ई20 ईंधन के लिए 2016 से पहले की BS-III गाड़ियों में केवल रबर पार्ट्स बदलने की जरूरत: गडकरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 29 जुलाई 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से स्पष्ट किया कि 2016 से पहले निर्मित कुछ भारत स्टेज (BS)-III वाहनों को ई20 पेट्रोल पर चलाने से पहले केवल कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं है और इसे नियमित सर्विसिंग के दौरान सहजता से निपटाया जा सकता है।
क्या है BS-III वाहनों की स्थिति
1 अप्रैल 2005 से लागू BS-III मानकों के तहत बने और 2016 से पहले निर्मित वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स व गैस्केट की सामग्री ई20 ईंधन के साथ पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकती। गडकरी ने बताया कि इन पुर्जों को बदलना न तो महँगा है और न ही जटिल — यह काम किसी भी अधिकृत सर्विस सेंटर पर नियमित रखरखाव के दौरान हो सकता है।
अध्ययनों के प्रमुख निष्कर्ष
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), देहरादून, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा किए गए व्यापक अध्ययनों में पाया गया कि कारों और दोपहिया वाहनों के इंजन में ई20 ईंधन के उपयोग के लिए किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता नहीं है। इन अध्ययनों के अनुसार, पुराने वाहनों में भी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से इंजन के असामान्य घिसाव, ड्राइवेबिलिटी, स्टार्टिंग क्षमता अथवा धातु व प्लास्टिक पुर्जों की अनुकूलता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया।
माइलेज पर उठे सवाल और सरकार का जवाब
ई20 ईंधन से माइलेज घटने की चिंताओं पर गडकरी ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियों और परीक्षण एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि ईंधन दक्षता कई कारकों पर निर्भर करती है और इसे अकेले ई20 के उपयोग से नहीं जोड़ा जा सकता। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में एथेनॉल मिश्रण को लेकर आम उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
नीति आयोग की अंतर-मंत्रालयी समिति की भूमिका
26 दिसंबर 2020 को नीति आयोग द्वारा गठित अंतर-मंत्रालयी समिति ने एथेनॉल मिश्रण से जुड़े वाहनों की अनुकूलता, माइलेज और ईंधन दक्षता के सभी पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन किया। इस समिति की रिपोर्ट 'रोडमैप फॉर एथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25' जून 2021 में — ई20 लागू होने से पहले — जारी की गई थी। रिपोर्ट में ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और कृषि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद मटेरियल कम्पैटिबिलिटी, इंजन कैलिब्रेशन, फ्यूल सिस्टम, उत्सर्जन और टिकाऊपन जैसे पहलुओं का विश्लेषण किया गया था। IOC, ARAI और SIAM के अध्ययनों ने भी इन निष्कर्षों का समर्थन किया।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और आगे की राह
गडकरी ने बताया कि दुनिया के कई देशों में 100 वर्षों से भी अधिक समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफल उपयोग हो रहा है। ब्राजील जैसे देश कई दशकों से ई20 से भी अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर अपने वाहन चला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और व्यापक परामर्श आधारित प्रक्रिया के तहत लागू किया गया है। गौरतलब है कि भारत का यह कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय दोनों को साधने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।