ई20 एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति: 25 वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू, संसद में सरकार का स्पष्टीकरण
सारांश
मुख्य बातें
भारत में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) को लेकर चल रही बहस के बीच विशेषज्ञों और केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नीति किसी अचानक निर्णय का परिणाम नहीं है। वर्ष 2001 में प्रायोगिक मिश्रण से शुरू हुई इस यात्रा को लगभग 25 वर्षों के वैज्ञानिक शोध, फील्ड ट्रायल और बहु-हितधारक परामर्श के बाद चरणबद्ध ढंग से राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्वच्छ ईंधन के वैश्विक लक्ष्यों की दिशा में भी निर्णायक कदम है।
नीति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी (RGIPT) के प्रबंधन अध्ययन विभाग के पूर्व प्रमुख और पूर्व डीन (फैकल्टी अफेयर्स) प्रोफेसर संजय कुमार कर ने कहा कि किसी भी सरकारी नीति को लागू करने की एक सुनिश्चित प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा, 'जैव ईंधन नीति विभिन्न हितधारकों से विस्तृत चर्चा और वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद तैयार की गई है — यह कहना सही नहीं होगा कि यह नीति अचानक लागू कर दी गई।'
प्रोफेसर कर ने बताया कि भारत में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत 2001 में परीक्षण के रूप में हुई थी, जबकि राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 में लागू की गई और 2022 में उसमें महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। उनके अनुसार, किसी भी तकनीक को परिपक्व और व्यावहारिक रूप से सफल बनाने के लिए यह समयावधि पर्याप्त है।
संसद में सरकार का स्पष्टीकरण
लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार को बताया कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम लागू करने से पूर्व नीति आयोग, ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ विस्तृत वैज्ञानिक परामर्श किया गया था।
परीक्षण के प्रमुख पहलू
सरकार के अनुसार, ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल, IIP और वाहन निर्माताओं ने ई20 पेट्रोल पर इंजन की मजबूती, ड्राइविंग प्रदर्शन, स्टार्टिंग क्षमता, जंग-रोधी क्षमता, विभिन्न पुर्जों की अनुकूलता, उत्सर्जन स्तर और ईंधन दक्षता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यापक परीक्षण किए। इन अध्ययनों में निर्धारित मानकों के तहत ई20 पेट्रोल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित पाया गया।
गौरतलब है कि परीक्षणों में पुराने और नए दोनों प्रकार के वाहनों के प्रदर्शन में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं पाई गई और न ही इंजन या अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों में किसी असामान्य घिसावट का प्रमाण मिला।
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक लक्ष्यों से जुड़ाव
प्रोफेसर कर ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-7) — यानी सबके लिए स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा — के अनुरूप है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय और वैकल्पिक ईंधन स्रोतों पर जोर दे रहा है।
आगे की राह
20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) का लक्ष्य हासिल करना विशेषज्ञों की नज़र में भारत की एक बड़ी नीतिगत उपलब्धि है। प्रोफेसर कर के अनुसार, यह उपलब्धि भविष्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नींव रखती है और भारत को वैश्विक स्वच्छ ईंधन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाती है। नीति के सफल क्रियान्वयन की निगरानी के लिए संस्थागत ढाँचे को और सुदृढ़ किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।