ई20 एथेनॉल ब्लेंडिंग वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित, वाहन पार्ट्स को नुकसान का कोई प्रमाण नहीं: उद्योग विशेषज्ञ
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच उद्योग विशेषज्ञों ने 4 जुलाई को स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों, वैश्विक मानकों और व्यापक परामर्श के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार वाहन के पार्ट्स को नुकसान पहुँचने का कोई प्रमाणित साक्ष्य अब तक सामने नहीं आया है, और इक्का-दुक्का शिकायतों की जड़ ईंधन में खराबी या मिलावट हो सकती है।
ई20 लागू करने की पृष्ठभूमि
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट अफेयर्स) राहुल भारती ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में एथेनॉल के उपयोग को लेकर कई प्रकार की शंकाएँ और प्रश्न सामने आए हैं। उन्होंने कहा, "भारत में 2023 से ई20 ईंधन के अनुरूप वाहन तैयार करना अनिवार्य किया गया है। इससे पहले ई10 (10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू था। इसलिए 2023 के बाद से बाज़ार में आने वाले वाहन और उपलब्ध ईंधन — दोनों ई20 मानकों के अनुसार हैं।"
गौरतलब है कि इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2013-14 में भारत में पेट्रोल में केवल 1.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था। उन्होंने कहा, "सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लागू करना था, जिसे दिसंबर 2025 में तय समय से पाँच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया।"
वैज्ञानिक आधार और परीक्षण प्रक्रिया
शुक्ला ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया। इसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श किया गया। उनके अनुसार यह कार्यक्रम ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) तथा वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए विस्तृत परीक्षणों पर आधारित है, और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अपनाई जा रही वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप भी है।
वाहन उद्योग की प्रतिक्रिया
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और कार्यकारी उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट अफेयर्स एवं गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग उन चुनिंदा क्षेत्रों में से है जहाँ गुणवत्ता और प्रदर्शन को लेकर बेहद कड़े नियम लागू होते हैं। उन्होंने कहा, "वाहनों के लिए उत्सर्जन, सुरक्षा और प्रदर्शन के सख्त मानक तय हैं। इसी तरह ईंधन के लिए भी स्पष्ट गुणवत्ता मानक निर्धारित किए गए हैं।"
गुलाटी ने बताया कि वाहन निर्माता किसी भी नए मॉडल को बाज़ार में उतारने से पहले उसका विस्तृत परीक्षण करते हैं और वाहन को सर्टिफिकेशन तथा होमोलोगेशन की अनिवार्य प्रक्रिया से गुज़रना होता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौती का हवाला देते हुए कहा कि एथेनॉल एक लो-कार्बन ईंधन है, क्योंकि इसका उत्पादन पौधों से होता है और यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल है।
माइलेज और वारंटी पर असर
विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि वाहन के मॉडल के अनुसार माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की मामूली कमी आ सकती है। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ई10 मानक वाले वाहनों की वारंटी पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कुछ वाहन चालकों ने ई20 ईंधन के उपयोग के बाद इंजन संबंधी शिकायतें दर्ज कराई हैं — जिन्हें विशेषज्ञ ईंधन की गुणवत्ता या मिलावट से जोड़ते हैं, न कि एथेनॉल मिश्रण से।
आगे देखें तो एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की सफलता काफी हद तक ईंधन वितरण श्रृंखला में गुणवत्ता नियंत्रण और उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने पर निर्भर करेगी।