इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई22 से ई30) पर शून्य एक्साइज ड्यूटी, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 11 जून 2026 को उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से पूरी तरह मुक्त करने की घोषणा की है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, ई22, ई25, ई27 और ई30 श्रेणी के इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर अब शून्य एक्साइज ड्यूटी लागू होगी। यह निर्णय देश के जैव-ईंधन कार्यक्रम को ई20 से आगे ले जाने की दिशा में एक ठोस नीतिगत कदम माना जा रहा है।
अधिसूचना की मुख्य शर्तें
केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 5ए के तहत जारी इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि छूट का लाभ तभी मिलेगा जब संबंधित ईंधन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के विनिर्देश आईएस 19850 के अनुरूप हो। इसके अतिरिक्त, मिश्रण में उपयोग किए गए पेट्रोल पर आवश्यक कर का भुगतान और इथेनॉल पर लागू जीएसटी की अदायगी अनिवार्य शर्त है।
नई व्यवस्था के अंतर्गत ईंधन की संरचना इस प्रकार होगी: ई22 में 78% पेट्रोल और 22% इथेनॉल; ई25 में 25%, ई27 में 27% और ई30 में 30% इथेनॉल का मिश्रण होगा।
ई20 के बाद अगला पड़ाव
गौरतलब है कि भारत ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (ई20) का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिया था। यह नई अधिसूचना उस उपलब्धि के बाद अगले चरण की तैयारी का संकेत है। हाल ही में ई30 तक के मानकों को मंजूरी दिए जाने के बाद यह कर-छूट उन मानकों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाने की दिशा में पहला कदम है।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराती अनिश्चितताओं ने वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को देखते हुए उच्च इथेनॉल मिश्रण को ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
जैव-ईंधन उद्योग पर असर
हाल के वर्षों में तेल विपणन कंपनियों द्वारा इथेनॉल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। एक्साइज छूट मिलने से ई22 से ई30 ईंधन की लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, जिससे घरेलू इथेनॉल उत्पादकों — विशेषकर चीनी मिलों और अनाज-आधारित डिस्टिलरी — को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने का सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य भी इस कदम से पुष्ट होता है।
आगे की राह
हालाँकि ई25 या ई30 के लिए अभी तक कोई औपचारिक राष्ट्रीय रोडमैप घोषित नहीं किया गया है, लेकिन नए BIS मानकों और इस कर-छूट के संयोजन से यह संकेत मिलता है कि सरकार उच्च इथेनॉल मिश्रण के व्यापक व्यावसायिक रोलआउट की नींव तैयार कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अगला महत्वपूर्ण कदम वाहन निर्माताओं द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल इंजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा।