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डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण इसी साल अनिवार्य हो सकता है: सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर

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डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण इसी साल अनिवार्य हो सकता है: सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर

सारांश

डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण की अनिवार्यता, इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए ट्रैक्टर-ट्रेलर इंटरचेंजिबिलिटी मॉडल, हाइड्रोजन बसें और MLFF टोलिंग — सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर ने CII समिट में भारत के परिवहन क्षेत्र के डीकार्बोनाइज़ेशन की पूरी रोडमैप सामने रखी।

मुख्य बातें

सड़क परिवहन सचिव वी.
उमाशंकर ने 29 मई को संकेत दिया कि डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग इस साल के अंत तक अनिवार्य हो सकती है।
भारत पेट्रोलियम पहले से आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग पर रणनीतिक शोध कर रही है; नतीजे उत्साहजनक बताए गए।
इलेक्ट्रिक भारी वाहनों के लिए ट्रैक्टर-ट्रेलर इंटरचेंजिबिलिटी मॉडल पर काम जारी; जल्द ड्राफ्ट नोटिफिकेशन आएगा।
दिल्ली-फरीदाबाद और दिल्ली-नोएडा रूट पर हाइड्रोजन बसें शुरू; एकल ईंधन भराई पर 450 किमी की रेंज।
MLFF (बिना बैरियर टोलिंग) अगले साल सभी 4-लेन और बड़े टोल प्लाजा पर लागू करने की योजना; अब तक 2 प्लाजा पर सफलतापूर्वक चालू।
दिल्ली-एनसीआर के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को मंजूरी, जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव वी. उमाशंकर ने शुक्रवार, 29 मई को संकेत दिया कि सरकार 2025 के अंत तक डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग को अनिवार्य बना सकती है — एक ऐसा कदम जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और सड़क परिवहन क्षेत्र के डीकार्बोनाइज़ेशन दोनों लक्ष्यों को एक साथ साधेगा। उन्होंने सीआईआई मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स समिट में यह जानकारी दी।

आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग: क्या है यह नीति और क्यों है अहम

उमाशंकर ने कहा, 'डीजल ब्लेंडिंग को बहुत गंभीरता से देखा जा रहा है। भारत पेट्रोलियम पहले से ही डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग पर रणनीतिक रिसर्च कर रही है और इसके नतीजे काफी उत्साहजनक हैं। संभावना है कि इस साल के आखिर तक ब्लेंडिंग अनिवार्यता लागू हो सकती है।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में डीजल की खपत पेट्रोल के मुकाबले लगभग दोगुनी है, इसलिए डीजल ब्लेंडिंग का असर ऊर्जा सुरक्षा पर पेट्रोल ब्लेंडिंग से भी अधिक होगा। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार पहले से ही पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्यों को तेज़ी से पूरा कर रही है।

इलेक्ट्रिक भारी वाहनों के लिए नई नीति की तैयारी

सचिव ने बताया कि मंत्रालय जल्द ही ट्रक-ट्रेलर से जुड़ा ड्राफ्ट नोटिफिकेशन लाने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग और बैटरी चार्जिंग का इकोसिस्टम विकसित करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बैटरी चार्जिंग में अधिक समय लगने के कारण ट्रकों को लंबे समय तक खड़ा रखना व्यावहारिक नहीं होगा। इसके समाधान के रूप में ट्रैक्टर-ट्रेलर इंटरचेंजिबिलिटी मॉडल पर काम हो रहा है, जिसमें पूरी बैटरी नहीं बल्कि ट्रक का अगला हिस्सा बदला जाएगा और कंटेनर व ट्रेलर को अलग किया जा सकेगा।

हाइड्रोजन लॉजिस्टिक्स: पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे उत्साहजनक

हाइड्रोजन-आधारित लॉजिस्टिक्स पर उमाशंकर ने कहा कि सरकारी प्रयोगों के नतीजे अच्छे रहे हैं और लॉजिस्टिक्स की लागत अन्य विकल्पों के मुकाबले अधिक नहीं है। हालांकि, हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित करने में अधिक खर्च आता है, जिसके लिए सरकार फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट्स में सहायता दे रही है।

