतम गंभीर के हनुमान मंदिर जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि जब भारत ने कपिल देव की कप्तानी में १९८३ में वर्ल्ड कप जीता था, तब टीम में सभी धर्मों के खिलाड़ी थे। उस समय टीम ट्रॉफी को अपने देश भारत लेकर आई थी।
उन्होंने यह सवाल उठाया कि भारतीय क्रिकेट की ट्रॉफी को किसी एक मंदिर में क्यों ले जाया जा रहा है? यदि यही मान्यता है तो इसे मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे में क्यों नहीं ले जाया गया? टीएमसी सांसद ने आगे कहा, "यह टीम पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है, किसी एक खिलाड़ी या किसी के परिवार का नहीं। मोहम्मद सिराज ने कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले जाया और संजू सैमसन ने भी इसे चर्च में नहीं ले जाया।"
हुसैन दलवई ने ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "ओम बिरला कई गलतियां कर रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि जिस कुर्सी पर वे बैठे हैं, वह किसी राजनीतिक पार्टी की नहीं है। उन्हें निष्पक्ष रहना चाहिए और सही निर्णय लेने चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "ओम बिरला का जो बर्ताव रहा है, उसके लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इसका मतलब यह है कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। यह अपमान है और यह पूरे देश को दिखा रहा है कि आप सरकार की पक्षधरता कर रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव के जरिए निर्णय लिया जाएगा। यदि थोड़ी भी इज्जत है तो उन्हें खुद इस्तीफा देकर अलग हो जाना चाहिए।"