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ई20 एथेनॉल ब्लेंडिंग वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित, वाहन पार्ट्स को नुकसान का कोई प्रमाण नहीं: उद्योग विशेषज्ञ

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ई20 एथेनॉल ब्लेंडिंग वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित, वाहन पार्ट्स को नुकसान का कोई प्रमाण नहीं: उद्योग विशेषज्ञ

सारांश

ई20 ईंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मारुति, टोयोटा और EIL के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया — यह कार्यक्रम ARAI और SIAM के वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित है, वाहन पार्ट्स को नुकसान का कोई साक्ष्य नहीं है, और दिसंबर 2025 में 20% का लक्ष्य पाँच साल पहले ही हासिल हो चुका है।

मुख्य बातें

ई20 ईंधन को ARAI , SIAM और वाहन निर्माताओं के विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर लागू किया गया है।
भारत ने दिसंबर 2025 में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पहले हासिल किया।
वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण मात्र 1.5 प्रतिशत था, जो अब 20 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
वाहन मॉडल के अनुसार माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की मामूली कमी संभव, लेकिन ई10 वाहनों की वारंटी पर कोई असर नहीं।
2023 से बाज़ार में आने वाले सभी नए वाहन ई20 मानकों के अनुसार निर्मित किए जा रहे हैं।
इक्का-दुक्का शिकायतों की वजह ईंधन में खराबी या मिलावट को बताया गया, न कि एथेनॉल मिश्रण को।

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच उद्योग विशेषज्ञों ने 4 जुलाई को स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों, वैश्विक मानकों और व्यापक परामर्श के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार वाहन के पार्ट्स को नुकसान पहुँचने का कोई प्रमाणित साक्ष्य अब तक सामने नहीं आया है, और इक्का-दुक्का शिकायतों की जड़ ईंधन में खराबी या मिलावट हो सकती है।

ई20 लागू करने की पृष्ठभूमि

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट अफेयर्स) राहुल भारती ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में एथेनॉल के उपयोग को लेकर कई प्रकार की शंकाएँ और प्रश्न सामने आए हैं। उन्होंने कहा, "भारत में 2023 से ई20 ईंधन के अनुरूप वाहन तैयार करना अनिवार्य किया गया है। इससे पहले ई10 (10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू था। इसलिए 2023 के बाद से बाज़ार में आने वाले वाहन और उपलब्ध ईंधन — दोनों ई20 मानकों के अनुसार हैं।"

गौरतलब है कि इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2013-14 में भारत में पेट्रोल में केवल 1.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था। उन्होंने कहा, "सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लागू करना था, जिसे दिसंबर 2025 में तय समय से पाँच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया।"

वैज्ञानिक आधार और परीक्षण प्रक्रिया

शुक्ला ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया। इसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श किया गया। उनके अनुसार यह कार्यक्रम ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) तथा वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए विस्तृत परीक्षणों पर आधारित है, और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अपनाई जा रही वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप भी है।

वाहन उद्योग की प्रतिक्रिया

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और कार्यकारी उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट अफेयर्स एवं गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग उन चुनिंदा क्षेत्रों में से है जहाँ गुणवत्ता और प्रदर्शन को लेकर बेहद कड़े नियम लागू होते हैं। उन्होंने कहा, "वाहनों के लिए उत्सर्जन, सुरक्षा और प्रदर्शन के सख्त मानक तय हैं। इसी तरह ईंधन के लिए भी स्पष्ट गुणवत्ता मानक निर्धारित किए गए हैं।"

गुलाटी ने बताया कि वाहन निर्माता किसी भी नए मॉडल को बाज़ार में उतारने से पहले उसका विस्तृत परीक्षण करते हैं और वाहन को सर्टिफिकेशन तथा होमोलोगेशन की अनिवार्य प्रक्रिया से गुज़रना होता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौती का हवाला देते हुए कहा कि एथेनॉल एक लो-कार्बन ईंधन है, क्योंकि इसका उत्पादन पौधों से होता है और यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल है।

माइलेज और वारंटी पर असर

विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि वाहन के मॉडल के अनुसार माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की मामूली कमी आ सकती है। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ई10 मानक वाले वाहनों की वारंटी पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कुछ वाहन चालकों ने ई20 ईंधन के उपयोग के बाद इंजन संबंधी शिकायतें दर्ज कराई हैं — जिन्हें विशेषज्ञ ईंधन की गुणवत्ता या मिलावट से जोड़ते हैं, न कि एथेनॉल मिश्रण से।

आगे देखें तो एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की सफलता काफी हद तक ईंधन वितरण श्रृंखला में गुणवत्ता नियंत्रण और उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ईंधन वितरण श्रृंखला में गुणवत्ता नियंत्रण कितना पुख्ता है — क्योंकि अगर शिकायतें वाकई मिलावट से हैं, तो यह नीति की नहीं, क्रियान्वयन की विफलता है। 2013-14 में 1.5 प्रतिशत से 2025 में 20 प्रतिशत तक की यात्रा प्रभावशाली है, परंतु उपभोक्ता जागरूकता और पंप-स्तरीय गुणवत्ता जाँच के बिना यह उपलब्धि विवादों में उलझती रहेगी।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई20 एथेनॉल ब्लेंडिंग क्या है और यह कब से लागू हुई?
ई20 का अर्थ है पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण। भारत ने यह लक्ष्य दिसंबर 2025 में निर्धारित समय से पाँच वर्ष पहले हासिल कर लिया, और 2023 से सभी नए वाहनों का निर्माण ई20 मानकों के अनुसार अनिवार्य किया गया है।
क्या ई20 ईंधन से वाहन के पार्ट्स को नुकसान पहुँचता है?
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार ई20 ईंधन से वाहन पार्ट्स को नुकसान पहुँचने का कोई प्रमाणित साक्ष्य नहीं है। जो इक्का-दुक्का शिकायतें आई हैं, उनकी वजह ईंधन में खराबी या मिलावट को बताया गया है, न कि एथेनॉल मिश्रण को।
ई20 ईंधन से माइलेज पर क्या असर पड़ता है?
विशेषज्ञों ने बताया कि वाहन के मॉडल के अनुसार माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत की मामूली कमी आ सकती है। हालाँकि, ई10 मानक वाले पुराने वाहनों की वारंटी पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम किन परीक्षणों पर आधारित है?
यह कार्यक्रम ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए विस्तृत परीक्षणों पर आधारित है। इसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श भी किया गया था।
एथेनॉल ईंधन पर्यावरण के लिए कितना फायदेमंद है?
एथेनॉल एक लो-कार्बन ईंधन है क्योंकि इसका उत्पादन पौधों से होता है, जिससे यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन कम करता है। टोयोटा किर्लोस्कर के विक्रम गुलाटी के अनुसार यह कार्यक्रम वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप है।
राष्ट्र प्रेस
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