दिल्ली-फरीदाबाद और दिल्ली-नोएडा रूट पर हाल ही में हाइड्रोजन बसें शुरू की गई हैं। उन्होंने बताया कि एक बार ईंधन भरने के बाद ये बसें लगभग 450 किलोमीटर तक चल सकती हैं और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर पर नए एक्सप्रेसवे के लिए केवल तीन रिफ्यूलिंग स्टेशन पर्याप्त होंगे।

मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग: अगले साल देशव्यापी लागू होने की योजना

उमाशंकर ने जानकारी दी कि मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) यानी बिना बैरियर वाली टोलिंग प्रणाली अगले साल देशभर में लागू की जा सकती है। इस तकनीक में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति कम करने की आवश्यकता नहीं होगी।

उन्होंने बताया कि यह प्रणाली दो टोल प्लाजा पर सफलतापूर्वक लागू हो चुकी है और तीसरा टोल प्लाजा अगले 8-10 दिनों में शुरू होगा। योजना के अनुसार, अगले वर्ष के भीतर देश के सभी चार लेन और उससे बड़े टोल प्लाजा पर MLFF लागू करने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली-एनसीआर के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।

गौरतलब है कि सड़क परिवहन मंत्रालय एक्सप्रेसवे और एक्सेस-कंट्रोल हाईवे पर धीमी और तेज़ रफ्तार वाहनों के ट्रैफिक को अलग करने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है, ताकि औसत वाहन गति में सुधार हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और आपूर्ति श्रृंखला की तैयारी में होगी — आइसोब्यूटेनॉल का घरेलू उत्पादन अभी सीमित है और बड़े पैमाने पर ब्लेंडिंग के लिए रिफाइनरी-स्तर के बुनियादी ढाँचे में बदलाव की जरूरत होगी। पेट्रोल इथेनॉल ब्लेंडिंग में देरी के अनुभव को देखते हुए, 'साल के अंत तक' की समयसीमा पर सतर्क रहना उचित है। MLFF टोलिंग और हाइड्रोजन बसों की प्रगति सराहनीय है, पर हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग नेटवर्क का विस्तार अभी भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीजल में आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग क्या है और यह क्यों जरूरी है?
आइसोब्यूटेनॉल एक जैव-आधारित अल्कोहल है जिसे डीजल में मिलाने से उत्सर्जन कम होता है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है। भारत में डीजल की खपत पेट्रोल से लगभग दोगुनी है, इसलिए इसका असर व्यापक होगा।
यह ब्लेंडिंग अनिवार्यता कब तक लागू होगी?
सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार, इस साल के अंत तक ब्लेंडिंग अनिवार्यता लागू होने की संभावना है। भारत पेट्रोलियम पहले से इस पर रणनीतिक शोध कर रही है।
इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए ट्रैक्टर-ट्रेलर इंटरचेंजिबिलिटी मॉडल क्या है?
इस मॉडल में पूरी बैटरी बदलने की बजाय ट्रक का अगला हिस्सा (ट्रैक्टर) बदला जाएगा, जबकि कंटेनर और ट्रेलर अलग रहेंगे। इससे लंबे चार्जिंग समय की समस्या हल होगी और भारी वाहनों का परिचालन बाधित नहीं होगा।
MLFF टोलिंग प्रणाली क्या है और इसे कब लागू किया जाएगा?
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) एक बिना बैरियर वाली टोलिंग प्रणाली है जिसमें वाहनों को रुकना नहीं पड़ता। यह दो टोल प्लाजा पर पहले से सफलतापूर्वक चल रही है और अगले साल सभी चार लेन व बड़े टोल प्लाजा पर लागू करने की योजना है।
दिल्ली में हाइड्रोजन बसें किन रूटों पर चल रही हैं और इनकी रेंज कितनी है?
हाइड्रोजन बसें फिलहाल दिल्ली-फरीदाबाद और दिल्ली-नोएडा रूट पर चल रही हैं। एक बार ईंधन भरने पर ये बसें लगभग 450 किलोमीटर तक चल सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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